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Large Station Board;
Front Entrance - Outside; Large Station Board;


BME/Barmer (3 PFs)
     बाड़मेर

Track: Single Diesel-Line

Type of Station: Regular
Number of Platforms: 3
Number of Halting Trains: 0
Number of Originating Trains: 9
Number of Terminating Trains: 10
Station Road, Nehru Nagar, Barmer, 344001
State: Rajasthan
add/change address
Elevation: 193 m above sea level
Zone: NWR/North Western
Division: Jodhpur
 
 
1 Travel Tips
No Recent News for BME/Barmer
Nearby Stations in the News

Rating: 3.8/5 (24 votes)
cleanliness - excellent (3)
porters/escalators - average (3)
food - good (3)
transportation - good (3)
lodging - good (3)
railfanning - good (3)
sightseeing - good (3)
safety - good (3)

Nearby Stations

UTL/Utarlai 11 km     JSA/Jasai 19 km     KVA/Kavas 22 km     BSDA/Baniya Sanda Dhora 33 km    

Station News

Page#    Showing 1 to 20 of 30 News Items  next>>
Aug 13 2017 (20:43)  Rly pays tribute to martyrs of Indo-Pak war (epaperbeta.timesofindia.com)
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Other NewsNWR/North Western  -  

News Entry# 311629     
   Past Edits
Aug 13 2017 (20:43)
Station Tag: Barmer/BME added by karthik iyer^~/248735

Aug 13 2017 (20:43)
Station Tag: Gadra Road/GDD added by karthik iyer^~/248735

Aug 13 2017 (20:43)
Station Tag: Jaipur Junction/JP added by karthik iyer^~/248735
 
 
The Indian Railways will pay tribute to its 17 unsung heroes who attained martyrdom in 1965 Indo-Pak war while transporting arms, ammunition, and ration to the armed forces along the border in Barmer district.
These fearless heroes, including three loco pilots and 14 railway constables, went to the war zone on September 10, 1965, in a six-wagon steam engine loaded with ammunition and ration for the battalion 13 Grenadier (GJ).
They were intercepted by the Pakistani air force at Gadraroad (3km away from the Gadraroad railway station) which indiscriminately bombed the train. The
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boiler of the engine exploded and all of them died on the spot. The explosion was so huge that the bodies of six employees were never traced, including that of chief loco pilot, Madho Singh Gehlot. The undocumented account also says that the train first collided with an engine of another train coming from the opposite direction on the same track. The collision left the train stranded on the tracks and was later intercepted by the Pakistani air force.
Sukhdev Singh Gehlot, nephew of martyr Madho Singh Gehlot, recalled that his uncle was married for on ly 18 days when he received a message to take a train to the war zone. “He was new in the job and the message was relayed to him after many other loco pilots refused to drive the train to the war zone. My uncle sought permission from his parents and wife who allowed him to serve the nation,“ said Sukhdev.
The railways had received information that the Indian armed forces were falling short of ration and arms. To transport the required goods, the train route was chosen due to the higher risk involved in taking the road. The air route in Barmer was not fully developed. Gehlot along with two other loco pilots and 14 railway constables took the toughest journey of their lives from the Barmer railway station.
Retired Col K H S Shekhawat says, “Pakistan army had temporary control over some areas near Gadraroad. That was the reason why they could bomb the train in the Indian territory . However, within days, the offensive by our armed forces pushed them back into their territory .“
Taking note of the supreme sacrifice made by its employees, the North Western Railway (NWR) had built a memorial at the spot where the train was bombed. Even now, trains passing by the spot would either slow down or stop to pay tributes to the martyrs.“The North Western Railway's contribution during the wars--World War 1 and II along with wars in 1965 and 1971--is unparalleled in the country . The contribution made by these fighters will remain in the memory of general public for years to come,“ said Tarun Jain, chief public relations officer. NWR.
Oct 01 2016 (22:02)  सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पहली बार पाकिस्तान से आई ये ट्रेन, सीमा पर बढ़ी चौकसी (www.bhaskar.com)
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NWR/North Western  -  

News Entry# 281867     
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Oct 01 2016 (10:03PM)
Station Tag: Barmer/BME added by Subhash/746156
Stations:  Barmer/BME  
Posted by: Subhash  1044 news posts
 
 
बाड़मेर। पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पहली बार थार एक्सप्रेस भारत की सीमा में आई। भारत की सीमा में आई थार शनिवार को मुनाबाव स्टेशन पर पहुंची। यहां जांच एजेंसियों ने भारी चौकसी के बीच यात्रियों को चेक किया। इधर जोधपुर से रवाना होकर पाकिस्तान जाने वाली थार एक्सप्रेस भी मुनाबाव रेलवे स्टेशन पर पहुंच चुकी है। पूरे स्टेशन को सीज कर दिया गया है। पाक जाने वाले यात्री हुए कम…
- सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाक जाने वाले यात्रियों की संख्या में भारी कमी आई है।
- इस ट्रिप में 271
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यात्री पाक जाने के लिए रवाना हुए हैं। ये यात्री पाकिस्तान के ही हैं।
- इधर पाक से आने वाले यात्रियों की संख्या 487 बताई जा रही है।
- देखा जाए तो उरी अटैक के बाद पाकिस्तान जाने वाले यात्रियों की संख्या में भारी कमी आई है।
- जोधपुर समेत सीमा के बीकानेर और बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर भी चौकसी बढ़ा दी गई है।
Sep 02 2016 (19:54)  राजस्थान में एक हजार किलोमीटर रेलवे लाइन का होगा विद्युतीकरण (viratpost.com)
News Entry# 278891   Blog Entry# 1979476     
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Sep 02 2016 (7:54PM)
Station Tag: Barmer/BME added by India must trial Shinkansen Bullet train also^~/229469

Sep 02 2016 (7:54PM)
Station Tag: Phulera Junction/FL added by India must trial Shinkansen Bullet train also^~/229469

Sep 02 2016 (7:54PM)
Station Tag: Degana Junction/DNA added by India must trial Shinkansen Bullet train also^~/229469

Sep 02 2016 (7:54PM)
Station Tag: Jodhpur Junction/JU added by India must trial Shinkansen Bullet train also^~/229469
 
 
उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक अनिल सिंघल ने बताया कि प्रदेश में एक हजार किलोमीटर रेलवे लाइन का विद्युतीकरण होगा। जिसकी टेंडर प्रक्रिया शुरु हो गई है। इसी प्रकार डेगाना फुलेरा मार्ग पर डबल लाईन का मुद्दा भी अब अंतिम चरणों में चल रहा है। वे आज सुबह डीआरएम ऑफिस के सामने बनी नई रेलवे कालोनी में बने मकानों का उद्घाटन के बाद पत्रकारों से रूबरू हो रहे थे।
उन्होंने बताया कि रेलवे की ओर से राजस्थान के करीब एक हजार किलोमीटर की इलेक्ट्रीक ट्रेन चलाने की प्रक्रिया अब गति पकड़ रही है और उसकी टेण्डर प्रक्रिया भी शुरु हो गई है और संभवत: अगले दो सालों में इलेक्ट्रिक से ट्रेनें चलाने की व्यवस्था शुरु हो जाएगी। इस दौरान उन्होंने कहा कि
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डेगाना फुलेरा के बीच डबल ट्रेक की प्रक्रिया भी चल रही है और उसके लिए टेण्डर निकाले जा रहे हैं।
मेड़ता पुष्कर रेल मार्ग बनाने के लिए प्रक्रिया चल रही है और शीघ्र ही उम्मीद है कि रेलवे बोर्ड द्वारा इसके बार में सहमति देने के बाद कार्य प्रगति पर होगा। रेलवे में सिक्यूरिटी सिस्टम और सफाई व्यवस्था के मुद्दे पर उन्होंने बताया कि सुरक्षा एक अहम मुद्दा है और उस पर रेलवे की ओर से अपने संसाधनों के तहत कार्य किये जा रहे हैं और उसमें समय अनुसार जो सुधार की आवश्यकता होगी उसे पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
रेलवे अधिकारियों द्वारा नियमों की अवहेलना और कोर्ट प्रकरणों में लापरवाही के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि रेलवे एक बहुत बड़ा विभाग है और उसमें कई तरह के साधन और संसाधनों व अधिकारी वर्ग होते हैं। हालांकि सूचना के अधिकार और कोर्ट केसेज में गंभीरता रखी जाती है फिर भी कई बार लापरवाही या कार्य व्यवस्था के चलते देरी हो जाती है।
जोधपुर रेलवे स्टेशन के बारे में विकास के सवाल पर उन्होंने कहा कि तीन लिफ्ट लगाने का कार्य शुरु हो गया है और एक और एस्कलेटर की व्यवस्था यात्रियों की सुविधा के लिए शीघ्र ही शुरु की जाएगी। इसी के साथ रेलवे स्टेशन पर वाईफाई की व्यवस्था भी शुरु कर दी गई है। बाड़मेर, जैसलमेर, लूणी और जयपुर की तरफ से आने वाली ट्रेनों के जोधपुर के नजदीक पहुंचने के दौरान रोकने की बढ़ती घटनाओं को उन्होंने व्यवस्था सुधारने के निर्देश भी दिये। क्योंकि कई बार ऑनलाईन तो ट्रेन स्टेशन पर दिखती है और वह खड़ी नजदीकी सब स्टेशन पर या सिगनल के बाहर खड़ी रहती है।

9 posts - Fri Sep 02, 2016 - are hidden. Click to open.

4436 views
Sep 03 2016 (12:47)
tanseefkhan163   578 blog posts
Re# 1979476-10            Tags   Past Edits
degana - phulera doubling is important but i dnt know why they r always ignoring jodhpur- merta doubling in every discussiion of doubling of projects....in jodhpur merta section maximum trains get delayed including very important trains like mandore. ranthambore. howrah. etc..due to mix traffic of jodhpur jaipur and jodhpur bikaner bound trains...

4315 views
Sep 03 2016 (15:20)
Udaipur Mysore HumSafar superfast^~   88541 blog posts   5328 correct pred (78% accurate)
Re# 1979476-11            Tags   Past Edits
jodhpur degana me FLS ho gaya hai...
degana phulera ke complete hote hi jodhpur degana start ho jayega...
Aug 02 2016 (11:37)  यहां ट्रेन को जंजीरों में बांधकर रखा जाता है (www.bhaskar.com)
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Commentary/Human InterestNWR/North Western  -  

News Entry# 275696     
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Aug 02 2016 (11:37AM)
Station Tag: Barmer/BME added by जय हो ™ ~/718732
Stations:  Barmer/BME  
 
 
बाड़मेर। राजस्थान में एक रेलवे स्टेशन ऐसा है, जहां ट्रेन को चेन से बांध कर रखा जाता है। जी नहीं...ऐसा ट्रेन के चोरी हो जाने के डर से नहीं किया जाता, बल्कि यहां ढलान होने के कारण ट्रेन अपने अाप न चल पड़े, इसलिए प्लेटफार्म पर आते ही ट्रेन को चेन से बांध दिया जाता है। बाड़मेर रेलवे स्टेशन से कई बार ढलान के कारण ट्रेन अपने आप दौड़ पड़ी हैं तो रेलवे को यही हल सूझा। हालांकि रेलवे ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नया ट्रैक भी बनाया है।
- दरअसल बाड़मेर प्लेटफार्म पर कई बार ट्रेन के अपने आप दौड़ने की घटनाएं हो चुकी हैं।
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बाड़मेर से उत्तरलाई की तरफ रेलवे ट्रैक की ढलान होने के कारण प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन चल पड़ती है।
- इस तरह की पिछले तीन साल में तीन बड़ी घटनाएं हुई हैं।
- इसके बाद अब रेलवे ने नया ट्रैक तैयार किया है ताकि ऐसे हादसे दोबारा न हों।
प्लेटफॉर्म पर जंजीरों में कैद हो जाती है ट्रेनें
- जिस ट्रेन को इस स्टेशन में हॉल्ट करना होता है, उसे सुरक्षित रखने के लिए ऐसा किया जाता है।
- ट्रेन के प्लेटफार्म पर आते ही पहले कर्मचारी उसमें स्टीयरिंग घुमा कर ब्रेक लॉक लगाते हैं।
- उसके बाद ट्रेन के डिब्बों को जंजीरों से बांध देते हैं।
- पूर्व में हुई घटनाओं के बाद करीब एक दर्जन कार्मिक और अधिकारियों की नौकरी चली गई तो उन्हें यही विकल्प सबसे मुफीद लगा।
- अब रेलवे कार्मिक कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं ।
- इतना ही नहीं उसे चेन से बाँधने के बाद उसके पहिये के आगे लकड़ी का गुटका भी लगाते हैं।
अब नहीं होगा बड़ा हादसा, लेकिन स्थाई समाधान नहीं
- फिलहाल रेलवे ने नेहरू नगर रेलवे ओवरब्रिज के फाटक से 100 मीटर की दूरी तक एक नया ट्रैक तैयार किया है।
- यह ट्रैक इसलिए बनाया गया है कि जैसे ही कोई ट्रेन प्लेटफॉर्म से अपने आप रवाना होती है तो उसे तत्काल दूसरी लाइन की तरफ ट्रांसफर कर दिया जाएगा, जो 100 मीटर की दूरी पर जाकर अपने आप रुक जाएगी।
- हालांकि यह स्थाई समाधान नहीं हो पाया है, फिलहाल ट्रेनों को जंजीरों से मुक्ति नहीं मिलेगी, लेकिन बड़े हादसे को रोका जा सकता है।
Jul 31 2016 (19:40)  on this platform trains are locked in chains - www.bhaskar.com (www.bhaskar.com)
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IR AffairsNWR/North Western  -  

News Entry# 275504   Blog Entry# 1948361     
   Past Edits
Jul 31 2016 (7:40PM)
Station Tag: Barmer/BME added by For Better Managed Indian Railways~/1546020
Stations:  Barmer/BME  
 
 
बाड़मेर। राजस्थान में एक रेलवे स्टेशन ऐसा है, जहां ट्रेन को चेन से बांध कर रखा जाता है। जी नहीं...ऐसा ट्रेन के चोरी हो जाने के डर से नहीं किया जाता, बल्कि यहां ढलान होने के कारण ट्रेन अपने अाप न चल पड़े, इसलिए प्लेटफार्म पर आते ही ट्रेन को चेन से बांध दिया जाता है। बाड़मेर रेलवे स्टेशन से कई बार ढलान के कारण ट्रेन अपने आप दौड़ पड़ी हैं तो रेलवे को यही हल सूझा। हालांकि रेलवे ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नया ट्रैक भी बनाया है।
दरअसल बाड़मेर प्लेटफार्म पर कई बार ट्रेन के अपने आप दौड़ने की घटनाएं हो चुकी हैं।
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बाड़मेर से उत्तरलाई की तरफ रेलवे ट्रैक की ढलान होने के कारण प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन चल पड़ती है।
- इस तरह की पिछले तीन साल में तीन बड़ी घटनाएं हुई हैं।
- इसके बाद अब रेलवे ने नया ट्रैक तैयार किया है ताकि ऐसे हादसे दोबारा न हों।
प्लेटफॉर्म पर जंजीरों में कैद हो जाती है ट्रेनें
- जिस ट्रेन को इस स्टेशन में हॉल्ट करना होता है, उसे सुरक्षित रखने के लिए ऐसा किया जाता है।
- ट्रेन के प्लेटफार्म पर आते ही पहले कर्मचारी उसमें स्टीयरिंग घुमा कर ब्रेक लॉक लगाते हैं।
- उसके बाद ट्रेन के डिब्बों को जंजीरों से बांध देते हैं।
- पूर्व में हुई घटनाओं के बाद करीब एक दर्जन कार्मिक और अधिकारियों की नौकरी चली गई तो उन्हें यही विकल्प सबसे मुफीद लगा।
- अब रेलवे कार्मिक कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं ।
- इतना ही नहीं उसे चेन से बाँधने के बाद उसके पहिये के आगे लकड़ी का गुटका भी लगाते हैं।
अब नहीं होगा बड़ा हादसा, लेकिन स्थाई समाधान नहीं
- फिलहाल रेलवे ने नेहरू नगर रेलवे ओवरब्रिज के फाटक से 100 मीटर की दूरी तक एक नया ट्रैक तैयार किया है।
- यह ट्रैक इसलिए बनाया गया है कि जैसे ही कोई ट्रेन प्लेटफॉर्म से अपने आप रवाना होती है तो उसे तत्काल दूसरी लाइन की तरफ ट्रांसफर कर दिया जाएगा, जो 100 मीटर की दूरी पर जाकर अपने आप रुक जाएगी।
- हालांकि यह स्थाई समाधान नहीं हो पाया है, फिलहाल ट्रेनों को जंजीरों से मुक्ति नहीं मिलेगी, लेकिन बड़े हादसे को रोका जा सकता है।
अब तक ये तीन बड़ी घटनाएं
- वर्ष 2011 : रात में दौड़ गया इंजन : साल 2011 में रेलवे स्टेशन के ट्रैक पर खड़ा इंजन रात 11 बजे के करीब अपने आप ही दौड़ गया। जब रेलवे कार्मिकों को भी भनक लगी तो रोकने के प्रयास भी किए, लेकिन विफल रहे। उत्तरलाई से आगे जिप्सम हाल्ट के पास स्वतः ही रुका। गनीमत रही कि उस दौरान सामने से कोई ट्रेन नहीं आई, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था।
- वर्ष 2013 : गुवाहटी के 13 डिब्बे दौड़े : 25 मार्च 2013 की रात 9 बजे रेलवे स्टेशन पर खड़ी गुवाहटी एक्सप्रेस के 13 कोच अपने आप दौड़ गए। कोच में सवारियां भी थीं। ट्रेन को 11 बजे रवाना होना था। इस दौरान सामने से ट्रेन भी आने वाली थी, जिसे उत्तरलाई पर ही रोका गया। गनीमत रही कि कोई हादसा नहीं हुआ।
- वर्ष 2015 : यशवंतपुरम का एक कोच दौड़ा : 25 फरवरी 2015 को शंटिंग के दौरान यशवंतपुरम एक्सप्रेस का एक एसी कोच स्वतः ही पटरियों पर दौड़ने लगा। इस दौरान रेलवे के तीन फाटक खुले थे, लेकिन लोगों की सुझबूझ से कोई हादसा नहीं हुआ। जबकि सामने से लोकल ट्रेन आ रही थी। रेलवे अधिकारियों ने भी सुझबूझ दिखाई और कोच को उत्तरलाई के पास यार्ड पर डायवर्ट कर रोका।

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Aug 01 2016 (12:58)
riz339~   2923 blog posts   125 correct pred (51% accurate)
Re# 1948361-1            Tags   Past Edits
Great

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Aug 01 2016 (13:33)
vipinpandit   595 blog posts   1 correct pred (100% accurate)
Re# 1948361-2            Tags   Past Edits
यही चीज़ हमारे इंदौर में भी होती है। पहले हुए कुछ हादसों से सबक लेकर इंदौर यार्ड से लेकर लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन तक खड़ी रहने वाली ट्रेनों को गुटके और चेन से बांधकर रखा जाता है ताकि वे पीछे की ओर लुढ़क न जाएं..

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Aug 01 2016 (13:43)
Udaipur Mysore HumSafar superfast^~   88541 blog posts   5328 correct pred (78% accurate)
Re# 1948361-3            Tags   Past Edits
Nice temporary arrangement but a permanent solution should be found out.
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