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Sat Jul 22, 2017 18:26:57 IST
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Blog Posts by VIVEK SINGH~
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Rail News
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Other NewsWCR/West Central  -  
Today (08:28)   9 दिन से घाटा झेल रही महामना, कोई नहीं जाना चाहता खजुराहो

SMILER~   112 news posts
Entry# 2359598   News Entry# 309187         Tags   Past Edits
भोपाल. 13 जुलाई को भोपाल से खजुराहो के बीच शुरू की गई महामना एक्सप्रेस रेलवे के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। नौ दिन गुजर जाने के बावजूद इसकी 70 प्रतिशत सीटें खाली जा रही हैं। एेसे में घाटे से बचने के लिए रेलवे ने ट्रेन से सेकंड सिटिंग के चार कोच हटाने का निर्णय लिया है। 25 जुलाई से महामना एक्सप्रेस 10 कोच की चलेगी। अभी ट्रेन में 14 कोच हैं।
बता तें 13 जुलाई को रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने गाड़ी संख्या 01263 भोपाल खजुराहो महामना एक्सप्रेस को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। राजधानी भोपाल से 15 जुलाई से यह ट्रेन गाड़ी संख्या 22163/22164 भोपाल-खजुराहो-भोपाल नियमित गाड़ी के रूप में चली थी। ट्रेन
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में अभी कुल 14 कोच हैं। इनमें 09 कोच सेकंड सिटिंग,01 एसी चेयरकार, 02 सामान्य कोच और 02 एसएलआर कोच हैं। इनमें सेकेंड सिटिंग की और एसी चेयरकार की कुल सीटों की संख्या लगभग 1045 है। रेलवे के आरक्षण कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार सेकंड सिटिंग कोच और एसी चेयरकार दोनो को मिलाकर प्रतिदिन बमुश्किल 300 से 350 आरक्षण होते हैं। शेष सीटें खाली जाती हैं।
स्टेशन और टाइमिंग दोनों गलत
रेलवे के जानकारों के अनुसार भोपाल रेलमंडल द्वारा शुरू की गई महामना एक्सप्रेस का स्टेशन और उसकी टाइमिंग दोनो गलत हैं। ट्रेन को सुबह की जगह रात में चलाया जाना चाहिए था। कारण कि रेलवे ने इस ट्रेन को मुख्यरूप से विश्व प्रसिद्ध पर्यटन खजुराहो के लिए चलाया है। सुबह 06.50 बजे चलने वाली यह ट्रने दोपहर 01.30 बजे खजुराहो पहुंचती है। एेसे में घूमने जाने वाले पर्यटक का आधा दिन तो ट्रेन में ही निकल जाता है। इसके बाद यदि पर्यटक को खजुराहो से भोपाल आना है तो उसे अगले दिन का इंतजार करना होगा। क्यों कि खजुराहो से यह ट्रेन दोपहर 04.15 बजे है जो कि रात 10.55 बजे भोपाल पहुंचती है। और केवल 02 से 03 घंटे में कोई भी पर्यटक खजुराहो को घूमकर वापस नही आ सकता। यही कारण है कि यात्री इस टे्रन में जाना नहीं चाह रहे।
वहीं दूसरे बड़ी गड़बड़ी ट्रेन के स्टेशन को लेकर है। अगर यह ट्रेन हबीबगंज से चलाई जाती तो ट्रेन को अधिक संख्या में यात्री मिलते। एक कारण यह है कि होशंगाबाद रोड, कोलार, मिसरोद, क्षेत्र में बड़ी संख्या में बुंदेलखंड में रहने वाले लोग हैं। जो कि छतरपुर, टीकमगढ़, खजुराहो आदि के रहने वाले हैं।

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Today (14:17)
VIVEK SINGH~   1391 blog posts   744 correct pred (67% accurate)
Re# 2359598-26            Tags   Past Edits
One more important reason is the Bus services between Bhopal and Chhatarpur Khajuraho almost provide door to door overnight service so the people who are lives in Raisen Road will naturally prefer bus which they get at their nearest bus stop itself instead of travelling all the way to Bhopal in the morning.

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★  General Travel
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Jul 01 2017 (09:06)   51703/Jabalpur - Ghunsore Passenger (UnReserved) | JBP/Jabalpur Junction (6 PFs)

kanannd   104 blog posts
Entry# 2338361            Tags   Past Edits
Ghansore Nainpur track completed

  
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Jul 01 2017 (22:57)
VIVEK SINGH~   1391 blog posts   744 correct pred (67% accurate)
Re# 2338361-1            Tags   Past Edits
Great news....people like me who are living in southern part of india are desperately waiting for this gauge conversion. 274 km is a big reduction in the journey time and distance for our respective destinations.
  
★  Rail News
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New/Special Trains
Jun 22 2017 (12:12)   New Train From Varanasi To Vadodra To Start From Friday

Southern Railway^~   176 news posts
Entry# 2328874   News Entry# 306154         Tags   Past Edits
Indian Railways is going to start a new train from Friday. It will be from Varanasi to Vadodara, Varanasi is also the parliamentary constituency for Prime Minister Narendra Modi.
The train will be known as the Mahamana Express it will be the second train of this type.
The first Mahamana Express with plush interiors all built under the 'Make in India' project, is currently running between Varanasi and New Delhi, the official said.
The
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new train will start from the Varanasi Cantt railway station. It has stops at Chivki in Uttar Pradesh, Jabalpur and Itarsi in Madhya Pradesh, Bhusawal and Jalgaon in Maharashtra and Surat and Vadodara in Gujarat.
The Varanasi-Vadodara Mahamana Express will leave Varanasi at 6.15 a.m. on Friday and reach Vadodara on Sunday morning.
From Vadodara, the train will run every Wednesday.
It has one AC-Ist class coach, eight sleeper coaches, four general coaches, one pantry car and two guard brake vans. There is no AC-3 tier coach in the train.
The new rake of the train has already reached Varanasi, according to a report.

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Jun 22 2017 (12:43)
VIVEK SINGH~   1391 blog posts   744 correct pred (67% accurate)
Re# 2328874-5            Tags   Past Edits
Before starting new trains from Varanasi, at least they should do the capacity enhancement. Saari new trains ab dusre zone k maintenance pe daud rahi hai. Yard remodelling, platform increase ye sab kaam pehle khatm karke train chalae toh better hoga.

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Rail News
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WCR/West Central  -  
Jun 20 2017 (10:30)   Bhopal Railway Station Status

deepakrashikendra~   271 news posts
Entry# 2326737   News Entry# 305936         Tags   Past Edits
भोपाल रेलवे स्टेशन। पुराने शहर में सघन आबादी से घिरा। सुबह-शाम यहां यात्रियों की चहल-पहल। ट्रेनों की आवाज से गूंजता। भोपाल रियासत की सौगात, लेकिन अफसोस। साफ-सफाई मामले में देश का दूसरा सबसे गंदा रेलवे स्टेशन। इसके इतर हबीबगंज स्टेशन की स्थिति कुछ हद तक बेहतर। दोनों स्टेशनों से रोजाना 150 से कुछ ज्यादा गाड़ियां गुजरती हैं। इस वजह से भोपाल स्टेशन को राष्ट्रीय स्तर पर ए-वन का दर्जा मिला, तो हबीबगंज को वर्ल्ड क्लॉस स्टेशन बनाने की तैयारी। ताजा तस्वीर में भोपाल स्टेशन से पैसेंजर ट्रेनें ज्यादा बनकर चलती हैं जबकि हबीबगंज से मेल या यूं कहें फास्ट ट्रेनें ज्यादा बनकर रवाना होती है। संभवत: देशभर की राजधानियों में भोपाल स्टेशन ऐसा होगा, जिसकी इमेज अब पासिंग स्टेशन की है। हुक्मरानों की बेरुखी भी भोपाल स्टेशन की तरक्की में रुकावट बनी। कभी किसी ने भोपाल स्टेशन का मुद्दा दिल्ली में पुरजोर तरीके से नहीं उठाया। इस वजह से भी दिल्ली...
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की प्राथमिकता में भोपाल स्टेशन स्थान नहीं बना सका। यात्रियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के नाम पर एक साल पहले यहां 35 लाख रुपए से आरओ वॉटर प्लांट लगाया गया, लेकिन ये बमुश्किल दस दिन काम करता है। इसके पीछे यहां की वेंडर लॉबी है, जो अपने कारोबार की गरज से नहीं चाहती कि यह काम करे। यह इल्जाम नहीं है। अंदरखाने की गुफ्तगूं का एक मौजूं है। भोपाल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक के नजदीक एस्केलेटर लगाया गया। इसके लगने से भोपाली खुशी से फूले नहीं समाए। हुजूर, अब महीने में 20 से 25 दिन ये बंद रहता है। अपनी तारीफों के खुद पुल बांधने वाले अफसर इस मसले पर तो चुप हैं ही दूसरी ओर आए दिन बंद रहने वाली लिफ्ट की भी सुध नहीं ले रहे। वहीं, छह नंबर प्लेटफॉर्म से एंट्री एकदम आसान। कहीं से कोई भी दाखिल हो, कोई रोकटोक नहीं। स्टेशन की हिफाजत का जिम्मा जीआरपी और आरपीएफ के हाथों में है, लेकिन दोनों कितनी फिक्र करते हैं, इसका दीदार छह नंबर एंट्री की आवाजाही और वहां के ‘माहौल’ को देखकर किया जा सकता है।
बड़े फ्लैश बैक में चले: भोपाल रेलवे स्टेशन नवाब शाहजहां बेगम के कारण अस्तित्व में आया। बरतानिया हुकूमत के आला अफसर सर हेनरी डेली ने नवाब शाहजहां बेगम को भोपाल को हिंदुस्तान के रेल नक्शे में लाने का मशवरा देते हुए इसके फायदे बताए। वे राजी हो गईं। तब उन्होंने 1868 में 35 लाख रुपए देना तय किया। इसके बाद 1877 में नवाब शाहजहां बेगम और गर्वनर जनरल के बीच करार हुआ। इसके बाद भोपाल स्टेट रेलवे का गठन करने का फैसला लिया गया। बुजुर्गों की मानें तो पहले फेज का काम 1882 में पूरा हुआ था।
आगे क्या: भोपाल रेलवे स्टेशन को भी हबीबगंज स्टेशन की तरह संवारा जाए तो इसकी तस्वीर बदल सकती है। खोया हुआ नूर ये हासिल कर सकता है। उम्मीद की जा सकती है ‘प्रभु’ प्रार्थना सुनेंगे। इसका उद्धार करेंगे।

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Jun 20 2017 (22:04)
VIVEK SINGH~   1391 blog posts   744 correct pred (67% accurate)
Re# 2326737-17            Tags   Past Edits
As someone mentioned above, BPL is actually facing the curse of lying on the trunk line. Due to that even if there is a demand for BPL-SBC train, eventually the train is slotted between NDLS/NZM and SBC using BPL as a passing station. This scenario is true for other stations also which are lying on the trunk line like Agra, Jhansi, Gwalior, Nagpur or even Kanpur, Dhanbad, Gaya etc over the other trunk line.
Indore got a lot of trains as it used to be a terminal station. However, once the GC will be over I think few trains will move ahead from Indore to Mhow or Khandwa.
Jabalpur
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is benefited because it is king of it's own territory plus a zonal HQ. If you see entire ALD-ET section, no city can take over JBP. Hence it gets most of the lion's share.
Plus with BPL I also believe there are yard and platform constraints, pf 6 of BPL isn't 24 coacher and also the yard of BPL is is quite small in comparison to JBP, maybe 1-2 washing lines and 2 stabling lines I suppose. Even HBJ also didn't have big yard, 3 washing lines and 1-2 sick lines. With the limited infrastructure it isn't possible to run many trains.

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Jun 20 2017 (23:37)
Arpan Pal   204 blog posts
Re# 2326737-19            Tags   Past Edits
Exactly thats the problem that limited infrastructure has stopped bhopal from getting trains. But it can be improved bhopal jn does not have space . Dnt knw it is because of lack of planning or what but habibganj has some space at the bhopal jn end outer where atleast 3 lines can be laid . Also 1 more washing pit line has approved this year. So that hopefully in future Bhopal may get Dedicated trains . Bairagarh also has alot of space on pf 2 side in which 2 more pfs can be made including coaching depot but it is in WR. Misrod can also be developed for maintaining trains . Everything could be done if they try but thry didnt try yet.

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Q. मोदी सरकार और रेल मंत्रालय कामकाज को लेकर दावे करता है। कुछ काम दिखते भी हैं लेकिन आपकी नजर में ऐसे क्या
काम हैं, जो अभी आपको फौरन करने
की जरूरत है/
अभी कई काम करने की जरूरत है। कामों को दो भागों में बांटा गया है। एक शॉर्ट टर्म, जिनमें स्टेशनों की सफाई, साफ पानी, स्टेशनों पर एस्केलेटर लगाना आदि।
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ये काम शुरू हो गए हैं और कुछ जगह पूरे भी हुए हैं। कुछ दूसरे कुछ काम हैं, जिनकी बुनियाद हमने रख दी है लेकिन उसके नतीजे अगले तीन से चार साल में दिखेंगे। जैसे नई लाइनें बिछाने और तकनीक को लाने का। उम्मीद है कि 2020 तक ये टारगेट पूरा हो जाएगा।
Q. लेकिन पैसेंजरों की जरूरतें कब पूरी कर पाएंगे आप/
जैसा कि मैं कह रहा था, हमने 16500 किमी की रेल लाइनें बिछाने के लिए शुरुआत की है। तीन साल में ये लाइनें बिछ जाएंगी। ब्रॉडगेज की लाइनों का इलैक्ट्रिफिकेशन हो जाएगा। उस वक्त तक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बन जाएगा और ज्यादातर मालगाड़ियां वहां शिफ्ट हो जाएंगी। इसके बाद यहां रेल लाइनों की क्षमता में एकाएक उछाल आ जाएगा। हमने जो बुनियाद रखी है, तब उसका नतीजा आप देख पाएंगे। तब हम ट्रेनों की तादाद भी बढ़ा सकेंगे और लोगों की आकांक्षाओं को भी पूरा कर सकेंगे।
Q. लेकिन ट्रेनों की लेट लतीफी/
कुछ हद तक शिकायत जायज है लेकिन सभी ट्रेनें लेट नहीं हैं। हम लगातार मॉनिटरिंग करते हैं। हमारे 17 में से 9 जोन में 90 फीसदी से अधिक ट्रेनें वक्त पर चलती हैं जबकि सात जोन में 80 फीसदी से अधिक ट्रेनें वक्त पर होती हैं। कुछ जगह प्रॉब्लम है लेकिन ट्रैक की क्षमता बढ़ते ही यहां भी स्थिति सुधरेगी।
Q. रेल एक्सिडेंट भी तो बढ़ रहे हैं/
हादसों को लेकर हम गंभीर हैं। यह हमारी प्रियॉरिटी है और हम इस मामले में जीरो टॉलरेंस चाहते हैं। लेकिन यह कहना ठीक नहीं होगा कि एक्सिडेंट बढ़ रहे हैं। एक्सिडेंट होने की कई वजहें होती हैं। बिना चौकीदार वाले फाटकों पर एक्सिडेंट की रोकथाम के कई उपाय हुए हैं। ट्रैक में गड़बड़ी पकड़ने के लिए भी हम आधुनिक मशीनों का उपयोग करने जा रहे हैं। इसके अलावा निचले स्तर पर भी फोकस किया जा रहा है ताकि ह्यूमन एरर भी कम से कम हो।
Q. रेलवे के ऑपरेटिंग रेश्यो पर सवाल उठते हैं। एक रुपये कमाने के लिए 94 पैसे तक खर्च करने पड़ते हैं। पिछले दिनों एक पूर्व रेलमंत्री ने भी इस पर सवाल उठाए थे/
जब छठा वेतन आयोग लागू हुआ था, तब रेलवे के ऑपरेटिंग रेश्यो में 13 फीसदी की वृद्धि हुई थी लेकिन सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू होने के बाद रेलवे पर 30 हजार करोड़ का भार बढ़ने के बावजूद ऑपरेटिंग रेश्यो पर तीन फीसदी का ही असर हुआ है। हमने कई पॉजिटिव कदम उठाए हैं। नॉन फेयर रेवेन्यू में 80 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।
Q. निवेश के नाम पर एलआईसी से लोन लिया है। जाइका से भी लोन ले रहे हैं लेकिन रेलवे यह लोन चुकाएगा कैसे/ क्या आपने इसके भविष्य के बारे में कुछ विचार किया है/
रेलवे में निवेश की जरूरत थी। पैसा कहीं से तो आना था। हमने लोन लिया है लेकिन अनाप शनाप खर्च के लिए नहीं बल्कि ऐसी जगह लगाने के लिए, जहां से रेलवे को आमदनी होगी। वह अपना खर्च भी निकाल सकेगी और लोन भी चुकाएगी। जहां हमें लगता है कि निवेश का फायदा नहीं होगा, वहां हम खर्च नहीं करते, भले ही कोई आलोचना ही क्यों न करे।
Q. पहले माल ढुलाई और अब एसी क्लास के किराए में लगातार बढ़ोतरी। हाल ही में फ्लेक्सी फेयर भी आपने लागू किया है। क्या अब यात्री किरायों में संशोधन का कोई विचार है/
यात्री किराए बढ़ाने का कोई प्रस्ताव हमारे पास विचाराधीन नहीं है। हालांकि कई सुझाव आते रहते हैं। फ्लेक्सी फेयर में हमने कुछ बदलाव किए हैं। मसलन, चार्ट बनने के बाद खाली रह गई सीटों पर छूट या फिर जिन रास्तों पर पैसेंजर कम हों, वहां भी हम चुनिंदा ट्रेनों में किरायों में कमी पर विचार करेंगे। आपको और बता दूं, हम सीटें बढ़ाने की कोशिश में जुटे हैं। हमने अतिरिक्त ट्रेनें चलाकर लगभग 37 करोड़ सीटों के मुकाबले पैसिंजरों को 50 करोड़ सीटें उपलब्ध कराने में कामयाबी हासिल की है। जहां तक कमाई की बात है तो हम दो लाख टीवी स्क्रीन रेलवे स्टेशनों पर लगाने जा रहे हैं। उन पर यात्रियों को सूचनाओं के साथ विज्ञापन दिखाए जाएंगे। इसी से हमें काफी पैसा मिलेगा। हमने इसी वजह से नॉन फेयर रेवेन्यू के जरिए 10 हजार करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई है।
Q. क्या रेलवे बोर्ड के ढांचे में बदलाव की जरूरत है/
हमने रेलवे के कॉरपोरेट की तरह गोल यानी लक्ष्य साफ कर दिए हैं। हमारी कोशिश है कि रेलवे सिर्फ दिल्ली में बैठे बोर्ड से न चले बल्कि डिविजन स्तर की यूनिट को मजबूत किया जाए, क्योंकि यात्रियों को वहीं से सुविधाएं मिलनी हैं और आमदनी भी उसी लेवल पर होनी है। ऐसे में हम अपना फोकस डिविजन स्तर पर करने जा रहे हैं। उसे बिजनेस यूनिट डिविजन के रूप में डेवलप करेंगे।
सुरेश प्रभु को रेलमंत्री की जिम्मेदारी देने के बाद बड़े पैमाने पर निवेश के लिए न सिर्फ घोषणाएं हुई हैं बल्कि रेल बजट को आम बजट में समाहित करने जैसे बड़े फैसले भी लिए गए हैं। कुछ जगह रेलवे के नए प्रोजेक्ट भी शुरू हुए हैं और स्वच्छता को लेकर रेलवे में अभियान भी चले। इसके बावजूद रेलवे को लेकर यात्रियों की शिकायतें बरकरार हैं। ट्रेन का टिकट न मिलने से लेकर ट्रेनों की लेट लतीफी की शिकायतें लगातार बनी हुई हैं। आशंका है कि रेल किराए बढ़ाए जा सकते हैं। ऐसे तमाम मुद्दों पर रेलमंत्री सुरेश प्रभु से बात की गुलशन राय खत्री ने।

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Jun 15 2017 (10:15)
VIVEK SINGH~   1391 blog posts   744 correct pred (67% accurate)
Re# 2320000-5            Tags   Past Edits
The route u mentioned is actually cursed by our former RM's who kept on announcing one train after the other without even looking at the infra and its limitations. On top of that the MGS-PNBE sector has a big reputation of chain pulling which also doesn't helps the punctuality.

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514 views
Jun 15 2017 (10:55)
Rahul K😎🚂~   2360 blog posts   2043 correct pred (77% accurate)
Re# 2320000-7            Tags   Past Edits
We all agree that these all delay related issues are due to former RMs but looking at the scale of this problem, Prabhu ji's 1st focus in last 3 yrs should have been to complete EDFC on war zone scale which we cannot see on ground.. If Prabhu ji is still not able to complete this project by 2019 and not able to clear freight load from this sector, it will be one of the points for negative marking for Prabhu

  
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Jun 15 2017 (14:14)
VIVEK SINGH~   1391 blog posts   744 correct pred (67% accurate)
Re# 2320000-8            Tags   Past Edits
Totally agree...delaying the EDFC is only going to escalate the problem. But I am not sure how fast is the EDFC work going on but considering the length and the Working culture of railways I don't think they can finish it by 2019. Also we must not forget that a huge chunk of our budget is actually eaten by Kashmir Railway on the name of national project with very little returns.
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