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Blog Entry# 1405412  
Posted: Mar 23 2015 (21:33)

1 Responses
Last Response: Mar 23 2015 (21:33)
  
Rail News
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395 views
Mar 23 2015 (21:32)   डेढ़वर्ष के इंतजार के बाद बीकानेर को मिली बिलासपुर के लिए स्पेशल ट्रेन
 

Koush12461^~   937 news posts
Entry# 1405412   News Entry# 217811         Tags   Past Edits
बीकानेर। डेढ़वर्ष के लंबे इंतजार के बाद कमिश्‍नर ऑफ रेलवे सेफ्टी ने बीकानेर-बिलासपुर ट्रेन को सेफ्टी क्लीयरेंस दे दी है। सप्ताह में दो बार चलने वाली इस ट्रेन का संचालन अप्रैल में होने की संभावना है। हालांकि अब तक इस ट्रेन को साप्ताहिक स्पेशल के रूप में चलाया जा रहा है।
रेल बजट 2013-14 में घोषित इस ट्रेन का पहले रैक के अभाव में परिचालन में देरी हुई। जब रैक पहुंचे तो क्लीयरेंस को लेकर तकनीकी परेशानी सामने आई। रेलवे बोर्ड ने इस ट्रेन को अत्याधुनिक बोगी यानी लिंक हॉफमैन बुस (एलएचबी) से इसका परिचालन करना तय किया था। इसके तहत एसी, स्लीपर जनरल कोच भी बिलासपुर पहुंच गए थे लेकिन जनरल कोच एलएचबी की जगह एलएचबी-3 गए जिसके कारण रेलवे की
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परेशानी बढ़ गई।
क्योंकि क्लीयरेंस एलएचबी-3 का नहीं बल्कि एलएचबी का था। ऐसी स्थिति में सेफ्टी क्लीयरेंस लेने की प्रक्रिया शुरू हुई। सीआरएस से क्लीयरेंस नहीं मिलने के कारण इसे साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन के रूप में चलाने का निर्णय लिया गया, जो कि वर्तमान में 28 मार्च 2015 तक चलेगी। सेफ्टी क्लीयरेंस मिलते ही रेलवे ने इस ट्रेन के परिचालन को लेकर कवायद तेज कर दी है।
ऐसे है एलएचबी कोच, बीकानेर में होगा पहली बार उपयोग
जर्मन तकनीक से बने लिंक हॉफमैन बुस (एलएचबी) कोच को भारतीय रेल में सन् 2000 में प्रयोग लेना शुरू किया। भारत में इनका निर्माण कपूरथला रेल कोच फैक्ट्री में हो रहा है। लेकिन बीकानेर मंडल में पहली बार यह कोच इस ट्रेन में उपयोग में लिए जाएंगे।
खासियत यह है कि इन्हें एंटी टेलिस्कोपिक तकनीक से तैयार किया गया है जिससे गाड़ियों के टकराने की स्थिति में कोच पलटेंगे नहीं। परंपरागत बोगियों की तुलना में यह 10 टन हल्के है जिससे 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार मिलती है तथा इस रफ्तार को 200 किमी प्रति घंटे तक बढ़ाया जा सकता है।
इसमें डिस्क ब्रेक और जर्क रोकने के लिए शॉकअप भी लगाए गए है। इनकी लंबाई बढ़ाई गई है जिससे बर्थ की संख्या बढ़ी है। यह कोच स्टेनलेस स्टील के बने हुए है तथा अंदर से यह एल्युमिनियम के होने के कारण हलके है। इनका वातानुकूलित सिस्टम भी पुराने कोच के मुकाबले ज्यादा पावरफुल है।
80 कोच दो जनरेटर हो तो चले ट्रेन
बीकानेर-बिलासपुर के साथ जोधपुर-बिलासपुर ट्रेन के संचालन की तैयारी है। इन दोनों ट्रेनों के परिचालन के लिए रेलवे को तीन रैक की आवश्यकता है जिसमें 80 कोच होंगे। साथ ही दो जनरेटर भी चाहिए।

  
1425 views
Mar 23 2015 (21:33)
Koush12461^~   78715 blog posts   5089 correct pred (78% accurate)
Re# 1405412-1            Tags   Past Edits
regular run expectted in april ..
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