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കൊച്ചി∙ ഉത്തരേന്ത്യയിൽനിന്നു കേരളത്തിലേക്കു ശുപാർശ ചെയ്ത ട്രെയിനുകൾക്കു പിന്നാലെ കേരളത്തിൽനിന്നു ശുപാർശ ചെയ്തവയും വെട്ടി ദക്ഷിണ റെയിൽവേ. എറണാകുളം-സേലം ഇന്റർസിറ്റി, മംഗളൂരു-രാമേശ്വരം, കൊച്ചുവേളി-ഗുവാഹത്തി, കൊച്ചുവേളി-നിലമ്പൂർ, എറണാകുളം-രാമേശ്വരം എന്നിവ ഓടിക്കാൻ കഴിയില്ലെന്ന നിലപാടിൽ ഉറച്ചുനിൽക്കുകയാണു ദക്ഷിണ റെയിൽവേ. ചീഫ് പാസഞ്ചർ ട്രാൻസ്പോർട്ടേഷൻ മാനേജർ (സിപിടിഎം) എസ്.ജഗനാഥനാണു ദക്ഷിണ റെയിൽവേയെ പ്രതിനീധികരിച്ചു യോഗത്തിൽ പങ്കെടുക്കുന്നത്.
മുംബൈയിൽ നടക്കുന്ന ഓൾ ഇന്ത്യ ടൈംടേബിൾ കമ്മിറ്റി യോഗം ശനിയാഴ്ച തീരുമെന്നിരിക്കെ മുഖ്യമന്ത്രി തലത്തിലുള്ള ഇടപെടൽ മാത്രമാണു കേരളത്തിനു മുൻപിലുള്ള പോംവഴി. കേരളത്തിലേക്കു ട്രെയിൻ വേണ്ടെന്ന ആദ്യ ദിവസത്തെ നിലപാടു സിപിടിഎം ആവർത്തിച്ചു. കേരളത്തിലെ ഡിവിഷനുകളുടെ കൂടി സൗകര്യങ്ങൾ കണക്കിലെടുത്തു നിർദേശിച്ച ട്രെയിനുകൾക്കും ഉദ്യോഗസ്ഥൻ എതിരു നിൽക്കുന്നവെന്നതാണു വിചിത്രമായ സംഗതി. ‘മനോരമ ഓൺലൈൻ’ വാർത്തയെ തുടർന്നു കേരളത്തോടുള്ള റെയിൽവേ പക്ഷപാതം അവസാനിപ്പിക്കണമെന്ന് ആവശ്യപ്പെട്ടു എം.കെ.രാഘവൻ എംപി റെയിൽവേ ബോർഡ് ചെയർമാനു കത്തയച്ചു.
Indian Railway
ജബൽപൂരിൽനിന്നു
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തിരുവനന്തപുരത്തേക്കു ശുപാർശ ചെയ്ത പ്രതിവാര ട്രെയിൻ വിജയവാഡയിൽനിന്നു ചെന്നൈ, മധുര വഴി തിരുനെൽവേലിയിലേക്കു തിരിച്ചുവിട്ടാണു യോഗത്തിന്റെ ആദ്യദിവസം ദക്ഷിണ റെയിൽവേ ‘സഹായിച്ചത്’. ജബൽപൂരിലെ മലയാളി സൈനികരും ഭോപാൽ മലയാളികളുടെയും ശ്രമഫലമായാണു ഉത്തരേന്ത്യയിൽനിന്നു ട്രെയിൻ ശുപാർശ ചെയ്തിരുന്നത്. കൊച്ചുവേളിയിൽ പ്ലാറ്റ്ഫോം സൗകര്യമുണ്ടെങ്കിലും അക്കാര്യം സിപിടിഎം യോഗത്തിൽ മറച്ചുവച്ചുവെന്നാണ് ആക്ഷേപം. 2016ൽ യശ്വന്ത്പൂരിൽനിന്നു കൊച്ചുവേളിയിലേക്കു ട്രെയിൻ ചോദിച്ചപ്പോഴും തടസം നിന്നതു ദക്ഷിണ റെയിൽവേയാണെന്നു രേഖകൾ തെളിയിക്കുന്നു.
ഇതുവരെ സർവീസ് ആരംഭിക്കാത്ത തിരുവനന്തപുരം–ബെംഗളൂരു ട്രെയിന്റെ പേരു പറഞ്ഞാണു 2016ൽ ട്രെയിൻ വേണ്ടെന്നു വച്ചത്. ടെർമിനൽ സൗകര്യങ്ങളുടെ കുറവുമൂലമാണു കേരളത്തിനു ട്രെയിൻ അനുവദിക്കാത്തതെന്നാണു ദക്ഷിണ റെയിൽവേ ന്യായീകരണം. എന്നാൽ നേമം, കോട്ടയം ടെർമിനലുകൾ 2008ലെ ബജറ്റിൽ പ്രഖ്യാപിച്ചെങ്കിലും നടപ്പായിട്ടില്ല. പിന്നീടു പ്രഖ്യാപിച്ച ചെന്നൈ താംബരം ടെർമിനലിൽനിന്നു ട്രെയിനോടി തുടങ്ങി. സൗകര്യങ്ങൾ നിഷേധിച്ചു കേരളത്തിനുള്ള ട്രെയിനുകൾ തട്ടിയെടുക്കാനാണു ഉദ്യോഗസ്ഥ ലോബി ശ്രമിക്കുന്നതെന്ന ഗുരുതരമായ ആരോപണമാണു ഉയരുന്നത്.
train-3
കൊച്ചുവേളി–ലോകമാന്യതിലക് പ്രതിദിനമാക്കാൻ പുതിയ കോച്ചുകൾ വേണ്ടെങ്കിലും ഉദ്യോഗസ്ഥർ പാര വയ്ക്കുകയാണ്. 2015 മുതൽ ഇതുവരെ കേരളത്തിനു ലഭിക്കേണ്ട 10 ട്രെയിനുകളാണു ഉദ്യോഗസ്ഥർ വരട്ടുന്യായങ്ങൾ നിരത്തി ഒഴിവാക്കിയത്. കേരളത്തിനുേവണ്ടി ശുപാർശ ചെയ്യപ്പെട്ട ട്രെയിനുകൾ ഇവയാണ്: ജബൽപൂർ-തിരുവനന്തപുരം വീക്ക്‌ലി, ലാൽകുവ-കൊച്ചുവേളി വീക്ക്‌ലി, മംഗളൂരു-കൊച്ചുവേളി സൂപ്പർ ഫാസ്റ്റ്, മംഗളൂരു-പട്ന വീക്ക്‌ലി, കൊച്ചുവേളി-മൈസൂർ ദ്വൈവാര എക്സ്പ്രസ്, കത്തഗോടം- കൊച്ചുവേളി വീക്ക്‌ലി, എറണാകുളം-രാമേശ്വരം ട്രൈവീക്ക്‌ലി, എറണാകുളം-സേലം ഇന്റർസിറ്റി, കോച്ചുവേളി–ഗുവാഹത്തി ഡെയ്‌ലി, കൊച്ചുവേളി–നിലമ്പൂർ ഡെ‌യ്‌ലി.
  
Today (15:19)  Railway Recruitment 2018 : Last Date Extended (www.mahendraguru.com)
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Employment

News Entry# 330248     
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This is a new feature showing past edits to this News Post.
 
 
Ministry of Railways has announced certain modifications in the conditions with respect to Age, Qualification, Exam language and Exam fee etc. Accordingly, the revised online application with the modified eligibility shall be made available for submission of application from 28.02.2018 online application shall stand extended to 31.03.2018.
  
Today (11:44)  समदड़ी-भीलड़ी रेल खंड का होगा विद्युतीकरण, तीन साल पूर्व हुई थी घोषणा, लेकिन बजट नहीं मिला था (m.patrika.com)
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Other NewsNWR/North Western  -  

News Entry# 330246     
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Feb 24 2018 (11:44)
Station Tag: Bhildi Junction/BLDI added by Dilipraigur~/1723954

Feb 24 2018 (11:44)
Station Tag: Samdari Junction/SMR added by Dilipraigur~/1723954

Feb 24 2018 (11:44)
Station Tag: Jalor/JOR added by Dilipraigur~/1723954
 
 
जालोर जिले वासियों के लिए यूनियन बजट-2018 में बड़ी सौगात रेलवे के क्षेत्र में मिली है। आम बजट के साथ ही शामिल रेल बजट में समदड़ी-भीलड़ी रेल खंड के विद्युतीकरण के लिए वित्तीय स्वीकृति जारी की गई है। इस प्रोजेक्ट के लिए 776 .44 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए है। जिसके तहत फलौदी-जोधपुर-समदड़ी-भीलड़ी (फलौदी-जैसलमेर शामिल) 6 02 किमी रेल लाइन का विद्युतीकरण किया जाना है। एक तरफ इस स्थिति में टे्रनों की रफ्तार बढ़ेगी।वहीं अधिक टे्रनों की आवाजाही से रेलवे को राजस्व में अधिक प्राप्त होगा। रेलवे ट्रेक डॅवलप होने से इस टे्रक पर यात्री गाडिय़ों की संख्या में भी इजाफा होने की संभावना है।
फैक्ट फाइल...
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776 .44 करोड़ रुपए स्वीकृत
- 602 किलोमीटर रेल लाइन का होगा विद्युतीकरण
- ३०२ किमी जोधपुर-भीलड़ी रेल लाइन
- तीन हजार 130 करोड़ से तीन हजार 157 किमी रेल लाइन का होगा एनडब्ल्यूआर में विद्युतीकरण
उत्तर पश्चिम रेलवे को 3 हजार करोड़ से अधिक
आम बजट में उत्तर पश्चिम रेलवे के विद्युतीकरण के विभिन्न प्रोजेक्ट के लिए इस बार केंद्र सरकार ने बड़ा बजट जारी किया है। उत्तर पश्चिम रेलवे में कुल 3157 किमी रेल लाइन का विद्युतीकरण किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर कुल 3 हजार 130 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। यह प्रोजेक्ट काफी महात्वाकांक्षी है और बिजनेस सर्किट के रूप में जोधपुर , जालोर, जैसलमेर ?, बाड़मेर जिलों को विकसित करेगा। इन सभी जिलों का कनेक्शन भी इस स्थिति में गुजरात राज्य से हो जाएगा, जिससे उद्योग धंधों का विकास भी होगा।
2015 में घोषित हुआ था प्रोजेक्ट
यह बहुआयामी प्रोजेक्ट रेल बजट 2015 में घोषित हुआ था और इस प्रोजेक्ट पर दो स्तर पर काम होना था। पहला स्तर का काम हिंसार-भटिंडा-सूरतगढ़- जोधपुर तक यह काम होना था, इसके लिए सर्वे हो चुका था, लेकिन इसके बाद जोधपुर से भीलड़ी का काम अटका पड़ा था।यह पूरा प्रोजेक्ट 1230 किमी है और इस पूरे प्रोजेक्ट की उस समय कोस्ट 1050 करोड़ रुपए आंकी गई थी। लेकिन मामला ढिलाई में पड़ गया।
वर्तमान हालात और भविष्य पर नजरें
वर्तमान में इस टे्रक से गुड्स टे्रनें ही अधिक गुजरती है। गुड्स टे्रन 8 0 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलती हैं।वहीं यात्री गाडिय़ों में एक्सप्रेस सुपरफास्ट टे्रनें 100 किमी प्रतिघंटे से चल रही है। ट्रेक का विद्युतीकरण के साथ साथ इसका अपग्रेडेशन होने से टे्रनों की रफ्तार बढऩे की संभावना है। यात्री गाडिय़ां 20 से 30 किमी प्रतिघंटा रफ्तार से 120 से 130 किमी प्रतिघंटा से फिर दौड़ सकेंगी, जिससे सफर में और कम समय लगेगा।
अब तक राज्य में केवल एक
राजस्थान में वर्तमान में केवल एक इलेक्ट्रिक रेल लाइन रुट है, जो वेस्ट सेंट्रल रेलवे के अंतर्गत आता है। यह रूट कोटा को भरतपुर से जोड़ता है। जबकि अन्य रूट पर काम चल रहे हैं।
मिली है स्वीकृति
रेल बजट में विद्युतीकरण प्रोजेक्ट के लिए स्वीकृतियां जारी हुई है। उसमें जोधपुर-समदड़ी-भीलड़ी रेल खंड भी शामिल है।
- तरुण जैन, सीपीआरओ, जयपुर
फायदेमंद तभी जब टे्रनें मिले
रेल लाइन इलेक्ट्रिक होने से टे्रनों की रफ्तार में इजाफा होगा, लेकिन जरुरी यह है कि इस टे्रक को केवल गुड्स के उपयोग में नहीं लिया जाए, बल्कि मांगों को अमल में लाकर यात्री गाडिय़ों का संचालन भी किया जाए, तभी प्रोजेक्ट का सही मायने में जालोर वासियों को फायदा होगा।
- गोपाल जोशी, पूर्व स्टेशन मास्टर, जालोर
  
Today (11:03)  रक्सौल रेलवे स्टेशन का हाल बुरा, साफ सफाई का इंतजाम नहीं (epaper.jagran.com)
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IR AffairsECR/East Central  -  

News Entry# 330245     
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Feb 24 2018 (11:03)
Station Tag: Raxaul Junction/RXL added by Aaditya^~/1421836
Stations:  Raxaul Junction/RXL  
 
 
रक्सौल, संवाद सहयोगी : मैं भारत-नेपाल सीमा पर अवस्थित हूं। मुङो ए ग्रेड दर्जा प्राप्त है। मैं रक्सौल रेलवे स्टेशन के नाम से जाना जाता हूं। प्रति माह सवा करोड़ रुपए का राजस्व सरकार को देता हूं। बावजूद मेरी स्थिति ठीक नहीं है। साफ-सफाई का खास्ता हाल है। वरीय अधिकारियों का यहां आना-जाना रहता है। लेकिन मुङो संजाने और सवारने के लिए इनलोगों के द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है। सामान्य यात्रियों सोने के लिए यात्री प्रतिक्षालय नहीं है। प्रतिदिन लगभग 6 हजार लोग ट्रेनों से यात्र करते है। आवारा पशुओं की चहल कदमी से यात्री परेशान रहते है। पूछताछ कार्यालय का भी स्थिति ठीक नहीं है। सभी कैंटिंग बंद है। चाय और नाश्ते के लिए यात्रियों को स्टेशन से बाहर जाना पड़ता है। मैं इस दर्द बहुत दिनों से ङोल रही हूं। 1साफ-सफाई का खास्ता हाल1स्टेशन पर साफ-सफाई का खास्ता हाल है। एक निजी कंपनी द्वारा स्टेशन की...
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साफ-सफाई का जिम्मा लिया गया है। प्लेटफार्म पर लगाए गए डस्टबीनों की संख्या माकूल नहीं है। यात्री भी कागज के टुकड़े को यत्र-तत्र फेंक देते है। साथ ही सख्त नियम नहीं होने के कारण रेलवे ट्रैकों पर मानव मल पसरा रहता है। इससे उठती दुर्गंध से प्लेटफार्म पर बैठे यात्री परेशान रहते है। वरीय अधिकारी निरीक्षण के दौरान रक्सौल पहुंचते है। स्टेशन प्रबंधक व मुख्य वाणिजय निरीक्षक को गंदगी को लेकर फटकार लगाते है। कई बार तो संवेदक को जुर्माना भी लगाया जा चुका है। 1रक्सौल, संवाद सहयोगी : मैं भारत-नेपाल सीमा पर अवस्थित हूं। मुङो ए ग्रेड दर्जा प्राप्त है। मैं रक्सौल रेलवे स्टेशन के नाम से जाना जाता हूं। प्रति माह सवा करोड़ रुपए का राजस्व सरकार को देता हूं। बावजूद मेरी स्थिति ठीक नहीं है। साफ-सफाई का खास्ता हाल है। वरीय अधिकारियों का यहां आना-जाना रहता है। लेकिन मुङो संजाने और सवारने के लिए इनलोगों के द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है। सामान्य यात्रियों सोने के लिए यात्री प्रतिक्षालय नहीं है। प्रतिदिन लगभग 6 हजार लोग ट्रेनों से यात्र करते है। आवारा पशुओं की चहल कदमी से यात्री परेशान रहते है। पूछताछ कार्यालय का भी स्थिति ठीक नहीं है। सभी कैंटिंग बंद है। चाय और नाश्ते के लिए यात्रियों को स्टेशन से बाहर जाना पड़ता है। मैं इस दर्द बहुत दिनों से ङोल रही हूं। 1साफ-सफाई का खास्ता हाल1स्टेशन पर साफ-सफाई का खास्ता हाल है। एक निजी कंपनी द्वारा स्टेशन की साफ-सफाई का जिम्मा लिया गया है। प्लेटफार्म पर लगाए गए डस्टबीनों की संख्या माकूल नहीं है। यात्री भी कागज के टुकड़े को यत्र-तत्र फेंक देते है। साथ ही सख्त नियम नहीं होने के कारण रेलवे ट्रैकों पर मानव मल पसरा रहता है। इससे उठती दुर्गंध से प्लेटफार्म पर बैठे यात्री परेशान रहते है। वरीय अधिकारी निरीक्षण के दौरान रक्सौल पहुंचते है। स्टेशन प्रबंधक व मुख्य वाणिजय निरीक्षक को गंदगी को लेकर फटकार लगाते है। कई बार तो संवेदक को जुर्माना भी लगाया जा चुका है। 1
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