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Thu Jul 27, 2017 19:53:12 IST
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MTC/Meerut City Junction (6 PFs)
میرٹھ نگر جنکشن     मेरठ नगर जंक्शन

Track: Double Electric-Line

Type of Station: Junction
Number of Platforms: 6
Number of Halting Trains: 69
Number of Originating Trains: 8
Number of Terminating Trains: 8
City Railway Station Rd, Meerut
State: Uttar Pradesh
Elevation: 228 m above sea level
Zone: NR/Northern
Division: Delhi
2 Travel Tips
No Recent News for MTC/Meerut City Junction
Nearby Stations in the News

Rating: 4.1/5 (101 votes)
cleanliness - good (13)
porters/escalators - good (12)
food - good (13)
transportation - excellent (13)
lodging - excellent (12)
railfanning - good (13)
sightseeing - good (12)
safety - good (13)

Nearby Stations

MUT/Meerut Cantt. 4 km     PRTP/Partapur 7 km     PRPT/Prshtampatnam 7 km     PQY/Pabli Khas 9 km     NRNR/Nurnagar 9 km     MUZ/Mohiuddinpur 11 km     CXA/Chandsara Halt 11 km     DRLA/Daurala 15 km     KXK/Kharkhauda 18 km     MDNR/Modinagar 19 km    

Station News

Page#    Showing 1 to 20 of 112 News Items  next>>
Jul 25 2017 (22:19)  डबल ट्रैक पर धड़ाधड़ दौड़ रहीं गोल्डन टेंपल और पैसेंजर ट्रेन (www.jagran.com)
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Commentary/Human InterestNR/Northern  -  

News Entry# 309474     
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Jul 25 2017 (22:19)
Station Tag: Meerut City Junction/MTC added by Saurabh*^~/15807

Posted by: Saurabh*^~  3099 news posts
मेरठ: 18 किलोमीटर के रेलवे ट्रैक दोहरीकरण का कार्य पूरा होने के बाद मुख्य यात्री ट्रेनों और माल गाड़ियों का संचालन सुधरने लगा है। आमतौर पर लेट रहने वाली शालीमार, गोल्डन टेंपल सरीखी ट्रेनों को अब प्लेटफार्म पर बेवजह नहीं खड़ा होना पड़ रहा।
मेरठ सिटी से टपरी स्टेशन तक रेलवे ट्रैक का दोहरीकरण किया जाना है। मेरठ से दौराला तक कार्य 14 जुलाई को पूरा हो गया है। छोटे से हिस्से में यह काम पूरा होने से ट्रेनों के संचालन पर काफी फर्क पड़ा है। गोल्डन टेंपल ट्रेन सिटी स्टेशन पर शाम 7.19 बजे पहुंचती है। इसी बीच शताब्दी का समय 7.16 बजे है। नई दिल्ली जाने वाली शताब्दी के पास होने तक गोल्डन टेंपल को सिटी स्टेशन पर खड़ा रहना
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पड़ता था। इस प्रक्रिया में रोजाना गोल्डन टेंपल 25 से 30 मिनट स्टेशन पर खड़ी रहती थी। अब डबल ट्रैक होने से गोल्डन टेंपल को रोकना नहीं पड़ता।
किस ट्रेन पर क्या प्रभाव?
-दिल्ली सहारनपुर पैसेंजर का मेरठ आने का समय शाम 8.51 बजे है। रेवाड़ी से मेरठ सिटी स्टेशन तक चलने वाली पैसेंजर ट्रेन का समय रात 8.40 बजे है। कालका एक्सप्रेस का समय भी इसके आसपास है। इससे दोनों ट्रेन के समय में सामंजस्य नहीं बन पाता था। अब ये ट्रेनें सही समय पर संचालित हो रही हैं।
- सुबह के समय शालीमार, उत्कल, नौचंदी और संगम ट्रेनें आती हैं। इस बीच कोई मालगाड़ी आने पर उसे कम से कम पांच घंटे तक रोकना पड़ता था। अब डबल ट्रैक होने से ट्रेनें धड़ाधड़ पास हो रही हैं।
अक्टूबर तक खतौली तक हो जाएगा डबल ट्रैक
दौराला तक डबल ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन आरंभ होने के बाद अब खतौली तक इस काम को जोर-शोर से पूरा करने की कवायद चल रही है। स्लीपर डाल दिए गए हैं। रेल को शिफ्ट करने का कार्य चल रहा है। दौराला खतौली के बीच 15 किलोमीटर की दूरी है और बीच में केवल सकौती स्टेशन है। सकौती में प्लेटफार्म आदि बनाने का कार्य अंतिम चरण में है। खतौली तक यह काम अक्टूबर माह में पूरा हो जायेगा।
समय पर पहुंची संगम एक्सप्रेस
मेरठ: संगम एक्सप्रेस ट्रेन सोमवार को नियत समय पर आई। नौचंदी ट्रेन एक घंटा लेट रही। इलाहाबाद से आने वाली संगम एक्सप्रेस सोमवार को सुबह नियत समय 6.40 बजे सिटी स्टेशन पहुंची। अक्सर लेट रहने वाली संगम के सही समय पर पहुंचने पर यात्रियों ने राहत की सांस ली। नौचंदी 9.30 बजे पहुंची।
इन्होंने कहा-
कालका दिल्ली ट्रेन को अप और डाउन में लगभग एक एक घंटे पाबली और दौराला स्टेशनों पर खड़ा होना पड़ता था। डबल ट्रैक होने से ट्रेनों के संचालन में काफी सुधार आया है।
-आरपी सिंह, अधीक्षक कैंट रेलवे स्टेशन
Jul 13 2017 (21:04)  Meerut Daurala doubling commissioned (twitter.com)
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New Facilities/TechnologyNR/Northern  -  

News Entry# 308288     
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Jul 13 2017 (21:04)
Station Tag: Meerut City Junction/MTC added by Udit Mehta~/51189

Posted by: Udit Mehta~  9 news posts
Meerut Daurala doubling commissioned will improve the mobility on the important route of Delhi-Meerut- Dehradun/Ambala
Jul 07 2017 (08:56)  परेशान हुए यात्री, मिला पूरा रिफंड, देर रात वापस लौटे घर,पढि़ए पूरी खबर (www.patrika.com)
News Entry# 307682     
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Jul 07 2017 (08:56)
Station Tag: Saharanpur Junction/SRE added by The Phenomenal One~/1469143

Jul 07 2017 (08:56)
Station Tag: Meerut City Junction/MTC added by The Phenomenal One~/1469143

Jul 07 2017 (08:56)
Train Tag: Chhattisgarh Express/18238 added by The Phenomenal One~/1469143

Posted by: The Phenomenal One~  857 news posts
छिंदवाड़ा. नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के चलते रद्द की गई छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस को गुरुवार से दूसरे मार्ग से चलाया जाएगा। रेलवे ने यात्रियों की असुविधा को देखते हुए यह निर्णय लिया है। हालांकि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पहले एक्सप्रेस को पांच से 12 जुलाई तक रद्द करने का फैसला लिया गया था।
सूचना न मिलने की वजह से बुधवार रात को छिंदवाड़ा स्टेशन पर पेंचवैली पैसेंजर में लगने वाले छत्तीसगढ़ कोच के यात्री पहुंच गए थे, जो परेशान हुए। रेलवे ने यात्रियों के टिकट का पूरा पैसा वापस कर दिया। लिंगा से आए नरेश धोते ने बताया कि ट्रेन के रद्द होने की जानकारी स्टेशन आने के बाद लगी। अब पूरे परिवार के साथ रात में घर लौटना होगा। अब पता नहीं आगे
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रिजर्वेशन मिल पाएगा या नहीं। इसी तरह अन्य यात्री भी परेशान हुए।
इस रूट से चलेगी छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस
उत्तर रेलवे के अंतर्गत दिल्ली-मेरठ-सहारनपुर तथा मेरठ-दौरला स्टेशनों के बीच रेल लाइन दोहरीकरण हो रहा है। दपूमरे की गाड़ी बिलासपुर-अमृतसर (छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस) को 12 जुलाई तक परिवर्तित मार्ग व्याया निजामुद्दीन-नई दिल्ली-अंबाला कैंट (व्याया दुदिया) से चलाने का निर्णय लिया है।
े तथा 18238 अमृतसर-बिलासपुर( छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस) 8 जुलाई से 14 जुलाई तक अपने नियमित मार्ग अंबाला कैंट-सहारनपुर-मेरठ सिटी-गाजियाबाद-निजामुद्दीन के स्थान पर परिवर्तित मार्ग व्याया अंबाला कैंट-नई दिल्ली-निजामुद्दीन (व्याया दुदिया) के मार्ग से चलाई जाएगी। छत्तीसगढ़ से अमृतसर की ओर जाने वाली यह इकलौती ट्रेन है।
Jul 06 2017 (16:08)  रेलवे ने सुधारी चूक, लगाया ट्रेन निरस्त का टैग (www.jagran.com)
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NR/Northern  -  

News Entry# 307629     
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Jul 06 2017 (16:08)
Station Tag: Meerut City Junction/MTC added by Subhash/746156

Posted by: Subhash  1044 news posts
मेरठ: रेलवे ट्रैक दोहरी करण कार्य के दौरान निरस्त ट्रेनों में आरक्षण करने की चूक उजागर होने के बाद आनन फानन में मंगलवार को रेलवे ने साइट पर टैग लगा दिया है। मंगलवार को सुबह जब आरक्षण की स्थिति चेक की गई तो रिजर्वेशन साइट पर ट्रेन निरस्त दर्शाने लगा। सोमवार को निरस्त वाली तिथियों में आरक्षण उपलब्ध दिखा रहा था हजारों लोगों ने विभिन्न निरस्त ट्रेनों में आरक्षण करा लिया था।
बतातें चलें कि 4 जुलाई के अंक में दैनिक जागरण ने ट्रेन कैंसिल है लेकिन आप रिजर्वेशन करा सकते हैं शीर्षक से प्रमुखता से इस खबर का प्रकाशन किया था। नौचंदी समेत अन्य ट्रेनें जिन तिथियों को निरस्त थी उनमें मेरठ कैंट और अन्य स्टेशनों से धड़ल्ले से आरक्षण हो
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रहे थे। बताया जाता है कि दिल्ली डिवीजन के अंतर्गत रेलवे ट्रैक दोहरीकरण का कार्य चल रहा है। रेलवे मुख्यालय द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद दिल्ली डिवीजन ने तो आनलाइन रिजर्वेशन साइट पर ट्रेन के निरस्त होने का टैग लगा दिया लेकिन मेरठ कैंट से सहारनपुर तक क्षेत्र अंबाला डिवीजन के अंतर्गत आता है उन्होंने टैग नहीं लगाया। यही हाल अन्य प्रमुख ट्रेनों का रहा। रेलवे की चूक का खामियाजा यात्री भुगतते रहे। दैनिक जागरण की खबर असर हुआ और खबर के प्रकाशन के बाद उच्च अधिकारियों ने साइट पर टैग लगवाया। सोमवार को दस से 15 जुलाई के मध्य मेरठ कैंट से लखनऊ जाने वाली नौचंदी में आरक्षण उपलबध दर्शा रहा था। मंगलवार को 9,10,11 समेत आगे की तिथियों में आरक्षण वाली साइट पर ट्रेन निरस्त है लिख कर आ रहा था।
मेरठ: रेलवे ट्रैक दोहरी करण कार्य के दौरान निरस्त ट्रेनों में आरक्षण करने की चूक उजागर होने के बाद आनन फानन में मंगलवार को रेलवे ने साइट पर टैग लगा दिया है। मंगलवार को सुबह जब आरक्षण की स्थिति चेक की गई तो रिजर्वेशन साइट पर ट्रेन निरस्त दर्शाने लगा। सोमवार को निरस्त वाली तिथियों में आरक्षण उपलब्ध दिखा रहा था हजारों लोगों ने विभिन्न निरस्त ट्रेनों में आरक्षण करा लिया था। बतातें चलें कि 4 जुलाई के अंक में दैनिक जागरण ने ट्रेन कैंसिल है लेकिन आप रिजर्वेशन करा सकते हैं शीर्षक से प्रमुखता से इस खबर का प्रकाशन किया था। नौचंदी समेत अन्य ट्रेनें जिन तिथियों को निरस्त थी उनमें मेरठ कैंट और अन्य स्टेशनों से धड़ल्ले से आरक्षण हो रहे थे। बताया जाता है कि दिल्ली डिवीजन के अंतर्गत रेलवे ट्रैक दोहरीकरण का कार्य चल रहा है। रेलवे मुख्यालय द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद दिल्ली डिवीजन ने तो आनलाइन रिजर्वेशन साइट पर ट्रेन के निरस्त होने का टैग लगा दिया लेकिन मेरठ कैंट से सहारनपुर तक क्षेत्र अंबाला डिवीजन के अंतर्गत आता है उन्होंने टैग नहीं लगाया। यही हाल अन्य प्रमुख ट्रेनों का रहा। रेलवे की चूक का खामियाजा यात्री भुगतते रहे। दैनिक जागरण की खबर असर हुआ और खबर के प्रकाशन के बाद उच्च अधिकारियों ने साइट पर टैग लगवाया। सोमवार को दस से 15 जुलाई के मध्य मेरठ कैंट से लखनऊ जाने वाली नौचंदी में आरक्षण उपलबध दर्शा रहा था। मंगलवार को 9,10,11 समेत आगे की तिथियों में आरक्षण वाली साइट पर ट्रेन निरस्त है लिख कर आ रहा था।
Jul 06 2017 (16:05)  बटन की जगह माउस से कंट्रोल होंगी ट्रेनें (www.jagran.com)
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NR/Northern  -  

News Entry# 307628     
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Jul 06 2017 (16:05)
Station Tag: Daurala/DRLA added by Subhash/746156

Jul 06 2017 (16:05)
Station Tag: Meerut City Junction/MTC added by Subhash/746156

Posted by: Subhash  1044 news posts
रेलवे ट्रैक दोहरीकरण कार्य के दौरान कैंट, पावली और दौराला जैसे स्टेशन सिग्नलिंग और कंट्रोल प्रणाली टेक्नॉलाजी के मामले में दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे स्टेशनों के समकक्ष हो जाएंगे। दिल्ली मेरठ सहारनपुर रूट पर तो दिल्ली के बाद यह पहले स्टेशन होंगे जहां सॉलिड स्टेट इंटरलाकिंग (एसएसआइ) आधारित तकनीक काम करेगी। अभी तक मेरठ सिटी समेत अन्य स्टेशनों पर रूट रिले इंटरलाकिंग (आरआरआइ) प्रणाली पर आधारित कंट्रोल पैनल हैं।
सिटी स्टेशन से दौराला के बीच
18 किलोमीटर की दूरी में रेलवे ट्रैक दोहरी करण का काम पूरा हो गया। मेरठ सिटी, मेरठ कैंट,
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और पाबली और दौराला नए सिग्नल लगाने और उसे पुराने सिस्टम से जोड़ने के लिए नान इंटरलाकिंग का कार्य जोरों पर चल रहा है। मेरठ सिटी स्टेशन पर पहले से ही डबल ट्रैक है इसलिए मुख्य काम कैंट, पाबली और दौराला स्टेशन पर हो रहा है।आरआरआइ प्रणाली के कंट्रोल पैनेल का स्थान बड़ी एलइडी कंप्यूटर स्क्रीन ने ले लिया है। बटन की बजाए अब स्टेशन मास्टर माउस के जरिए ट्रेनों का नियंत्रण करते नजर आएंगे। दिल्ली सहारनपुर रूट पर यह पहले स्टेशन होंगे जहां यह प्रणाली काम करेगी। नई प्रणाली पर कार्य करने के लिए स्टाफ को प्रशिक्षण देने का काम भी साथ साथ किया जा रहा है।
इस तरह हाइटेक हो जाएगा सिस्टम
आरआरआइ में सिग्नल से संबधित विभिन्न प्रकार के फंक्शन तारों के माध्यम से रिले से संबद्ध होते थे और रिले के माध्यम से सिग्नल आपरेट होते थे। एसएसआइ में विभिन्न प्रकार के फंक्शन का साफ्टवेयर तैयार कर उसकी प्रोग्राम्ड चिप बना दी गई है। प्रोग्राम्ड चिप को रिले में लगाया गया है जिससे वह आपरेट होगी। जिससे तारों का जंजाल काफी काम हो गया है। आरआरआइ में कई कई रिले होती थी वहीं एसएसआइ में कुछ ही रिलों से पूरी प्रणाली आपरेट हो जाएगी।
तारों के जाल से मुक्ति, व्यवस्थित रहेगा रिले रूम
आरआरआइ में तारों का जाल होता था तार टूटने और उनमें फाल्ट होने की संभावना होती थी साथ ही रिले रूम भी काफी बड़ा होता था। रिले को आपरेट करने के लिए निश्चित वोल्टेज की आवश्यकता होती है तारों के चलते वोल्टेज ड्राप होने से अक्सर रिले आपरेट नहीं होती है।
नब्बे के दशक में होता था हत्थी लीवर से सिग्नलों का प्रचालन
मेरठ कैंट में सबसे पहले आरआरआइ प्रणाली आई थी। इसके बाद मेरठ सिटी स्टेशन में 2002 में आरआरआइ कंट्रोल पैनल लगाया गया था। इसके पहले हत्थी लीवर से सिग्नल आपरेट किए जाते थे। स्टेशन के दोनो ओर दो केबिन होते थे और बीच में स्टेशन मास्टर का कक्ष होता था। कांटे सेट करने काम और सिग्नल आपरेट करने काम हाथों से किया जाता था। नियमित रूप से तीस से चालीस कर्मी शिफ्टों में 24 घंटे काम करते थे।
वर्जन
सॉलिड स्टेट इंटरलाकिंग अत्याधुनिक है। ट्रेनों के सुरक्षित संचालन की दृष्टि मे यह बेहद विश्वसनीय है। जिन स्टेशनों में नया सिस्टम लग रहा है, वह इसी प्रणाली पर आधारित है। मेरठ सहारनपुर रूट पर इसे पहली बार लगाया गया है। सकौती टांडा और खतौली में भी इस सिस्टम को लगाया जाएगा।
-नीरज शर्मा, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर रेलवे
रेलवे ट्रैक दोहरीकरण कार्य के दौरान कैंट, पावली और दौराला जैसे स्टेशन सिग्नलिंग और कंट्रोल प्रणाली टेक्नॉलाजी के मामले में दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे स्टेशनों के समकक्ष हो जाएंगे। दिल्ली मेरठ सहारनपुर रूट पर तो दिल्ली के बाद यह पहले स्टेशन होंगे जहां सॉलिड स्टेट इंटरलाकिंग (एसएसआइ) आधारित तकनीक काम करेगी। अभी तक मेरठ सिटी समेत अन्य स्टेशनों पर रूट रिले इंटरलाकिंग (आरआरआइ) प्रणाली पर आधारित कंट्रोल पैनल हैं। सिटी स्टेशन से दौराला के बीच 18 किलोमीटर की दूरी में रेलवे ट्रैक दोहरी करण का काम पूरा हो गया। मेरठ सिटी, मेरठ कैंट, और पाबली और दौराला नए सिग्नल लगाने और उसे पुराने सिस्टम से जोड़ने के लिए नान इंटरलाकिंग का कार्य जोरों पर चल रहा है। मेरठ सिटी स्टेशन पर पहले से ही डबल ट्रैक है इसलिए मुख्य काम कैंट, पाबली और दौराला स्टेशन पर हो रहा है।आरआरआइ प्रणाली के कंट्रोल पैनेल का स्थान बड़ी एलइडी कंप्यूटर स्क्रीन ने ले लिया है। बटन की बजाए अब स्टेशन मास्टर माउस के जरिए ट्रेनों का नियंत्रण करते नजर आएंगे। दिल्ली सहारनपुर रूट पर यह पहले स्टेशन होंगे जहां यह प्रणाली काम करेगी। नई प्रणाली पर कार्य करने के लिए स्टाफ को प्रशिक्षण देने का काम भी साथ साथ किया जा रहा है। इस तरह हाइटेक हो जाएगा सिस्टम आरआरआइ में सिग्नल से संबधित विभिन्न प्रकार के फंक्शन तारों के माध्यम से रिले से संबद्ध होते थे और रिले के माध्यम से सिग्नल आपरेट होते थे। एसएसआइ में विभिन्न प्रकार के फंक्शन का साफ्टवेयर तैयार कर उसकी प्रोग्राम्ड चिप बना दी गई है। प्रोग्राम्ड चिप को रिले में लगाया गया है जिससे वह आपरेट होगी। जिससे तारों का जंजाल काफी काम हो गया है। आरआरआइ में कई कई रिले होती थी वहीं एसएसआइ में कुछ ही रिलों से पूरी प्रणाली आपरेट हो जाएगी। तारों के जाल से मुक्ति, व्यवस्थित रहेगा रिले रूम आरआरआइ में तारों का जाल होता था तार टूटने और उनमें फाल्ट होने की संभावना होती थी साथ ही रिले रूम भी काफी बड़ा होता था। रिले को आपरेट करने के लिए निश्चित वोल्टेज की आवश्यकता होती है तारों के चलते वोल्टेज ड्राप होने से अक्सर रिले आपरेट नहीं होती है। नब्बे के दशक में होता था हत्थी लीवर से सिग्नलों का प्रचालन मेरठ कैंट में सबसे पहले आरआरआइ प्रणाली आई थी। इसके बाद मेरठ सिटी स्टेशन में 2002 में आरआरआइ कंट्रोल पैनल लगाया गया था। इसके पहले हत्थी लीवर से सिग्नल आपरेट किए जाते थे। स्टेशन के दोनो ओर दो केबिन होते थे और बीच में स्टेशन मास्टर का कक्ष होता था। कांटे सेट करने काम और सिग्नल आपरेट करने काम हाथों से किया जाता था। नियमित रूप से तीस से चालीस कर्मी शिफ्टों में 24 घंटे काम करते थे। वर्जन सॉलिड स्टेट इंटरलाकिंग अत्याधुनिक है। ट्रेनों के सुरक्षित संचालन की दृष्टि मे यह बेहद विश्वसनीय है। जिन स्टेशनों में नया सिस्टम लग रहा है, वह इसी प्रणाली पर आधारित है। मेरठ सहारनपुर रूट पर इसे पहली बार लगाया गया है। सकौती टांडा और खतौली में भी इस सिस्टम को लगाया जाएगा। -नीरज शर्मा, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर रेलवे
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