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BTT/Bhatni Junction (5 PFs)
بھٹني جنکشن     भटनी जंक्शन

Track: Double Electric-Line

Type of Station: Junction
Number of Platforms: 5
Number of Halting Trains: 66
Number of Originating Trains: 6
Number of Terminating Trains: 6
Junction Point - SV/GKP/MAU
State: Uttar Pradesh
add/change address
Elevation: 75 m above sea level
Zone: NER/North Eastern
Division: Varanasi
 
 
No Recent News for BTT/Bhatni Junction
Nearby Stations in the News

Rating: 3.2/5 (34 votes)
cleanliness - good (5)
porters/escalators - average (4)
food - good (5)
transportation - good (4)
lodging - poor (3)
railfanning - good (5)
sightseeing - average (4)
safety - good (4)

Nearby Stations

NNPR/Nonapar 5 km     POKL/Peokol 5 km     NRA/Nunkhar 7 km     SRU/Salempur Junction 10 km     BHTR/Bhatpar Rani 13 km     AHLR/Ahilyapur 15 km     DRBR/Deoraha Baba Road 15 km     LRD/Lar Road 20 km     STZ/Satraon 21 km     DEOS/Deoria Sadar 21 km    

Station News

Page#    Showing 1 to 20 of 59 News Items  next>>
Nov 10 2017 (11:48)  देवरिया की टमटम है बरहजिया ट्रेन,भटनी-बरहज रेल रूट पर 1896 से चल रही पांच बोगी वाली ट्रेन (epaper.livehindustan.com)
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Other NewsNER/North Eastern  -  

News Entry# 322451     
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Nov 10 2017 (11:48)
Station Tag: Deoria Sadar/DEOS added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Nov 10 2017 (11:48)
Station Tag: Bhatni Junction/BTT added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964
 
 
विरोध से बंद नहीं हुई ट्रेन
बरहज का औद्योगिक महत्व था
अजब-गजब
’ भटनी-बरहज रेल रूट पर 1896 से चल रही पांच बोगी वाली ट्रेन
’ चकरा क्रासिंग खोलने-बंद करने को ट्रेन में ही रहता
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है प्वाइंटमैन
देवरिया की टमटम है बरहजिया ट्रेन
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चकरा क्रॉसिंग से गुजरती बरहजिया ट्रेन
घाटे को देखते हुए रेलवे ने वर्ष 2013 में बरहजिया ट्रेन को बंद करने की कोशिश की। बरहज में इसके खिलाफ व्यापारी सड़क पर उतर गए। रेलवे को अपना फैसला वापस लेना पड़ा।
ब्रिटिश काल में बरहज एक औद्योगिक कस्बा हुआ करता था। इसीलिए अंग्रेजों ने बरहज को पहले जलमार्ग फिर रेल मार्ग से जोड़ा। यहां पर बड़ी संख्या में खांडसारी और दाल मिलें थीं। यहां से शीरा चट्टा का कारोबार हुआ करता था।
देवरिया वाचस्पति मिश्र जब देश बुलेट ट्रेन का सपना सच करने जा रहा है, देवरिया में एक ऐसी भी ट्रेन है जो टमटम की तरह चलती है। एक बार में 31 किलोमीटर का सफर तय करने वाली इस ट्रेन का नाम बरहजिया है। रफ्तार इतनी कम कि कोई चाहे तो हल्की दौड़ लगा कर चढ़ जाए या जहां मन हो वहां उतर जाए। 31 किलोमीटर के बीच सात स्टेशन पड़ते हैं। बीच में एक क्रासिंग भी है जहां यह ट्रेन दो बार रुकती है। दरअसल यह क्रासिंग मानवरहित है। इसके फाटक बंद करने और खोलने के लिए प्वाइंटमैन ट्रेन में ही रहता है। क्रासिंग का लोकल नाम चकरा क्रासिंग है। चकरा क्रासिंग पर सीन मजेदार होता है। ट्रेन क्रासिंग से पहले रुक जाती है। ट्रेन से प्वाइंटमैन उतरता है। क्रासिंग पर पहुंच कर दोनों ओर के लोगों को रोक कर फाटक बंद करता है। फिर ट्रेन को हरी झंडी दिखाता है। ट्रेन क्रासिंग पार कर फिर रुक जाती है। प्वाइंटमैन गेट खोलता है और दौड़ कर ट्रेन में चढ़ता है। इसके बाद ट्रेन आगे चलती है। इस दौरान ट्रेन यहां करीब 10 मिनट रुकती है। क्षेत्र के लोगों ने देर तक रुकने से इस क्रासिंग को भी स्टेशन बना दिया है। वे यहीं से ट्रेन में सवार होते हैं या उतर जाते हैं। यह हाल है रेलवे के भटनी बरहज रूट का। कुल 31 किमी के इस रेल रूट पर सात स्टेशन हैं। वर्ष 1896 में अंग्रेजों ने बरहज के औद्योगिक महत्व को देखते हुए इसे भटनी जंक्शन से जोड़ा था।
Oct 23 2017 (08:28)  साइड लाइनों पर भी फर्राटा भरेंगी इलेक्टिक गाड़ियां गोरखपुर कैंट-पनियहवां रूट पर शुरू हो चुकी है विद्युतीकरण की प्रक्रिया (epaper.jagran.com)
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New Facilities/TechnologyNER/North Eastern  -  

News Entry# 320523     
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Oct 23 2017 (08:28)
Station Tag: Farrukhabad Junction/FBD added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Oct 23 2017 (08:28)
Station Tag: Aunrihar Junction/ARJ added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Oct 23 2017 (08:28)
Station Tag: Atrauli Road/AUR added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Oct 23 2017 (08:28)
Station Tag: Bhatni Junction/BTT added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Oct 23 2017 (08:28)
Station Tag: Gonda Junction/GD added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Oct 23 2017 (08:28)
Station Tag: Gorakhpur Junction/GKP added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964
 
 
साइड लाइनों पर भी फर्राटा भरेंगी इलेक्टिक गाड़ियां
गोरखपुर कैंट-पनियहवां रूट पर शुरू हो चुकी है विद्युतीकरण की प्रक्रिया
पूवरेत्तर रेलवे
भटनी-औड़िहार रेल खंड का भी होगा विद्युतीकरण, रेल मंत्रलय तैयारी में जुटा
जागरण संवाददाता,
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गोरखपुर: के साइड वाले सिंगल लाइनों (लूप लाइनों) पर भी इलेक्टिक गाड़ियां फर्राटा भरेंगी। इसके लिए जोर-शोर से तैयारी चल रही है। गोरखपुर कैंट से पनियहवां से कुछ आगे और वाल्मीकि नगर स्टेशन से पहले की सीमा तक लगभग 96 किमी रेल खंड पर विद्युतीकरण होना है। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वहीं इलाहाबाद-औड़िहार-भटनी रेल खंड के विद्युतीकरण के लिए पहले ही शिलान्यास हो चुका है।1रेल मंत्रलय ने अधिक से अधिक लाइनों का विद्युतीकरण करने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिया है। के मुख्य मार्ग (डबल लाइन) बाराबंकी- गोरखपुर-छपरा (424 किमी) का विद्युतीकरण पिछले साल ही पूरा हो गया। इस रूट से गुजरने वाली तथा यहां से बनकर चलने वाली लगभग सभी प्रमुख गाड़ियां इलेक्टिक इंजन से ही चल रही हैं। अब रेलवे प्रशासन की नजर साइड की लूप लाइनों पर है। आने वाले दिनों में सभी रेल मार्ग पर इलेक्टिक इंजन से ही गाड़ियां संचालित की जाएंगी। इन रेल लाइनों का पहले दोहरीकरण किया जाएगा, फिर विद्युतीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी। तब तक विद्युतीकरण के लिए फाइलों से संबंधित कार्य चलते रहेंगे। 1विभाग के तकनीकी जानकारों के मुताबिक सिंगल लाइन पर विद्युतीकरण होता है। अपनी सहूलियत के लिए रेलवे प्रशासन दोहरीकरण के बाद ही विद्युतीकरण कराता है। यहां जान लें कि इलेक्टिक इंजनों के रखरखाव और मरम्मत के लिए 89 करोड़ रुपये की लागत से गोरखपुर में वातानुकूलित इलेक्टिक लोको शेड का निर्माण भी शुरू हो चुका है।मिलेगी राहत1’ रेलवे के खर्चे में आएगी कमी। 1’ पर्यावरण में प्रदूषण नहीं फैलेगा। 1’ समय की बचत होगी, ट्रेनें बढ़ेंगी। 1’ स्टेशनों पर बिजली की व्यवस्था। 1’ तेल से सभावित दुर्घटनाएं खत्म।डेमू की जगह चलाई जाएंगी मेमू गाड़ियां 1 के लोकल रूट पर पैसेंजर ट्रेनों की जगह डेमू गाड़ियां चल रही हैं। आने वाले दिनों में डेमू की जगह मेमू ट्रेनें चलाई जाएंगी। सिंगल लाइनों पर विद्युतीकरण हो जाने से डीजल इंजन से चलने वाली डेमू ट्रेन की जगह इलेक्टिक इंजनों से चलने वाले मेमू ट्रेनें चलने लगेंगी। इससे लोकल यात्रियों को राहत पहुंचेगी।इन रूटों पर मिल चुकी है स्वीकृति 1- गोरखपुर कैंट- कप्तानगंज- घुघली- पनियहवां और इलाहाबाद- औड़िहार - भटनी के अलावा मथुरा- कासगंर - फरूखाबाद- कानपुर अनवरगंज, मऊ-शाहगंज, औड़िहार-जौनपुर, औड़िहार-छपरा तथा इंदारा-फेफना रेल खंड पर विद्युतीकरण के लिए स्वीकृति मिल चुकी है।1035 किमी रूट के लिए 1424.59 करोड़ बजट 1रेल मंत्रलय ने के 1035 किमी लूप लाइन (साइड लाइन) का विद्युतीकरण करने के लिए हरी झंडी दिखा दी है। इस कार्य को पूरा करने के लिए मंत्रलय ने 1424.59 करोड़ रुपये बजट भी स्वीकृत कर दिया है।
Sep 03 2017 (17:18)  पूवरेत्तर रेलवे ट्रेनों की रफ्तार पर सिस्टम का रोड़ा,110 की बजाए अधिकतम 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही गाड़ियां (epaper.jagran.com)
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IR AffairsNER/North Eastern  -  

News Entry# 314490     
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Sep 03 2017 (17:18)
Station Tag: Siwan Junction/SV added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Sep 03 2017 (17:18)
Station Tag: Deoria Sadar/DEOS added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Sep 03 2017 (17:18)
Station Tag: Deokali/DEO added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Sep 03 2017 (17:18)
Station Tag: Bhatni Junction/BTT added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Sep 03 2017 (17:18)
Station Tag: Chhapra Junction/CPR added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Sep 03 2017 (17:18)
Station Tag: Basti/BST added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Sep 03 2017 (17:18)
Station Tag: Lucknow Junction NER/LJN added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Sep 03 2017 (17:18)
Station Tag: Gonda Junction/GD added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Sep 03 2017 (17:18)
Station Tag: Gorakhpur Junction/GKP added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964
 
 
ट्रेनों की रफ्तार पर सिस्टम का रोड़ा
स्टेशन यार्ड में कहीं पटरी के नीचे कंकरीट नहीं तो कहीं प्वाइंट पर दिक्कत 1
पूवरेत्तर रेलवे
110 की बजाए अधिकतम 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही गाड़ियां
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प्रेम नारायण द्विवेदी ’ गोरखपुर 1लगातार रेल दुर्घटनाओं के बाद भी रेल प्रशासन ट्रेन संचलन को लेकर सजग नहीं है। मुजफ्फरनगर और कानपुर-टुंडला के बीच हुई रेल दुर्घटनाओं ने रेलवे के समूचे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया है। कुछ ने इसे मानवीय भूल बताया तो कइयों ने पटरी और ट्रैक की खामी करार दिया। जांच अभी जारी है, लेकिन सच यह है कि रेल की पटरियां अब ट्रेनों की गति को सहन करने में खुद को सक्षम नहीं पा रहीं। के मुख्य मार्ग बाराबंकी-गोरखपुर-छपरा पर सुपरफास्ट गाड़ियां रफ्तार नहीं पकड़ पा रहीं। यार्डो में स्थित कासन रफ्तार की राह में रोड़ा बने हुए हैं। ट्रेनों की रफ्तार 75 किमी से अधिक नहीं बढ़ पा रही हैं। 1लोको पायलट और गार्डो को लखनऊ मंडल में गोरखपुर से गोंडा के बीच लगभग 23 तथा वाराणसी मंडल में गोरखपुर से छपरा के बीच 15 अवरोधक मिल रहे हैं। ट्रेन जैसे ही रफ्तार पकड़ती है, लोको पायलट और गार्ड को कासन रूपी ब्रेकर मिल जाता है। ऐसे में वे चाहकर भी ट्रेन को गति नहीं प्रदान कर पाते। जबकि, इस रेलखंड पर अधिकतम 110 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन चलाने की इजाजत है। 25 अगस्त को ही 15530 नंबर की एक्सप्रेस ट्रेन को गोरखपुर पहुंचने में 23 अवरोधों को पार करना पड़ा। गोंडा यार्ड में ही ट्रेन बैड एप्रेन के चलते 10 से 15 किमी की रफ्तार से चली। उसके बाद हर एक पांच से 10 किमी पर स्थित परसा तिवारी, टिनिच, ओरवारा और मुंडेरवा आदि स्टेशन यार्डो में अवरोधक मिले। अधिकतर अवरोध लेस कुशन और कुशन कम कांटा के चलते मिले। सूत्र बताते हैं कि कासन स्थाई और अस्थाई होते हैं। स्थाई कासन कर्व आदि पर होते हैं, जहां ट्रेन को हमेशा नियंत्रित कर चलाया जाता है। अस्थाई कासन पटरी बदले जाने, स्लीपर चेंजिंग और प्वाइंट पर होते हैं। अस्थाई कासन यह ट्रेन संचलन के लिए अनवरत ठीक नहीं होते। छपरा जाने वाली ट्रेनों को तो गोरखपुर यार्ड स्थित प्लेटफार्म नंबर तीन के लाइन नंबर चार पर ही कासन मिल जाते हैं। यहां लकड़ियों के स्लीपर होने की वजह से गाड़ियां 10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाई जाती हैं। इसके बाद कुसम्ही, बैतालपुर, देवरिया, भटनी और सिवान यार्ड में कासन मिलते हैं। लेस कुशन यानी पटरी के नीचे कंकरीट का कम होना और कुशन कम कांटा यानी प्वाइंट के नीचे कंकरीट का कम होना। जानकारों का कहना है कि अधिक दिनों तक पटरियों के नीचे पर्याप्त कंकरीट न होने से रेल लाइन कमजोर होती हैं। प्वांइट के नीचे पर्याप्त मजबूती न होना एक तरह से दुर्घटना को बुलावा देना है।सुरक्षा व समय का रखा जा रहा है ख्याल 1 के सीपीआरओ संजय यादव का कहना है कि कुछ यार्ड के प्वाइंटों पर गिट्टी की छनाई की अवधि समाप्त हो गई है। इसके चलते कासन लिया गया है। जल्द ही कासन समाप्त कर दिया जाएगा। गाड़ियां 75 से 90 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाई जा रही हैं। सुरक्षा व समय-पालन का ख्याल रखा जा रहा है। 1असमय काल के गाल में समा चुके हैं दर्जनों लोग126 मई 2014 को चुरेब रेलवे स्टेशन यार्ड में प्वाइंट पर ही 12556 गोरखधाम एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। 30 सितंबर 2014 को नंदानगर स्थित क्रासिंग के प्वाइंट पर लखनऊ-बरौनी एक्सप्रेस से कृषक की आमने-सामने की टक्कर हो गई थी। इन दुर्घटनाओं में दर्जनों लोग असमय काल के गाल में समा गए और सैकड़ों घायल हुए। लेकिन सवाल यह है कि आखिर कब तक। एक तरफ रेलवे सुरक्षा और समय-पालन को दुरुस्त करने का दावा ठोक रहा है और दूसरी तरफ गाड़ियों को कासन पर चला रहा है।
Jun 07 2017 (20:13)  ‘जमीन’ के पेंच में फंसा लालू का ड्रीम प्रोजेक्ट,बिहार में चल रहा काम, यूपी में अभी नहीं मिल पाई है जमीन (epaper.jagran.com)
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Other NewsNER/North Eastern  -  

News Entry# 304656     
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Jun 07 2017 (20:13)
Station Tag: Bhatni Junction/BTT added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Jun 07 2017 (20:13)
Station Tag: Gorakhpur Junction/GKP added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964
 
 
सिस्टम पर सवाल
बिहार में चल रहा काम, यूपी में अभी नहीं मिल पाई है जमीन
रेलवे ने लिखा जिलाधिकारी को पत्र 1
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पवन कुमार मिश्र ’ देवरिया1 पूर्व रेलमंत्री
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लालू प्रसाद यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट जमीन की पेंच में फंसा हुआ है। पूवरेत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल स्थित हथुआ-भटनी नई रेल लाइन परियोजना में रेलवे प्रशासन को अभी तक भूमि आवंटित नहीं हो पाई है। बिहार में भूमि अधिग्रहण के बाद निर्माण कार्य तेजी के साथ चल रहा है, एक खंड पर तो गाड़ियां फर्राटा भी रही रही हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में भूमि हस्तानांतरण का मामला अधर में है। जिला प्रशासन ने रेलवे को अभी तक भूमि उपलब्ध नहीं करा पाया है। वर्ष 2004-05 में तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने भटनी और हथुआ को जोड़ने के लिए नई लूप लाइन के निर्माण की आधारशिला रखी। हथुआ से फुलवरिया, पंचदेवरी, भोरे, कटया और भटनी तक रेल लाइन उत्तर प्रदेश और बिहार को जोड़ रही थी। लगभग 70 किमी इस नई रेललाइन की स्वीकृति मिल जाने के बाद भूमि अधिग्रहण शुरू हो गया। बिहार में हथुआ-बथुआ लगभग 22 किमी रेल लाइन बिछ गई। शेष बथुआ और पंचदेवरी के बीच 12 रेल लाइनों का निर्माण भी शुरू हो गया है। लेकिन करीब 35 किमी रेल लाइन के लिए जमीन का इंतजार है। इस रेल लाइन में देवरिया जिले के सलेमपुर तहसील के तीन और भाटपाररानी तहसील के 11 गांवों की 41.902 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की जानी है। जिसमें हतवा नकहनी, तेनुआ, जिगिना मिश्र, रायबारी, पिपरा विठ्ठल, घांटी, मायापुर, घांटीखास, चौरिया, बनकटा तिवारी, अमवां, सिंहपुर, धर्मखोर बाबू, इमिलिया गांवों की भूमि शामिल है। इसके लिए रेलवे की तरफ से जिला प्रशासन को 9.24 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। इस परियोजना पर अब तक 86 लाख से अधिक रकम खर्च भी हो चुकी हैं। जानकारों का कहना है कि बजट भी लगातार बढ़ता जा रहा है। 12 वर्ष की अवधि में सिर्फ भूमि की कीमत ही साढ़े चार गुना बढ़ गई है। बिहार में भूमि हस्तानांतरण के लिए भूमि की कीमत सरकार तय करती है, इसलिए वहां कार्य तेजी के साथ शुरू हो गया। उत्तर प्रदेश में किसानों से वार्ता के बाद ही सरकार और रेलवे भूमि का अधिग्रहण कर सकती है। इसलिए उत्तर प्रदेश में यह रेल लाइन फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी। यही स्थिति रही तो उत्तर प्रदेश की नई रेल लाइन परियोजनाओं में भी पेंच फंस सकता है।देवरिया : पूवरेत्तर रेलवे के उपमुख्य इंजीनियर निर्माण ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कहा है कि जिला प्रशासन मुआवजे की दर तय करे, जो भी तय होगा, रेलवे की तरफ से दिया जाएगा। साथ ही उप मुख्य इंजीनियर ने स्थलीय कब्जा भी दिलाए जाने की मांग की है। 1किसान लगातार करते रहे विरोध 1देवरिया : ड्रीम प्रोजेक्ट को शुरू से ही किसानों का विरोध सहना पड़ा है। किसानों का आरोप रहा है कि प्रस्तावित रेल लाइन पूर्व रेलमंत्री के ससुराल, गांव और उनके रिश्तेदारियों को जोड़ती है। किसान संघर्ष समिति की तरफ से किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। समिति के अध्यक्ष त्रिगुणानंद मिश्र कहते हैं कि किसान जमीन किसी कीमत पर देने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि यह परियोजना निजी हित में स्वीकृत है। उप भूमि अध्याप्ति अधिकारी रामकेश यादव ने बताया कि रेलवे ने जमीन पर कब्जा मांगा है, लेकिन बिना किसानों से वार्ता व मुआवजा दिए आगे की कार्रवाई संभव नहीं है। हालांकि, छह साल पूर्व रेलवे और जिला प्रशासन ने मुआवजा तय करने के लिए किसानों से वार्ता की। कुछ किसान नौकरी व मुआवजा देने पर जमीन देने को राजी भी हुए, लेकिन अधिकतर विरोध जता रहे थे। इस दौरान 22 दिसंबर 2012 को अधिग्रहण की समस्त कार्रवाई स्वत: समाप्त हो रही थी, जिसे देखकर जिला प्रशासन ने 19 दिसंबर को किसानों के विरोध के बावजूद रेलवे को अभिलेखीय कब्जा दे दिया।’ वर्ष 2004-05 में हथुआ-भटनी नई रेल लाइन को मिली थी स्वीकृति1’ इस परियोजना पर अब तक 86 लाख से अधिक रकम खर्च
Apr 14 2017 (09:28)  ट्रेनों में चेनपु¨लग की रोकथाम को टीम गठित (m.jagran.com)
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Crime/AccidentsNER/North Eastern  -  

News Entry# 299593     
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Apr 14 2017 (09:28)
Station Tag: Bhatni Junction/BTT added by Proud CMSian~/1427404

Apr 14 2017 (09:28)
Station Tag: Siwan Junction/SV added by Proud CMSian~/1427404
 
 
सिवान । आरपीएफ इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने इन दिनों ट्रेनों में बढ़ रही चेन पु¨लग की घटनाओं की रोकथाम के लिए टीम का गठन किया है। इसका नेतृत्व अनिल कुमार करेंगे। इसके साथ ही ट्रेनों में आरपीएफ के स्टॉफ को तैनात किया गया है। इसी क्रम में गुरुवार को भटनी यार्ड से 19604 में चेन पु¨लग करते एक युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। गिरफ्तार युवक गाजियाबाद निवासी रामानंद यादव बताया जाता है। दूसरी तरफ परीक्षार्थियों द्वारा चेन पु¨लग करने की घटनाओं की रोकथाम के लिए संबंधित थानों से भी संपर्क किया गया है।
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