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Sun Jun 25, 2017 12:30:23 IST
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AIT/Ait Junction (2 PFs)
ایٹ جنکشن     एट जंक्शन

Track: Construction - Electric-Line Doubling

Type of Station: Junction
Number of Platforms: 2
Number of Halting Trains: 15
Number of Originating Trains: 5
Number of Terminating Trains: 5
JN POINT- JHS/CNB/KONCH, Ait, Orai (05162-252206)
State: Uttar Pradesh
Elevation: 156 m above sea level
Zone: NCR/North Central
Division: Jhansi
No Recent News for AIT/Ait Junction
Nearby Stations in the News

Rating: /5 (0 votes)
cleanliness - n/a (0)
porters/escalators - n/a (0)
food - n/a (0)
transportation - n/a (0)
lodging - n/a (0)
railfanning - n/a (0)
sightseeing - n/a (0)
safety - n/a (0)

Nearby Stations

PRN/Parauna 11 km     BHUA/Bhua 13 km     KNH/Konch 13 km     ERC/Erach Road 22 km     ORAI/Orai 25 km     MOTH/Moth 34 km     ATA/Ata 40 km    

Station News

Page#    Showing 1 to 3 of 3 News Items  
Feb 27 2016 (02:37)  रास्ते में हाथ देने पर ये ट्रेन - ऑटो की तरह रुक जाती है और सवारी बैठाकर आगे बढ़ती है (www.bhaskar.com)
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Commentary/Human InterestNCR/North Central  -  

News Entry# 259313   Blog Entry# 1750970     
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Feb 27 2016 (2:37AM)
Station Tag: Konch/KNH added by Vaibhav Agarwal*^/432532

Feb 27 2016 (2:37AM)
Station Tag: Ait Junction/AIT added by Vaibhav Agarwal*^/432532

Feb 27 2016 (2:37AM)
Train Tag: Konch Ait Passenger/51870 added by Vaibhav Agarwal*^/432532

Feb 27 2016 (2:37AM)
Train Tag: Ait Konch Passenger/51869 added by Vaibhav Agarwal*^/432532

Feb 27 2016 (2:37AM)
Train Tag: Konch Ait Passenger/51868 added by Vaibhav Agarwal*^/432532

Feb 27 2016 (2:37AM)
Train Tag: Ait Konch Passenger/51867 added by Vaibhav Agarwal*^/432532

Feb 27 2016 (2:37AM)
Train Tag: Konch Ait Passenger/51866 added by Vaibhav Agarwal*^/432532

Feb 27 2016 (2:37AM)
Train Tag: Ait Konch Passenger/51865 added by Vaibhav Agarwal*^/432532

Feb 27 2016 (2:37AM)
Train Tag: Konch Ait Passenger/51864 added by Vaibhav Agarwal*^/432532

Feb 27 2016 (2:37AM)
Train Tag: Ait Konch Passenger/51863 added by Vaibhav Agarwal*^/432532

Feb 27 2016 (2:37AM)
Train Tag: Konch Ait Passenger/51862 added by Vaibhav Agarwal*^/432532

Feb 27 2016 (2:37AM)
Train Tag: Ait Konch Passenger/51861 added by Vaibhav Agarwal*^/432532

Posted by: Vaibhav Agarwal*^  1403 news posts
झांसी. बुंदेलखंड के जालौन में कोंच-एट कस्बे के बीच एक ऐसी ट्रेन चलती है, जि‍से यात्री ऑटो कहते हैं। रास्ते में हाथ देने पर ये किसी ऑटो या बस की तरह रुक जाती है और सवारी बैठाकर आगे बढ़ती है। गौर करने वाली बात ये है कि इस ट्रेन से गार्ड तक की सैलरी नहीं निकल पाती, फिर भी यह रोजाना सवारी ढोती है।
क्या है ट्रेन की खासियत
- 118 साल से दो कस्बों के बीच चल रही यह ट्रेन अद्दा नाम से मशहूर है।
-
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35 मिनट में 13 किलोमीटर का सफर तय करती है।
- ट्रेन में सिर्फ 3 डिब्बे हैं।
- 5 रुपए है किराया।
- करीब 500 लोग एक बार में सफर करते हैं।
ट्रेन बंद करने की हो चुकी है कोशिश
- कोंच स्टेशन मास्टर अरुण पटेल कहते हैं, एट से कोंच तक सिर्फ यही एक ट्रेन चलती है।
- दोनों कस्बों के बीच ट्रेन 5 चक्कर लगाती है।
- ट्रेन के संचालन से स्टेशन मास्टर से लेकर गार्ड तक की तनख्वाह नहीं निकलती।
- इस कारण इसे बंद करने की कई बार कोशिश हो चुकी है।
- लोगों के विरोध के चलते यह बंद नहीं हो सकी।
- कोंच के लोगों का कहना है कि यही एकमात्र ट्रेन है, जो आधुनिक होने का अहसास दिलाती है।
- क्षेत्रीय सांसद भानुप्रताप वर्मा कहते हैं, शटल ट्रेन बंद नहीं होने देंगे।
पहले एक बोगी के साथ चलती थी ये ट्रेन
- अंग्रेजों ने 1902 में माल ढोने के लिए इस ट्रेन की शुरुआत की थी।
- उस समय यह ट्रेन मालगाड़ी के रूप में चलती थी। इसमें सिर्फ एक बोगी होती थी।
- जालौन जिले का कोंच कस्बा कभी देश का मुख्य कपास उत्पादक और बिक्री का बड़ा केंद्र हुआ करता था।
- एट में पहले से झांसी-कानपुर को जोड़ती हुई रेल लाइन थी।
- इसीलिए अंग्रेजी हुकूमत ने कोच मंडी तक रेल लाइन बिछाई।
- अंग्रेज मंडी से कपास की गांठें, गेहूं और अन्य सामान कोलकाता और मुंबई भेजा करते थे।
- वहां से माल मैनचेस्टर भेजा जाता था, जहां कपड़ा बनाकर ब्रिटेन और भारत में बेचा जाता था।

5033 views
Feb 27 2016 (02:39)
Vaibhav Agarwal*^   6116 blog posts   2568 correct pred (95% accurate)
Re# 1750970-1            Tags   Past Edits
Train Board Pic & Ait Station Pic

4737 views
Feb 27 2016 (11:30)
deepakrashikendra~   1000 blog posts
Re# 1750970-2            Tags   Past Edits
The konch -AIT shuttle should be extended to ORAI to earn Revenue.
After completion of Bhind-Konch rail line the railways will earn money.
सांसद डॉ.भागीरथ प्रसाद ने पत्रकारों से कहा कि भिंड-कौंच मार्ग के लिए उन्हें डेढ़ साल तक दिल्ली में परिश्रम करना पड़ा तब कहीं इस बार 80 किलोमीटर लंबे नए रेल मार्ग हेतु 1600 करोड़ रुपए मंजूर हुए। उन्होंने कहा कि जब सब लोग सहयोग करते हैं तो काम जल्दी होने लगते हैं।
Aug 28 2014 (14:35)  देश की सबसे कम दूरी की यह ट्रेन यात्रि‍यों का रखती है खास ख्‍याल (www.bhaskar.com)
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Commentary/Human InterestNCR/North Central  -  

News Entry# 191433   Blog Entry# 1200085     
   Tags   Past Edits
Aug 28 2014 (2:35PM)
Station Tag: Konch/KNH added by Bundelkhand/442974

Aug 28 2014 (2:35PM)
Station Tag: Ait Junction/AIT added by Bundelkhand/442974

Posted by: Bundelkhand  233 news posts
तस्‍वीर में: एट-कोंच शटल ट्रेन।

तीन कोचों वाली की यह ट्रेन ‘अददा’ नाम से है मशहूर
अंग्रेज़ों ने 1902 में व्यापार के मकसद से चलाई थी यह ट्रेन
जब शुरू हुई थी उस
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समय था सिर्फ एक कोच
झांसी. देश की सबसे कम दूरी तय करने वाली कोंच-एट शटल ट्रेन अपने यात्रि‍यों का खास ख्‍याल रखती है। यह ट्रेन कोंच से एट स्‍टेशन के बीच मात्र 13 कि‍लोमीटर की दूरी तय करती है। खास बात यह है कि‍ यदि‍ ट्रेन खुल गई और कोई यात्री दूर से रुकने की आवाज लगा रहा हो, तो गार्ड लोको पायलट को सूचि‍त करता है और गाड़ी रोक दी जाती है। यहीं नहीं, यह यात्रि‍यों के हाथ देने पर भी रुक जाती है। यात्री जब सवार हो जाते हैं इसके बाद ही ट्रेन आगे बढ़ती है। बुधवार को dainikbhaskar.com की टीम ने भी इस ट्रेन से यात्रा की, जो इस प्रकार रहा।

जब लोको पायलट ने ट्रेन को आगे बढ़ाया

लोको पायलट ने कोंच स्‍टेशन से ट्रेन को सही समय दो बजकर 15 मि‍नट पर आगे बढ़ाया। स्टेशन से ट्रेन अभी आगे निकल भी नहीं पाई कि गार्ड ने वायरलेस से उन्‍हें सूचना दी। कुछ लोग रह गए हैं। यह सुनते ही ट्रेन की गति नहीं के बराबर कर दी जाती है। दौड़ रहे लोगों से लोको पायलट 'जल्दी बैठो' का इशारा करते हैं। पीछे दौड़ रहे लोग ट्रेन में सवार होते हैं। इसके बाद लोको पायलट गार्ड से संपर्क कर पूछते हैं, कोई और तो नहीं रह गया। हरी झंडी मिलते ही ट्रेन आगे बढ़ जाती है।

यात्री जैसे ही हाथ देते हैं रुक जाती है यह ट्रेन

तीन कोचों वाली देश की सबसे कम दूरी तय करने वाली यह ट्रेन यात्री के हाथ देने पर भी रुक जाती है। बताते चलें कि‍ कोंच ओर एट स्‍टेशन के बीच में कोई स्‍टेशन नहीं है और न ही कोई स्‍टॉपेज है। इसके बावजूद यदि‍ बीच में कोई यात्री हाथ देता है तो लोको पायलट ट्रेन रोक देता है, क्‍योंकि‍ इसकी रफ्तार 30 कि‍लोमीटर प्रति‍ घंटा से ज्‍यादा नहीं होती। जब यात्री सवार हो जाता है इसके बाद ट्रेन आगे बढ़ती है। दोनों स्‍टेशनों के बीच 13 किलोमीटर का सफर 35 मिनट में पूरा होता है।

कि‍सानों, व्‍यापारि‍यों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लि‍ए है लाइफ लाइन

13 किलोमीटर की दूरी के लिए चलने वाली यह ट्रेन गांव के किसानों, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों के लि‍ए लाइफ लाइन है। वहां के लोगों में यह ट्रेन ‘अददा’ नाम से मशहूर है, क्‍योंकि‍ लगभग एक शताब्दी से यह उनकी सेवा कर रही है। एट स्‍टेशन नॉर्थ सेंट्रल रेलवे के झांसी-कानपुर रेलमार्ग पर स्‍थि‍त है। यह ट्रेन केवल एट से कोंच रेलवे स्टेशन के लि‍ए ही बनी है। यहां कोई और दूसरी ट्रेन नहीं जाती है। ऐसे में वन ट्रेन ओनली सिस्टम (एकक गाड़ी पद्धति) पर चलने वाली झांसी से लगभग 100 किमी दूर जिला जालौन के इस शटल ट्रेन की यही खासियत है।

आगे पढ़ि‍ए पैसेंजर और दूसरी ट्रेन की सवारि‍यों को लेकर ही बढ़ती है आगे…

3273 views
Aug 28 2014 (14:36)
Bundelkhand   1907 blog posts   4256 correct pred (85% accurate)
Re# 1200085-1            Tags   Past Edits
तस्‍वीर में: कोंच पहुंचने के बाद एट-कोंच शटल ट्रेन से उतरते यात्री।


यह एट रेलवे स्टेशन से कोंच तक पांच चक्कर लगाती है। सफर सुबह पांच बजकर 40 मि‍नट पर होता है। इसके तुरंत बाद कोंच स्टेशन से यह ट्रेन वापस एट पहुंचती है। एट से सुबह साढ़े 10 बजे कोंच के लिए चलती है। कोंच से दो बजकर
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15 मिनट पर लौटती है। फि‍र शाम में एट से पांच बजकर पांच मिनट पर और शाम सात बजकर 30 मि‍नट खुलती है। इसके बाद कोंच का आखिरी चक्कर रात नौ बजकर 55 मि‍नट पर लगाती है।

खास बात यह है कि‍ जब एट में पैसेंजर या कोई एक्सप्रेस रुकती है, तो यह उस ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों को कोंच तक ले जाने के लि‍ए इंतजार भी करती है। यही नहीं, कई बार पैसेंजर ट्रेन लेट भी हो जाती है फि‍र भी यह उसका इंतजारर करती है। पैसेंजर ट्रेन के यात्रियों को लेकर ही आगे बढ़ती है।

तीन कोच में सवार होते हैं लगभग 500 सौ लोग

एट और कोंच दोनों ही कस्‍बे हैं। एट के लोग कोंच में और कोंच के लोग एट में व्यापार करते हैं। इसलि‍ए वहां के लोगों के लि‍ए यह ट्रेन बेहद उपयोगी है। दूसरी ओर, सड़क मार्ग ठीक नहीं है, इसलि‍ए सुबह और शाम लोग इसी ट्रेन से यात्रा करते हैं। साथ ही पढ़ने वाले छात्र कोचिंग आदि‍ करने इसी ट्रेन से आते-जाते हैं। एट से कोंच तक के लिए यह ट्रेन पूरी ठसाठस भरी रही है। लगभग 500 लोग इन तीन कोच में सवार होते हैं।

ज्‍यादातर यात्री बि‍ना टि‍कट करते हैं यात्रा

एट जंक्शन के स्टेशन मास्टर वीके त्रिपाठी बताते हैं 50 से 100 टिकट एक बार के चक्कर में बिक जाते हैं। टिकट पांच रुपए का होता है। फिर भी ज्‍यादातर लोग बिना टिकट ही यात्रा करते हैं। वहीं, कोंच रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर अरुण पटेल कहते हैं कि 13 किलोमीटर के लिए ट्रेन चलाना, इतना स्टाफ रखना रेलवे के लिए कहीं से भी फायदेमंद नहीं है।

आगे पढ़ि‍ए इसके सफर को काफी रोचक मानते हैं लोको पायलट…
#Interesting!

3288 views
Aug 28 2014 (14:38)
Bundelkhand   1907 blog posts   4256 correct pred (85% accurate)
Re# 1200085-2            Tags   Past Edits
तस्‍वीर में: एट कोंच शटल ट्रेन के लोको पायलट।

लोको पायलट केके पटेरिया बताते हैं कि‍ पहले वह लंबी दूरी की ट्रेन चलाते थे, लेकिन इस ट्रेन का सफर उत्‍साहि‍त करने वाला है। उन्‍होंने बताया कि‍ यह कम दूरी की और छोटी ट्रेन जरूर है, लेकि‍न इसका सफर बहुत रोचक है। यह एकल पद्धति‍ से चलने वाली देश की एक मात्र ट्रेन है। कई बार लोग इसे सि‍र्फ देखने के लि‍ए आते हैं। इसलि‍ए भी इसे चलाना काफी आनंददायक लगता है।
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ट्रेन बंद करने की है सुगबुगाहट

एट-कोंच शटल डीजल से चलती है। यह ट्रेन दोनों स्‍टेशनों के बीच रोजाना पांच चक्कर लगाती है। हर बार ट्रेन यात्रि‍यों से भरी होती है। इसके बावजूद इस ट्रेन से रेलवे को घाटा हो रहा है, क्‍योंकि‍ इसमें 60 से 70 लोग बि‍ना टि‍कट के ही यात्रा करते हैं। इस कारण रेलवे प्रशासन एट-कोंच शटल ट्रेन का संचालन बंद करना चाहता है।

हालांकि, इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। रेलवे के अधि‍कारी बताते हैं कि कोंच स्टेशन तक यही एकमात्र ट्रेन जाती है। इसके लिए रेलवे ने जि‍तना मैन पावर लगाया है उसकी खर्च नि‍कलना तो दूर है, यहां तक कि‍ स्टेशन मास्टर और गार्ड तक की तनख्वाह भी इस ट्रेन से नहीं निकलती।

आगे पढ़ि‍ए क्‍या कहते हैं इस ट्रेन से यात्रा करने वाले लोग…

3266 views
Aug 28 2014 (14:39)
Bundelkhand   1907 blog posts   4256 correct pred (85% accurate)
Re# 1200085-3            Tags   Past Edits
तस्‍वीर में: एट कोंच शटल ट्रेन से यात्रा करतीं महि‍लाएं।

ट्रेन में यात्रा कर रही उषा देवी ने बताया कि‍ रेलवे के सामने स्‍थि‍ति‍ चाहे जो भी हो, लेकि‍न यह ट्रेन लोगों के लि‍ए काफी महत्‍वपूर्ण है। यह यहां के लोगों के लि‍ए लाइफ लाइन है। कोंच शहरों से कटा हुआ है। यही एकमात्र ऐसी ट्रेन से जो लोगों को आधुनि‍क होने का अहसास दि‍लाती है। वहीं, कोंच के टाट्रा गांव के लोग कहते हैं कि 'अददा' किसी भी कीमत पर बंद नहीं होने देंगे।
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क्‍या कहते हैं क्षेत्रीय सांसद भानुप्रताप वर्मा

क्षेत्रीय सांसद भानुप्रताप वर्मा कहते हैं कि इस शटल ट्रेन को कि‍सी भी कीमत पर बंद नहीं होने देंगे। कोंच के लोगों की यह ट्रेन जिंदगी है। इस ट्रेन को पकड़ने के लि‍ए दूर-दराज के गांवों के लोग घंटों पहले कोंच स्‍टेशन आ जाते हैं। साथ में खाना भी लेकर आते हैं।

बंद करने के वि‍रोध में हो चुका है आंदोलन

देश की सबसे कम दूरी वाली इस ट्रेन को बंद करने की सुगबुगाहट पहले भी उठ चुकी है। उस वक्त काफी हंगामा भी हुआ था। जन प्रतिनिधिनिधियों सहित आम लोगों ने जबरदस्त आंदोलन छेड़ा था। इसके बाद रेलवे को फैसला बदलना पड़ा था।

आगे पढ़ि‍ए अंग्रेजों ने शुरू की थी यह ट्रेन, जानि‍ए क्‍या है इसका इति‍हास…

3249 views
Aug 28 2014 (14:40)
Bundelkhand   1907 blog posts   4256 correct pred (85% accurate)
Re# 1200085-4            Tags   Past Edits
तस्‍वीर में: एट कोंच शटल ट्रेन की वीडि‍यो।

अंग्रेजों ने अपनी हुकूमत के दौरान 1902 में कोंच-एट शटल की शुरुआत माल ढोने के लिए की थी। जालौन जिले में स्थित कोंच कस्बा कभी देश का मुख्य कपास उत्पादन और बिक्री का एक बहुत बड़ा केंद्र हुआ करता था। अंग्रेजी हुकूमत ने कोंच मंडी तक रेल लाइन बिछाकर मंडी से कपास की गांठें, गेहूं और अन्य सामान को कलकत्‍ता और मुंबई भेजा करते थे। इसके बाद प्रसिद्ध औद्योगिक महानगर मनचेस्टर भेजी जाती थी। फि‍र वहां से उम्दा किस्म का कपड़ा बनाकर
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बेचने के लिए ब्रिटेन और भारत के बाजारों को भेजा जाता था।

एक बोगी से हुई थी शुरुआत

वर्ष 1902 में मालगाड़ी में सिर्फ एक यात्री बोगी लगी होती थी। एट रेलवे स्टेशन झांसी-कानपुर ट्रैक पर स्थित है। कोंच की कपास मंडी से एट रेलवे स्टेशन सबसे करीब था। इसलिए एट छोटे से स्टेशन रेलवे का जंक्शन बना दिया गया था। यहां पर ब्रिटेन के तत्कालीन प्रसिद्ध कपड़ा उद्योगपति रैली ब्रदर्श और अन्य कपड़ा उद्योग ने अपने व्यावसायिक ऑफिस बना रखे थे।

इसी तरह कलकत्ता, मुंबई से कोयला और सीमेंट आदि सामान माल गाड़ियों से कोंच पहुंचाया जाता था। माल उतारने के लिए कोंच रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी में मिया गंज कोंच को गोदाम बनाया था। इसके बाद यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे विभाग ने साल 1904 में कोंच से एट तक तीन डिब्बे की शटल ट्रेन शुरू कर दी। अब इस लाइन का विद्युतीयकरण भी करा दिया गया है।
Sep 18 2013 (12:20)  कोंच-एट मार्ग पर दौड़ेगा इलेक्ट्रिक इंजन (www.jagran.com)
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Commentary/Human InterestNCR/North Central  -  

News Entry# 148948     
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Nov 08 2013 (9:13AM)
Station Tag: Ait/AIT added by অনুপম**/401739

Nov 08 2013 (9:12AM)
Station Tag: Konch/KNH added by অনুপম**/401739

Posted by: 4πu¶am*^~  4392 news posts
भारत की सबसे कम लंबाई की रेल लाइन एट कोंच पर अब जल्द ही इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन दौड़ लगायेगी। बीते दिनों इस लाइन पर हुए विद्युतीकरण के कार्य का मंगलवार को मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त ने निरीक्षण कर निर्माण कार्य को हरी झंडी दी।
अंग्रेजी शासन काल में वर्ष, 1905 में बिछायी गयी मात्र 13.68 किमी लंबी एट कोंच रेल लाइन पर केन्द्र सरकार द्वारा विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण कराया गया। इस लाइन पर हुए विद्युतीकरण का मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त पीके वाजपेयी एवं मंडल रेल प्रबंधक नवीन चोपड़ा ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद श्री बाजपेयी ने कहा कि जल्द ही यहां इलेक्ट्रिक इंजन चलने लगेगा। एक माह के अंदर ही इस लाइन पर इलेक्ट्रिक ट्रेन दौड़ लगायेगी। इस दौरान
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उन्होने स्टेशन अधीक्षक सुनील कुमार खरे से भी स्टेशन के बारे में बातचीत कर व्यवस्थाओं पर संतोष प्रकट किया।
बहुत उतार चढ़ाव देखे हैं इस रेल लाइन पर
अंग्रेजी हुकूमत में बिछायी गयी इस रेल लाइन की कार्य योजना वर्ष 1901 में बनाई गयी थी। कोंच जो कि उस समय देश का प्रमुख कपाल उत्पादन का केंद्र था अत: अंग्रेजों ने इस रेल लाइन को कोंच से दिबियापुर तक ले जाने की योजना तैयार की और उस पर कार्य भी तुरंत चालू करवा दिया। इस रेल लाइन का निर्माण चल ही रहा था कि देश में प्रथम विश्व युद्ध के बादल मंडराने लगे। युद्ध प्रारंभ भी हो गया। अंग्रेजों के इस युद्ध में शामिल होने के कारण कोंच दिबियापुर लाइन का सर्वेक्षण का कार्य रुक गया। युद्ध खत्म होने के बाद कुछ वर्षो तक मामला ठंडा रहा। बाद में पुन: सर्वे प्रारंभ हुआ लेकिन तब तक द्वितीय विश्व युद्ध प्रारंभ हो गया। अंग्रेजी सरकार को फिर एक बार इस लाइन का कार्य रोजना पड़ा। उसके बाद देश में स्वतंत्रता की मांग जोर पकड़ने लगी। आखिर में भारत आजाद हुआ। प्रथम रेल मंत्री के रूप में लाल बहादुर शास्त्री कोंच आये और वर्ष, 1901 में तैयार की गयी कोंच दिबियापुर रेल लाइन की कार्य योजना का कार्य प्रारंभ करने की घोषणा की, लेकिन उनकी अकाल मृत्यु से कार्य प्रारंभ नहीं हो सका। वर्ष, 1977 में एक बार फिर यहां के सांसद रामचरन दोहरे ने लोकसभा में इस रेल लाइन के मुद्दे को उठाया बात भी बनी सर्वे फिर चालू हुआ, लेकिन कुछ किसानों के अदालती स्थगन के कारण कार्य रुक गया। मौजूदा सांसद घनश्याम अनुरागी ने भी बीते वर्षो इस कोंच दिबियापुर रेल लाइन के विस्तार की मांग लोकसभा में की और कोंच फफूंद लाइन के सर्वे को मंजूरी दिलवायी। जालौन गजेटियर वर्ष, 1901 में इस रेल लाइन का जिक्र है।
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