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Yesterday (22:11)  खतरनाक रेल रूटों से गुजरना खतरे से खाली नहीं (nari.punjabkesari.in)
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Commentary/Human Interest

News Entry# 298139   Blog Entry# 2216573     
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Posted by: OM SAI RAM~  61 news posts
खतरनाक रेल रूटों से गुजरना खतरे से खाली नहीं
ट्रैवलिंगः ट्रेन में सफर करना बहुत मजेदार होता है। रेलगाड़ी में बैठकर बाहर का खूबसूरत नजारा आसानी से देखा जा सकता है।लंबा सफर करने के दौरान अगर थक गए हैं तो ट्रेन में घूम भी सकते हैं लेकिन कई बार खतरनाक ट्रैक से गुजरते वक्त लोगों की सांसे थम जाती हैं। लोग दोबारा इन रिस्क भरे रेल रास्तों से दोबारा कभी न गुजरने की भी कल्पना करते हैं। दुनिया में ऐसे ही कुछ दिलचस्प और खतरनाक रेल रूट हैं जिन पर गुजरने से डर लगता है।
1.
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ट्रेन ए लास नुबेस, अर्जेंटीना
चिली की सीमा तक जाने वाला इस ट्रेन का रूट एंडीज पर्वतमाला से होकर गुजरते हुए उत्तर पश्चिमी अर्जेंटीना से गुजरता है। इस रूट की लाइन टेढी-मेढ़ी हैं, जिन पर 29 पुल, 21 सुरंगें और 13 इनलैंड ब्रिज हैं और इस रास्ते को बनाने के लिए 27 सालों का लंबा समय लगा।
2. चेन्नई-रामेश्वरम रूट, भारत
भारत के चेन्नई-रामेश्वरम का यह रूट एक पुल से होतर गुजरता है जो समुद्र के ऊपर बना हुआ है। समुद्र की बड़ी-बड़ी लहरों और तूफानों से इस रूट पर खतरा बना रहता है। इस पुल की लंबाई 2.06 कि.मी है।
3. व्हाइट पास, अलास्का, अमेरिका
अमेरिका के अलास्का का व्हाइट पास रेल रूट बहुत खतरनाक है। इसके एक तरफ चट्टान और दूसरी तरफ बहुत गहरी खाई है। कमजोर दिल वाले इस पुल पर जाने से डरते हैं।
4. कुरैंडा सीनिक रेलरोड, ऑस्ट्रेलिया
इस रेलरोड में बहुत से खूबसूरत नजारे देखने को मिलते हैं। विश्व धरोहर मानी जाने वाली बैरन नैशनल पार्क और मैकएलिस्टर रेंज का यह रास्ता बेहद खतरनाक है।तीखे मोड और गहरी खाइयों से गुजरने वाले इस रास्ते से गुुजरते वक्त लोगों की सांस अटकी रहती है।
5. लिंटन एंड लिंमाउथ क्लिफ, यूके
लिंमाउथ और लिंटन कस्बे को जोड़ने वाली यह लाइन बहुत खतरनाक है। यह ट्रैक 862 फुट की ऊंचाई पर बना हुआ है। जब इस लाइन से ट्रैन गुजरती है तो लोगों की सांसे थम जाती हैं।
6. जॉर्जटाउन लूप रेलरोड, अमेरिका
इस ट्रेन का रेल रूट बहुत संकरा है। यह ट्रैक 7.2 कि.मी लंबा है। घुमावदार और तीखे मोड़ के कारण यह रास्ता बहुत खतरनाक है।

  
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Yesterday (23:01)
manindersaini3   96 blog posts   64 correct pred (69% accurate)
Re# 2216573-1            Tags   Past Edits
Crossing Pamban bridge is really thrilling while sitting/standing on doors.
  
Yesterday (22:07)  Tawang: Strategic push: India explores feasibility of connecting Tawang with rail network (timesofindia.indiatimes.com)
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Commentary/Human InterestNFR/Northeast Frontier  -  

News Entry# 298138     
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Posted by: rdb*^  127318 news posts
HIGHLIGHTS
Centre has asked Minister of State for Railways Manoj Sinha and Minister of State for Home Affairs Kiren Rijiju to explore feasibility of the rail network
It takes 18 hours from Guwahati in Assam to reach Tawang through road
NEW DELHI: Giving strategic interests a further push, the Centre is exploring feasibility to connect China-India border district Tawang in Arunachal Pradesh with the
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railway network.The Centre has asked Minister of State for Railways Manoj Sinha and Minister of State for Home Affairs Kiren Rijiju, who is also an MP from Arunachal West seat, to explore the feasibility of the rail network in the remote area.The two ministers will tour the state on Saturday to study the viability of connecting Tawang with Bhalukpong which is the last station of Indian Railways on Assam-Arunachal Pradesh border.Sinha and Rijiju will be visiting Arunachal Pradesh from April 1 in connection with commencement of final location survey of new broad gauge line connecting Bhalukpong with Tawang which is a distance of 378 kilometres.It takes 18 hours from Guwahati in Assam to reach Tawang through road. Guwahati is the nearest major city and citizens of Tawang depend on it for any medical emergency.Other new broad guage railway lines which will be part of the survey will be 249-kilometre North Lakhimpur-Bame -Silapathar which is between Pasighat airport and Rupa in Arunachal Pradesh.Sinha and Rijiju will also be meeting citizens, elected representatives and senior railway officers during the visit.Tawang is of immense strategic importance to India as it is located on the China-India border and China has been laying claim to it.China claims Arunachal Pradesh as part of Tibet and routinely objects to any visit by top Indian leaders, officials and diplomats to the area.It had recently objected to a proposed visit of the Dalai Lama to Arunachal Pradesh.The government has said the Dalai Lama is going to visit the state as a religious leader and there is no reason to stop him as his followers are demanding he should come.Tawang was one of the regions where Indian Army had come under attack from China in the 1962 war.Ignoring China's protests, the government had earlier allowed then US ambassador to India Richard Verma and Tibetan spiritual leader Karmapa Ogyen Trinley Dorje's visit to Arunachal Pradesh last year.
  
Yesterday (20:12)  Amreli people will benefit from in a week Mahuva to Surat train (m.divyabhaskar.co.in)
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WR/Western  -  

News Entry# 298137     
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Mar 30 2017 (20:12)
Station Tag: Mahuva Junction/MHV added by riz339~/890392

Mar 30 2017 (20:12)
Station Tag: Mahuva Junction/MHV added by riz339~/890392

Posted by: riz339~  121 news posts
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અમરેલીના લોકોને એક સપ્તાહમાં જ મહુવા-સુરત ટ્રેનનો લાભ મળશે
Mar 29,2017 11:37 PM IST
અમરેલીના લોકોને એક સપ્તાહમાં જ મહુવા-સુરત ટ્રેનનો લાભ મળશે
(એક અઠવાડીયામાં ટ્રેન દોડાવવા મંજુરી આપવાની બાંહેધરી )

અમરેલી: અમરેલી જિલ્લા અને તેને સંલગ્ન રેલવે લાઇનો બ્રોડગેઇજમા પરિવર્તિત કરવા માટે સરકાર દ્વારા રૂ.2400 કરોડ જેવી માતબર રકમ કેન્દ્રની ભાજપ સરકાર તરફથી મંજુર કરાવ્યા બાદ સાંસદ નારણભાઇ કાછડીયા સહિત રાજયના 12 સાંસદોએ રેલમંત્રીને રજુઆત કરી છે જેને પગલે એક સપ્તાહમા જ મહુવા સુરત ટ્રેનનો લાભ મળતો થઇ જશે.

મહુવા સુરત એકસપ્રેસ ટ્રેન કે જે અઠવાડીયામા ફકત એક જ દિવસ ચાલે છે

અમરેલી જિલ્લાના લોકોની વર્ષો જુની માંગણી સંતોષવા મહુવા સુરત ટ્રેનને દૈનિક ચલાવી મુંબઇ સુધી લંબાવવા બાબતે લોકસભા ગૃહમા તથા રેલવે મંત્રીને અનેકવાર રૂબરૂ મળી રજુઆતો કરવામા આવી હતી અને ફરી પુન: રાજયના સાંસદો સાથે મળી મહુવા સુરત એકસપ્રેસ ટ્રેન કે જે અઠવાડીયામા ફકત એક જ દિવસ ચાલે છે તેને દૈનિક ચલાવવા રજુઆત કરવામા આવી હતી.

સુરેશ પ્રભુએ મહુવા સુરત ટ્રેનને મંજુરી આપવામા આવશે તેવી બાહેધરી આપી હતી

રેલવે મંત્રી સુરેશ પ્રભુએ મંત્રાલય દ્વારા એક જ અઠવાડીયામા કાર્યવાહી પુર્ણ કરી મહુવા સુરત ટ્રેનને મંજુરી આપવામા આવશે તેવી બાહેધરી આપી હતી. ટ્રેન શરૂ થતા અમરેલી ઉપરાંત ભાવનગર, સુરેન્દ્રનગર, અમદાવાદ, ખેડા, આણંદ, વડોદરા, ભરૂચ, નવસારી, વલસાડ અને વાપી જિલ્લાના લોકોને રાહત થશે.
  
स्पेशल ट्रेन संचालन, मदार सेटेलाइट रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का शुभारंभ
bhaskar news | Mar 30,2017 06:51 IST
अजमेर. अजमेर का मदार रेलवे स्टेशन अब सेटेलाइट रेलवे स्टेशन के रूप में लगभग तैयार है। संसदीय सचिव सुरेश सिंह रावत, डीआरएम पुनीत चावला, पुष्कर नगर पालिका चेयरमैन कमल पाठक और दरगाह नाजिम ले. कर्नल मंसूर अली खान ने यात्री सुविधाओं के विस्तार का शुभारंभ किया। कुछ ही समय बाद यहां से कई ट्रेनों का संचालन होगा। इसी रूपरेखा को साकार करने के लिए ख्वाजा साहब के 805वें उर्स से ही यहां से स्पेशल
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ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म शेल्टर, एफओबी शेल्टर, विंडो लाइटिंग, कॉमन वेटिंग हॉल, पीआरएस, डिजिटल सर्विस सेंटर, वाटर वेंडिंग मशीन सहित अन्य कई यात्री सुविधाओं के विस्तार के शुभारंभ किया।

प्लेटफार्म पर मिलेगा फ्री वाई-फाई
अजमेर रेल मंडल ने सेटेलाइट रेलवे स्टेशन पर मदार के सीमित क्षेत्र में वाई-फाई की सुविधा भी उर्स यात्रियों को दी है। प्लेटफार्म पर खड़े होने वाले रेल यात्रियों को अपने मोबाइल में वाई-फाई से रेल टेल में जाकर कनेक्ट होना पड़ेगा। इसके बाद मैसेज के जरिए एक वन टाइम पासवर्ड मिलेगा, जिसे डाले जाने के बाद वाई-फाई कनेक्ट हो जाएगा।

यात्रियों के लिए डिजिटल सेंटर भी
मदार रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए डिजिटल सेंटर भी बनाया गया है। सेंटर में यात्री जाकर कंप्यूटर पर नेट का उपयोग कर अपने विभिन्न कार्य कर सकेंगे। यहां पर अजमेर रेल मंडल यात्रियों को नो प्रोफिट-नो लॉस में नेट सेवा उपलब्ध रहेगी।

पहली स्पेशल ट्रेन हुई लेट
ख्वाजा साहब के उर्स एवं मदार रेलवे स्टेशन पर आने वाली पहली उर्स स्पेशल ट्रेन बरौनी-अजमेर करीब 7 घंटे लेट हो गई है। उक्त ट्रेन को मदार रेलवे स्टेशन पर बुधवार शाम 5.10 पर पहुंचना था, यह ट्रेन करीब 7 घंटे देरी से अजमेर पहुंची।

उर्स में चलेंगी 38 स्पेशल ट्रेन
27अजमेर रेलवे स्टेशन
07 मदार रेलवे स्टेशन
04 दौराई रेलवे स्टेशन
  
Yesterday (20:07)  കൊല്ലം - ചെങ്കോട്ട പാത: ഗേജ് മാറ്റം പൂർത്തിയായ റൂട്ടിൽ വെള്ളിയാഴ്ച മുതൽ സർവീസ് (m.manoramaonline.com)
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New/Special TrainsSR/Southern  -  

News Entry# 298135     
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Mar 30 2017 (20:07)
Station Tag: Sengottai/SCT added by imaravIndian^/436575

Mar 30 2017 (20:07)
Station Tag: Kollam Junction (Quilon)/QLN added by imaravIndian^/436575

Mar 30 2017 (20:07)
Station Tag: Aryankavu/AYV added by imaravIndian^/436575

Mar 30 2017 (20:07)
Station Tag: Bhagavathipuram/BJM added by imaravIndian^/436575

Mar 30 2017 (20:07)
Station Tag: New Aryankavu/AYVN added by imaravIndian^/436575

Mar 30 2017 (20:07)
Station Tag: Edamann/EDN added by imaravIndian^/436575

Mar 30 2017 (20:07)
Station Tag: Punalur/PUU added by imaravIndian^/436575

Mar 30 2017 (20:07)
Train Tag: Sengottai-Tirunelveli Passenger/56798 added by imaravIndian^/436575

Mar 30 2017 (20:07)
Train Tag: Tirunelveli - Sengottai Passenger/56797 added by imaravIndian^/436575

Mar 30 2017 (20:07)
Train Tag: Kollam Punalur Passenger/56336 added by imaravIndian^/436575

Mar 30 2017 (20:07)
Train Tag: Punalur Kollam Passenger/56335 added by imaravIndian^/436575

Mar 30 2017 (20:07)
Train Tag: Punalur Kollam Passenger/56333 added by imaravIndian^/436575

Mar 30 2017 (20:07)
Train Tag: Kollam Punalur Passenger/56334 added by imaravIndian^/436575

Mar 30 2017 (20:07)
Train Tag: Punalur- Guruvayur Fast Passenger/56366 added by imaravIndian^/436575

Mar 30 2017 (20:07)
Train Tag: Guruvayur- Punalur Fast Passenger/56365 added by imaravIndian^/436575

Posted by: imaravIndian^  117 news posts
കൊച്ചി∙ കൊല്ലം - ചെങ്കോട്ട പാതയിൽ ഗേജ് മാറ്റം പൂർത്തിയായ പുനലൂർ - ഇടമൺ റൂട്ടിലും ചെങ്കോട്ട - ഭഗവതിപുരം സെക്‌ഷനിലും വെള്ളിയാഴ്ച പാസഞ്ചർ ട്രെയിനുകളുടെ സർവീസ് ആരംഭിക്കും. മൂന്നു ജോഡി പാസഞ്ചറുകളാണു പുനലൂരിൽനിന്നു ഇടമണ്ണിലേക്കു നീട്ടുന്നത്. ഗുരുവായൂർ - പുനലൂർ പാസഞ്ചറും ഇടമൺ വരെ സർവീസ് നടത്തും. അതേസമയം, ചെങ്കോട്ടയിൽനിന്നു ഭഗവതിപുരത്തേക്കു മാത്രമാണു പുതിയ സർവീസുള്ളത്. ന്യൂ ആര്യങ്കാവ് സർവീസ് പിന്നീടുണ്ടാകുമെന്നാണു സൂചന.
രാവിലെ 9.25നുള്ള തിരുനെൽവേലി ചെങ്കോട്ട പാസഞ്ചർ ഉച്ചയ്ക്കു ഒന്നിനു ഭഗവതിപുരത്തെത്തി 1.30നു മടങ്ങും. ഇടമൺ - പുനലൂർ, ന്യൂ ആര്യൻകാവ് - ഭഗവതിപുരം സെക്‌ഷനുകളിൽ 30 കിലോമീറ്ററാണു വേഗപരിധി. ഭഗവതിപുരം ചെങ്കോട്ട 60 കിലോമീറ്ററും. മീറ്റർ ഗേജ് കാലത്തെ അതേ വേഗതയാണു ബ്രോഡ്ഗേജ് പാതയിലും. പുതിയതായി, ട്രെയിനുകളുടെ പിന്നിൽനിന്നു തള്ളാൻ പുനലൂർ - ഇടമൺ സെക്‌ഷനിൽ ബങ്കർ ലോക്കോയും ഉപയോഗിക്കും. മീറ്റർ ഗേജ് കാലത്ത് ഇതുണ്ടായിരുന്നില്ല.
19-ാം
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നൂറ്റാണ്ടിൽ ബ്രിട്ടീഷ് എൻജീനയർമാർ നിർമിച്ച പാത ബ്രോഡ്ഗേജാക്കിയിട്ടും യാത്രാ സമയം ലാഭിക്കാനോ പാതയിലെ വേഗത വർധിപ്പിക്കാനോ ഇന്ത്യൻ റെയിൽവേയ്ക്കു കഴിഞ്ഞിട്ടില്ലെന്നതാണു ഖേദകരമായ വസ്തുത. പുനലൂർ ഇടമൺ പാതയിലെ ആദ്യ പാസഞ്ചർ സർവീസ് വെള്ളിയാഴ്ച രാവിലെ 8.40ന് കൊല്ലത്തുനിന്നു പുറപ്പെട്ട് 10.30ന് ഇടമണ്ണെത്തും. ഇടമണ്ണിൽനിന്നു 11.00നു പുറപ്പെട്ടു 12.50നു കൊല്ലത്ത് എത്തും.
  
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इंदौर-दिल्ली एक्स. पहले समर स्पेशल के रूप में चलेगी फिर नियमित होगी
Bhaskar News Network | Mar 30,2017 05:05 IST
क्यू ट्रैक से होकर जल्द ही इंदौर-दिल्ली-इंदौर वाया फतेहाबाद, रतलाम-अजमेर एक्सप्रेस चलना शुरू हो जाएगी। यह अभी प्रायोगिक तौर पर ग्रीष्मकालीन स्पेशल के रूप में चलाया जाएगा। ट्रेन को यात्रियों की अच्छी संख्या मिली तो साल खत्म होने से पहले इसे नियमित कर दिया जाएगा। मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को प्रारंभिक रूप से रेलवे बोर्ड ने स्वीकृत कर दिया है।
मंगलवार को रतलाम-धौंसवास क्यू ट्रैक शुरू होने के बाद इंदौर को सीधे अजमेर, जयपुर से मिली कनेक्टिविटी को लेकर रेल मंडल ने ट्रेन चलाने के लिए तीन चरण वाली योजना पर फिर से काम शुरू कर दिया है। बुधवार को अवकाश होने के बावजूद डीआरएम मनाेज शर्मा और सीनियर डीओएम पवनकुमार सिंह ने कार्यालय पहुंचकर आगामी दिनों में क्यू ट्रैक से होकर चलाई जाने वाली ट्रेनों की प्लानिंग का रिवीजन किया। अधिकारियों की मानें तो ग्रीष्मकालीन इंदौर-दिल्ली-इंदौर एक्सप्रेस का शेड्यूल जल्द ही जारी हो जाएगा।
भीलवाड़ा-महू के बीच डेमू ट्रेन भी चलाएंगे
फटाफट फेरे लगाने वाली डेमू ट्रेन को रेल मंडल महू-भीलवाड़ा के बीच भी चलाने की तैयारी कर रहा है। अभी इंदौर-महू के बीच 7, रतलाम इंदौर के बीच 4, रतलाम नीमच के बीच दो, जबकि रतलाम-भीलवाड़ा के बीच एक डेमू ट्रेन चल रही है। इन सभी डेमू के शेड्यूल को बदलने बिना रेलवे महू से सीधे भीलवाड़ा के बीच डेमू ट्रेन चलाएगा। टाइमिंग ऐसी रखी जाएगी, जिससे इंदौर-महू, रतलाम-इंदौर, रतलाम-नीमच वाले यात्रियों को भी इसका कनेक्शन मिल सकेगा।
उज्जैन में नहीं जुड़ेंगे 7 डिब्बे
इंदौर-दिल्ली एक्सप्रेस के नियमित चालू होने के बाद रेलवे इंदौर-जयपुर (59307/59306) बंद कर देगा। अभी 59307 ट्रेन के सात कोच उज्जैन से जयपुर-भोपाल-जयपुर में जुड़ते हैं, और लौटने में उज्जैन से ही कटकर इंदौर तक जाते हैं। इसे ही इंदौर से फतेहाबाद होकर चलाया जाएगा।
  
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यात्री और रेलवे रोज झेल रहे दिक्कत, 20 साल बाद भी शिफ्ट नहीं कर पाए गुड्स शेड
Bhaskar News Network | Mar 30,2017 05:05 IST
मालगाड़ियों को पीछे लेकर माल गोदाम वाले प्लेटफॉर्म पर लगाने की झंझट, प्लेटफॉर्म 4 पर यात्री ट्रेनों को रोकने या फिर प्लेटफॉर्म बदलकर चलाने की रोज की दिक्कत आने के बावजूद रेलवे गुड्स शेड को अब तक शिफ्ट नहीं कर पाया है। 20 वर्षों से इसे धौंसवास या ट्रांस शिपमेंट यार्ड में ले जाने की कवायद चल रही है। रेलवे ने योजना का खाका भी खींच रखा है। इसके आधार पर 2005-06 में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी सर्वे भी कर गए थे। इतना ही नहीं प्रोजेक्ट को अगस्त 2015 में रतलाम आए रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने सैद्धांतिक मंजूरी भी दे दी थी। बावजूद अधिकारी अब तक ठोस कदम नहीं उठा पाए।
चौंकाने वाली बात यह कि बीजी गुड्स शेड के स्थानांतरण की इन तमाम कवायदों को नजर अंदाज करते हुए रेलवे ने बुधवार से गुड्स शेड में सीमेंट कांक्रीट का काम शुरू कर दिया है। इस पर लगभग 52 लाख रुपए खर्च होंगे। विधायक चेतन्य काश्यप, पूर्व महापौर पारस सकलेचा से लेकर कई जनप्रतिनिधि राज्य, केंद्र सरकार और रेल मंत्री को पत्र लिख चुके हैं, जिस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जानकारों की माने तो गुड्स शेड के सीसी पर रेलवे जो रुपया खर्च कर रही है, वह एक तरह से रुपए की बर्बादी ही है।
7.एफओबी की लैंडिंग के आसपास बड़ी संख्या में ट्रक खड़े रहते हैं, अवांच्छित तत्व भी सक्रिय हैं। पहले घटनाएं हो चुकी हैं, अभी भी सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।
5.एक समान प्लेटफॉर्म नहीं होने से बीच-बीच में ऑफिस, टॉयलेट व अन्य भवन बने होने से माल की अनलोडिंग टुकड़ों में की जाती है।
6.प्लेटफॉर्म 5, 6, व 7 को जोड़कर बनाए नए एफओबी की लैंडिंग भी गुड्स शेड में हो रही है, जहां बिजली, पानी की कोई व्यवस्था नहीं है।
गुड्स शेड स्थानांतरण से स्टेशन को ये फायदा
प्लेटफॉर्म 4 का विस्तार हो सकेगा। गुड्स से प्लेटफॉर्म 4 पर एंट्री हो सकेगी, जिससे मुख्य गेट का दबाव कम होगा।
नए एफओबी के आसपास पर्याप्त जगह, जहां नया सर्कुलेटिंग एरिया व्यवस्थित रूप से विकसित किया जा सकता है।
स्टेशन परिसर व आसपास भारी वाहनों का दबाव कम होगा।
सीमेंट, खाद व अन्य खाद्यान्न की अनलोडिंग के दौरान होने वाली गंदगी व बदबू से मुक्ति मिलेगी।
नया माल गोदाम व्यवस्थित और अधिक क्षमता का बनेगा, जिससे समय कम लगेगा और रेलवे का राजस्व बढ़ेगा।
वर्तमान गुड्स शेड की अतिरिक्त भूमि का रेलवे व्यावसायिक उपयोग भी कर सकेगा।
अधिकारियों की लापरवाही
सीधे तौर पर रेलवे अधिकारियों की लापरवाही है। दूसरे शहरों में कहीं भी स्टेशन के इतनी पास गुड्स शेड नहीं है। कई बार पत्र लिखे, किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। रेल राज्यमंत्री से बात की है, उन्होंने मिलने बुलाया है। प्रदीप उपाध्याय, जिला महामंत्री-भाजपा
निर्देश पर करेंगे कार्रवाई
गुड्स शेड को दूसरी जगह शिफ्ट करने की योजना है। रेलवे नियमानुसार जो भी कार्रवाई है, कर रहा है। मुख्यालय से जैसे निर्देश मिलेंगे, गुड्स शेड को शिफ्ट करने की कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान गुड्स शेड को सुधारने के लिए सीसी कार्य कर रहे हैं। जेके जयंत, पीआरओ, रेल मंडल
रेल मंत्री को स्थिति बताएंगे
जब रेलवे की गुड्स शेड को स्थानांतरित करने की योजना है तो फिर सीसी के नाम पर रुपए खर्च करने की क्या जरूरत है। इसे शिफ्ट कर प्लेटफॉर्मों का विकास करना चाहिए। रेलमंत्री से व्यक्तिगत मिलकर सारी स्थिति बताएंगे। पारस सकलेचा, पूर्व महापौर
1. मालगाड़ी को प्लेटफॉर्म 4 पर लेकर शंटिंग के माध्यम से बैक करके गुड्स शेड तक लाना पड़ता है।
2.वर्तमान गुड्स शेड के प्लेटफॉर्म की लंबाई कम है। इससे 10-10 डिब्बों को टुकड़ो में गुड्स शेड की दो लाइन पर खड़ा करना पड़ता है।
3.इस प्रक्रिया में बार-बार शंटिंग करना पड़ती है, जिससे समय के साथ ऑपरेटिंग कास्ट भी बढ़ती है।
4.मालगाड़ी की शंटिंग होने से कई बार प्लेटफॉर्म 4 पर खड़ी यात्री गाड़ी को समय से ज्यादा रोककर दूसरे प्लेटफॉर्मों से गुजारा जाता है।
  
राष्ट्रीय रेल संग्रहालय में वाईफाई सेवा का उद्घाटन भी किया


केन्द्रीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने “इंडियन रेलवे- द वैविंग ऑफ ए नेशनल टैपेस्ट्री” नाम पुस्तक का विमोचन किया। इस पुस्तक को संयुक्त रूप से श्री बिबेक देबरॉय (सदस्य, नीति आयोग), श्री संजय चड्ढा (संयुक्त सचिव, वाणिज्य मंत्रालय)
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और सुश्री विद्याकृष्णमूर्ति ने लिखा है।

इसके अतिरिक्त, रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने राष्ट्रीय रेल संग्रहालय में आने वाले आगंतुकों के लिए हाई-स्पीड निःशुल्क वाईफाई की सुविधा का शुभारंभ भी किया। इस अवसर पर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष श्री ए.के. मित्तल, पुस्तक के तीनों लेखक, एयर इंडिया के मुख्य प्रबंध निदेशक श्री अश्वनी लोहानी और रेलवे बोर्ड के अन्य सदस्यों सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

इस अवसर पर रेल मंत्री ने कहा कि श्री बिबेक देबरॉय एवं उनके साथियों द्वारा लिखी पुस्तक का विमोचन करना मेरे लिए वास्तव में एक सम्मान है। श्री बिबेक देबरॉय द्वारा लिखित यह पुस्तक भारतीय रेलवे के लिए बड़ा योगदान है। हम इस पुस्तक के जरिए इतिहास को जोड़कर भारतीय रेलवे के बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। किसी भी संगठन की रुचि को अनदेखा नहीं किया जा सकता। हम संगठन को फिर से पुनर्जीवित करने और उसमें ऊर्जा का संचार करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। हम रेलवे को एक दक्ष, अत्याधुनिक एवं तकनीक आधारित संगठन बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। ऐसे में हमें, एक ही समय पर कई कदम एकसाथ उठाने की ज़रूरत है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, मानव संसाधन, पर्यावरण, वित्त, तकनीक उन्नयन आदि तमाम मुद्दों पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। इतिहास से सीखना और भविष्य का निर्माण करना ही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। यह पुस्तक महत्वपूर्ण दिशा में भारतीय रेलवे की तमाम यादों को जोड़ने का काम करेगी। राष्ट्रीय रेल संग्रहालय में उपलब्ध कराई गई तीव्र गति आधारित निःशुल्क वाईफाई सुविधा की चर्चा करते हुए श्री सुरेश प्रभु ने कहा कि यह सुविधा इस रेल संग्रहालय में आगंतुकों की संख्या को बढ़ाने में मदद करेगी।

इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य श्री बिबेक देबरॉय ने कहा कि इस पुस्तक में वर्ष 1830 से 1947 तक की तमाम बाते हैं। यह पुस्तक कहानी शैली में लिखी गई है। यह पुस्तक भारतीय रेलवे के इतिहास की छोटी-छोटी घटनाओं का विस्तार से वर्णन करती है। इस पुस्तक के आवरण पृष्ठ पर भाप वाला लोको इंजन है, जिसे राजपुताना मालवा क्षेत्र में मीटर गेज के लिए इस्तेमाल किया गया था। पाठक इस पुस्तक को पढ़ने से खुशी की अनुभूति कर सकते हैं। इस पुस्तक में भारतीय रेलवे के कुछ छिपे हुए पहलुओं को भी क्रमानुसार बताया गया है। ये वे पहलु हैं जिनके बारे में अब तक आम जनता को जानकारी नहीं थी।

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष श्री ए.के. मित्तल ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय रेलवे के इतिहास पर आधारित यह पुस्तक भारतीय रेलवे के बारे में अब तक अज्ञात रहे तथ्यों पर विस्तार से प्रकाश डालने में मदद करेगी।

पृष्ठभूमि
किताब के बारे मेः
इस पुस्तक की मुख्य विषयवस्तु भारत में रेलवे का ऐतिहासिक विकास है। रेलवे के ऐतिहासिक विकास को विभिन्न अध्यायों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है, जिसमें विकास के विभिन्न कालों को क्रमानुसार बताया गया है। 1853 से पूर्व में शुरू हुई पहली वाणिज्यिक यात्री रेल का जिक्र भी इस पुस्तक में है और यही इस पुस्तक की नींव भी है।

कहानी शैली में लिखी गई इस पुस्तक में सबसे पहले 1830 में भारतीय उप-महाद्वीप में रेलवे के निर्माण को लेकर बनाई गई शुरुआती योजना के बारे में बताया गया है। इसके बाद वर्ष 1940 एवं उसके आसपास इस विषय पर व्यापक स्तर पर हुई विभिन्न चर्चाओं के साथ-साथ 1850 एवं 1860 में भारत में रेलवे के आगमन तक की पूरी कहानी को रोचक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक के अंतिम अध्याय में 20वीं सदी के शुभारंभ से लेकर स्वतंत्रता मिलने तक के कालक्रम को शामिल किया गया है। इस पुस्तक में भारतीय रेलवे इतिहास को बेहतर तरीके से चित्रित किया गया है। यह पुस्तक वास्तव में रेलवे के इतिहास पर लिखी गई अत्यंत प्रासंगिक पुस्तक है।

राष्ट्रीय रेल संग्रहालय में निःशुल्क वाईफाई सेवा के बारे में

राष्ट्रीय रेल संग्रहालय 30 मार्च 2017 को पूरी तरह से तीव्र गति आधारित निःशुल्क वाईफाई क्षेत्र में तब्दील हो गया। केन्द्रीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने निःशुल्क वाईफाई की सुविधा आज राष्ट्रीय रेल संग्रहालय मे आने वाले आगंतुकों को समर्पित की। यह सुविधा रेल संग्रहालय में आने वाले हज़ारों आगंतुकों को तीव्र गति आधारित वाईफाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रेलटेल द्वारा गूगल के सहयोग से शुरू की गई है।

रेलटेल, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के पांच अन्य पर्यटक स्थलों (लाल किला, हुमायुं का मकबरा, सफदरजंग मकबरा, कुतुब मीनार और राजपथ लॉन) पर निशुल्क वाईफाई की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है। इन सभी पर्यटक स्थलों की देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा की जाती है। रेलटेल निगम भारतीय रेलवे के अंतर्गत कार्यरत स्वायत्त संस्था है, जिसे मिनी रत्न संस्थान का दर्जा प्राप्त है।




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वीके/प्रवीन – 872
(Release ID 60212)
  
Yesterday (19:50)  Shri Suresh Prabhakar Prabhu releases Book Titled “Indian Railway- The weaving of a National Tapestry” (pib.nic.in)
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Commentary/Human Interest

News Entry# 298131     
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Posted by: rdb*^  127318 news posts
Also inaugurates WiFi Services at National Rail Museum
Minister of Railways Shri Suresh Prabhakar Prabhu released the book titled “Indian Railway- The weaving of a National Tapestry” jointly authored by Shri Bibek Debroy (Member, NITI Aayog) Shri Sanjay Chadha (Joint Secretary, Ministry of Commerce) & Ms. Vidya Krishnamurthi.

In addition, Minister of Railways Shri Suresh Prabhakar Prabhu also launched Hi-speed free
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Wi-Fi services for the visitors at National Rail Museum. Chairman,
Railway Board, Shri A. K. Mital, the three authors of the book, Shri Ashwani Lohani, CMD, Air India and other Railway Board Members and senior officials were also present on the occasion.

Minister of Railways said that It is really an honour to release a book by authored by Shri Bibek Debroy and his colleagues. This book by Shri Bibek Debroy is a great contribution for Indian Railways. We can shape the future of Indian Railways by linking the past through this book. Interest of organisation cannot be overlooked..We are working on how to revitalize the organisation. We are working for making Railways as an efficient organisation, modern and tech savvy. We need to take many steps at the same time. All issues ranging from HR, Environment, finance, technological up gradation are to be taken care of. Learning from the past and shaping the future should be our priority. This book would add lot of memories of Indian Railways. Referring to the WiFi services made available at National Rail Museum, Shri Suresh Prabhu said that this will attract more visitors to the Museum

Shri Bibek Debroy, Member NITI Aayog said that This book traverses the timeline from 1830-1947. The book is written in a storytelling manner. The book narrates some anecdotes of Indian Railways History. The cover of the book has a steam loco which used to haul meter gauge loco in Rajputana Malwa region. Readers can expect mirth reading this book. In the book some uncovered nuggets were chronicled which were not known to Public.”

Chairman Railway Board Shri A K Mittal said that This Book on History of Indian Railways will be able to throw light on many hitherto unknown facts about Indian Railways.

Backgrounder:
About the Book:
The theme of this book is the historical development of railways in India, organized into chapters dealing with different periods of development in chronological order. It builds its foundations from periods prior to 1853, when the first commercial passenger Railway was inaugurated. like the Red Hill Railways in the south, which were primarily captive freight systems

The authors wanted to create a cross between an academic book (well written, but “dry and boring”) and a coffee table book (“light in text”). The outcome is a narrative built around a series of anecdotes of railway history, which manages to convey considerable amounts of information in a light, conversational manner. True to its mandate it does not bring this obsession to esoterica.

The story begins with the early plans for building railways in the Indian sub-continent in the 1830s, continues with the debates in the 1840s and the advent of the railways in the 1850s and 1860s. The penultimate chapter, which covers the period of consolidation and change during the 1870s onwards, is the most absorbing. The last chapter covers the period from the beginning of 20th century until Independence. The book is perhaps best characterised as Indian Railway History – An anecdotal version.

While some information is quite well documented elsewhere, but the last chapter which commences from the beginning of the twentieth century onwards provides valuable nuggets of information on diverse topics, including early movies with railway themes, stories behind the well-known railway booksellers A.H.Wheeler and Higginbotham’s; and the history of railway police forces.

True to its reader-friendly style the book is light reading and a valuable collection to the most well documented organisation, perhaps in the World – which is our Indian Railways

About WiFi Services in National Rail Museum:
The National Rail Museum, New Delhi, became a high speed RailWire Wi-fi zone today, 30th March 2017, when Minister of Railways, Shri Suresh Prabhakar Prabhu dedicated the facility to the visitors of this heritage site. The Wi-Fi facility has been commissioned by RailTel in association with Google for providing high speed state of the art world class internet experience to the hundreds of people visiting the National Rail Museum every day.

The service built over the fiber network of RailTel is designed to offer high-speed broadband like experience to users. Along with experiencing the rich history of Indian Railways, the visitors of this museum will now be able to stay connected to high speed internet and easily stream a high definition video, download a book or a new game. A total number of 23 access points, 11 access switches and 1 Fiber switch have been used to create the state-of-the art Wi Fi facility at the National Rail Museum.

RailTel is also in process of providing fast Wi-Fi at 5 more tourists sites of Delhi namely Red Fort, Humayun Tomb, Safdarjung Tomb, QutubMinar and Rajpath Lawns being maintained by Archaeological Survey of India. Wi-Fi services to visitors are being provided under ‘Railwire’,the retail Broadband distribution model of RailTel. Designed to offer users the best Internet experience, Railwire Wi-Fi will be available to any user who has a working mobile connection on a smartphone.

In year 2016, RailTel commissioned Railwire Fast Wi-Fi services at 110 railway stations with 115 stations enabled till date. The services are being used by over 6 million (60 lakh) users monthly. Extending the project we are in process of providing this service at another 200 stations during the current year.

In parallel to providing Wi-Fi at urban areas,RailTel is also expanding Railwire Wi-Fi services at 200 rural railway stations across the country. These stations shall also be provided with a Digital Service Centre to provide various E-gov services, Digital literacy & various online services for the rural population.

RailTel Corporation a "Mini Ratna (Category-I)" PSU under Ministry of Railways is one of the largest neutral telecom services providers in the country owning a Pan-India optic fiber network covering all important towns & cities of the country and several rural areas covering 70% of India’s population. RailTel is in the forefront in providing nationwide Broadband Telecom & Multimedia Network in all parts of the country in addition to modernization of Train operations and administration network systems for Indian Railways. With its Pan India high capacity network, RailTel is working towards creating a knowledge society at various fronts and has been selected for implementation of various mission-mode Govt. of India projects in the telecom field.



AKS/MKV/AK


(Release ID :160213)
  
Yesterday (19:48)  Derailment of Jabalpur - Hazrat Nizamuddin Mahakaushal Express near Mahoba in Uttar Pradesh (pib.nic.in)
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Major Accidents/DisruptionsNCR/North Central  -  

News Entry# 298130     
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Posted by: rdb*^  127318 news posts
In Uttar Pradesh, an incident of derailment of Train No.12189 Jabalpur – Hazrat Nizamuddin Mahakaushal Express took place between Mahoba and Kulpahar Stations on Manikpur – Jhansi Section of Jhansi Division over North Central Railway at 2:27 hrs. on 30.03.2017. Eight rearmost Coaches of the Train derailed.(Four- AC Coaches, Two- Ordinary Second Class General Coach, One- Sleeper Class, One - Passenger cum Luggage cum Guard (SLR) Coach.
Immediately, local ambulances were called and few injured were given first aid and some injured passengers were rushed to District Hospital, Mahoba.
As per
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available information, there is no fatality and 13 passengers were injured out of which One person sustained fracture and Twelve received simple injury.
Standard passengers of affected coaches were cleared by 4 buses specially arranged from accident site towards Jhansi and also by the front portion of the affected train which departed from accident site at 6.48 hrs along with 10 coaches towards Jhansi.
Accident Relief Medical Van (ARMV) reached the site along with doctor, paramedical staff & officers. General Manager, North Central Railway and Divisional Rail Manager, Jhansi alongwith senior officers rushed for site immediately and supervised relief and rescue operations.
Helpline Numbers were set up at 17 stations including Nizamuddin, Agra, Gwalior, Jhansi, Orai and Banda, Jabalpur stations to provide assistance to the Public.
Adequate free catering arrangements (food packets, biscuits, Subzi Poori, Water Bottle, Tea, Milk, etc) were made at the site and at Jhansi station for passengers. A few trains have been cancelled and diverted. War footing Efforts have been made to restore the traffic on this section at the earliest.
Ministry of Railways has announced an enhanced ex-gratia of Rs. 50000 for grievously injured and Rs. 25000 for simply injured passengers.
Inquiry by a 5 member Senior Administrative Grade (SAG) level officers of North Central Railway has been ordered to find out the cause of the accident.
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AKS/MKV/AK
(Release ID :160259)
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