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Shabdbhedi Express: गति इसकी शब्दों को भेदती है, पूरब को पूर्वांचल से जोड़ती है - Dr. Abhishek Rai

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Today (09:20) Bilaspur Railway News: फटकार के बाद सुधरी व्यवस्था, पहनने लगे वेंडर यूनिफार्म (www.naidunia.com)
IR Affairs
SECR/South East Central
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News Entry# 465021  Blog Entry# 5068177   
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Sep 17 2021 (09:20)
Station Tag: Bilaspur Junction/BSP added by Adittyaa Sharma/1421836
Stations:  Bilaspur Junction/BSP  
बिलासपुर। Bilaspur Railway News: कमसम फूड प्लाजा के वेंडर प्लेटफार्म वेंडिंग के दौरान केवल नील टी-शर्ट पहने नजर आ रहे थे। वह न तो काली पेंट पहनते थे और न टोपी। 'नईदुनिया" में खबर प्रकाशित होने के बाद आइआरसीटीसी के एरिया मैनेजर जेराल्ड सोरेन ने फूड प्लाजा के मैनेजर को जमकर फटकार लगाई और नियम का पालन करने के निर्देश दिए। इस दौरान चेतावनी भी दी गई कि यदि वेंडर यूनिफार्म में नजर नहीं आए तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसी का असर है कि दो दिन से वेंडर यूनिफार्म पहनकर ही वेंडिंग कर रहे हैं।
अवैध वेंडरा पर लगाम कसने के लिए रेलवे के साथ-साथ आइआरसीटीसी ने नए यूनिफार्म की व्यवस्था लागू की। जिसके तहत नीली टी-शर्ट, काली पेंट व टोपी
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को अनिवार्य किया गया था। फिर भी वेंडर पूरे यूनिफार्म में नजर नहीं आ रहे थे। सबसे ज्यादा लापरवाही कमसम फूड प्लाजा के कर्मचारी कर रहे थे। वह केवल नीली टी-शर्ट पहनकर फेरी कर रहे थे। उन पर कार्रवाई तो दूर जांच तक नहीं हो रही थी। इस लापरवाही को 'नईदुनिया" ने प्रकाशित से प्रकाशित की।
इसके बाद आइआरसीटीसी के एरिया मैनेजर जेराल्ड सोरेने ने फूड प्लाजा के मैनेजर को तलब किया और जमकर फटकार लगाई। मैनेजर ने दूसरे ही दिन व्यवस्था में सुधार भी कर ली। लगातार दो दिन से आइआरसीटीसी की टीम नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी जांच भी कर रही है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यह व्यवस्था यात्रियों के लिए सुविधाजनक है। बेझिझक वह यूनिफार्मधारी इन वेंडरों से खानपान की चीजें खरीद सकते हैं। यात्रियों को भी किसी तरह की शिकायत नहीं रहेगी।
झांसी के बबीना थाना क्षेत्र के रेलवे स्टेशन पर गोरखपुर सुपर फास्ट 02103 चलती स्पेशल ट्रेन से उतारते समय गिरकर एक परिवार के तीन लोग गंभीर रुप से घायल हो गया। झांसी मेडिकल कालेज भेजा गया वहां से डॉक्टरों ने उन्हें ग्वालियर रेफर कर दिया। ट्रेन की धीमी रफ़्तार में उतरा था परिवार।

बताते चलें कि लोकमान्य तिलक से झांसी की ओर ट्रेन क्रमांक 02103 गोरखपुर एक्सप्रेस आ रही थी। ट्रेन में यात्री हरीशंकर (45) निवासी न्यू पंप हाउस बबीना अपनी पत्नी मंजू (40) और 9 वर्षीय बेटे सार्थक के साथ यात्रा
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कर रहे थे। ट्रेन जब बबीना स्टेशन पहुंची उस समय उसकी गति धीमी थी। यह देखकर हरीशंकर अपनी पत्नी और बच्चे के साथ चलती ट्रेन से उतरने लगा। इसी दौरान संतुलन बिगड़ा और तीनों प्लेटफार्म पर गिर गए। इसमें बच्चा ट्रेन से टकराकर घायल हो गया तो वहीं दम्पति प्लेटफार्म पर गिरकर घायल हो गया। यह देख प्लेटफॉर्म पर अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में जीआरपी व आरपीएफ मौके पर पहुंची और एम्बुलेंस डायल 108 के ड्राइवर शोभेंद्र कुमार एवं अमित कुमार की मदद से तत्काल घायलों को उपचार के लिए मेडिकल कालेज भेजा। जहां हालत गम्भीर होने पर उन्हें ग्वालियर रेफर कर दिया गया। बताया गया है कि दंपत्ति बच्चे के साथ इटारसी गाए हुए थे और वो मंगलवार को वहा से लौट रहे थे.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था एक आदेश

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि ट्रेन से उतरते समय या चढ़ते समय यात्री की मौत या उसका घायल होना ‘ अप्रिय घटना ’ है और ऐसी स्थिति में यात्री मुआवजे का हकदार है. इस स्थिति को उसकी लापरवाही नहीं मानी जा सकता है. वहीं, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ रेलवे परिसर में किसी शव या घायल के होने से यह निर्णय नहीं हो जाएगा कि घायल या मृत मुआवजे के संबंध में ‘वास्तविक यात्री’ था. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्री के पास टिकट के न होने से उसे मुआवजे से मना नहीं किया जा सकता है और मुआवजे के दावेदार को जरूरी दस्तावेज पेश कर अपने मामले को साबित करना होगा. न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यामूर्ति रोहिंनटन एफ नरीमन की पीठ ने यह निर्णय दिया
Delhi Terror Module: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ कर रही है. गुरुवार को पुलिस ने आतंकियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की. जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. पुलिस सूत्रों के मुताबिक आतंकियों के निशाने पर त्योहारों के इस मौसम में भीड़भाड़ वाले इलाकों के अलावा बड़े ब्रिज और रेलवे ट्रैक भी थे. दिल्ली पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस बार 1993 मे हुए मुंबई धमाको की तर्ज पर आतंकियों को धमाके करने थे.

पकड़े गए आतंकी ओसामा और जीशान ने पूछताछ में बताया कि उन्हें पाकिस्तान में ब्रिज और
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रेलवे ट्रैक उड़ाने की ट्रेनिंग दी गयी थी. इन्हें उन ब्रिज और रेलवे लाइन की रेकी करनी थी जहां ब्लास्ट होने पर जबरदस्त कैजुअलिटी हो. जिसके लिए इन्होंने भीड़भाड़ वाली ट्रैन के रुट्स और उनके टाइमिंग की डिटेल्स इकट्ठा करना शुरू कर दिया था. पुलिस सूत्रों के मुताबिक इनके पास से बरामद विस्फोटक में डेढ़ किलो आरडीएक्स भी था. जो अपने आप मे बड़ी मात्रा है. इस आरडीएक्स से कई बड़े धमाकों को अंजाम दिया जा सकता था.

कई लोगों की जा सकती थी जान

स्पेशल सेल सूत्रों के मुताबिक आतंकियों के पास से बरामद विस्फोटक में आईईडी के साथ करीब डेढ़ किलो RDX था. ये बारूद इतना है जिससे कई बड़े धमाके किए जा सकते है. जिनमें सैकड़ों लोगों की जान जा सकती है. इन धमाकों में ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान जाए इसके लिए भीड़भाड़ वाले इलाके भी इनके निशाने पर थे. अब पुलिस इस मॉड्यूल से जुड़े फरार आतंकियों की तलाश कर रही है. जो इनके साथ इस साजिश में शामिल थे.

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल गिरफ्तार आतंकी ओसामा के चाचा हुमैद की तलाश में है. हुमैद कहीं विदेश ना भाग जाए इसके लिए पुलिस हुमैद के खिलाफ LOC जारी करने की तैयारी कर रही है. साथ ही दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ओसामा के पिता को दुबई से भारत लाने के लिए रेड कॉर्नर नोटिस भी सीबीआई के जरिए जारी करेगी.
Indian Railway Senior Citizen Quota: भारतीय रेलवे में सीनियर सिटीजन को लेकर एक खास कोटा है, जिसके तहत उन्हें किराए में छूट से लेकर लॉअर सीट आदि देने की सुविधा दी जाती है.

भारतीय रेलवे की ओर से यात्रियों को कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं. कई वर्ग के यात्रियों को खास सुविधाएं मिलती हैं और किराये में रियायतें भी दी जाती हैं. हालांकि कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन में ढील के बाद से ही चूंकि ट्रेनें स्पेशल के तौर पर चलाई जा रही हैं, इसलिए सारी
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रियायतें बंद कर दी गई हैं.

पूर्व मध्य रेलवे के एक अधिकारी के अनुसार, ट्रेन सेवाएं सामान्य होने के बाद ही रियायतें पूर्ववत हो पाएंगी. बहरहाल जहां तक नियमों की बात है, उनके अनुसार सीनियर सिटीजन्स को रेलवे की ओर से कई सुविधाएं दी जाती है. उनकी उम्र और सुविधा का ख्याल रखते हुए उन्हें लोअर बर्थ अलॉट किया जाता है. साथ ही किराये में छूट दी जाती है.

आइए विस्तार से जानते हैं कि रेलवे में सीनियर सिटीजन का फायदा किन लोगों को मिलता है और इसमें किन-किन सर्विस में वे फायदा ले सकते हैं.

किसे मिलता है कोटे का फायदा?

रेलवे के नियमों के अनुसार, अगर किसी महिला की उम्र 58 साल है और किसी पुरुष की उम्र कम से कम 60 साल है तो उन्हें वरिष्ठ नागरिक की श्रेणी में गिना जाता है. ऐसे लोगों को सीनियर सिटीजन कोटे का फायदा मिलता है.

कितनी मिलती है छूट?

इसमें महिला वरिष्ठ नागरिकों को मूल किराए में 50 प्रतिशत और पुरूष वरिष्ठ नागरिकों को मूल किराए में 40 प्रतिशत छूट मिलती है. बता दें कि रियायत केवल मूल किराये के आधार पर देय होगी. सुपरफास्ट प्रभार, आरक्षण शुल्क आदि पर कोई रियायत देय नहीं होती है. हालांकि, जिन मामलों में राजधानी/शताब्दी/जनशताब्दी गाड़ियों में रियायत दी जाती है, वह रियायत उन गाड़ियों के कुल प्रभारों (खानपान सहित) पर देय होगी.

कब देना होगा उम्र का प्रमाण?

वरिष्ठ नागरिकों के मामले में टिकट खरीदते समय उम्र का कोई प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं है. रियायती टिकट मांग करने पर ही जारी किए जाते हैं, जिनके लिए आरक्षण फार्म में विकल्प दिया गया है. जब सीनियर सिटीजन यात्रा करते हैं तो यात्रा के दौरान अगर कोई रेल अधिकारी प्रमाण संबंधी मांग करता है तो उन्हें अपनी जन्म तिथि दर्शाने वाला कोई दस्तावेज प्रस्तुत करना होता है. यह प्रमाण-पत्र किसी सरकारी संस्था/एजेंसी/स्थानीय निकाय द्वारा जारी होना चाहिए, जो किसी परिचय-पत्र, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, किसी पंचायत/निगम/नगर-पालिका की ओर से जारी प्रमाण-पत्र के रूप में हो सकता है.

लोअर सीट मिलती है

किराए में छूट के साथ सीनियर सिटीजन यात्रियों को सीट को लेकर भी फायदा मिलता है. उनकी उम्र को देखते हुए सीनियर सिटीजन को ट्रेन में लोअर सीट दी जाती है ताकि उन्हें कोई दिक्कत ना हो. हालांकि, इसे लेकर भी रेलवे का खास नियम है. कई बार सीट प्रेफरेंस देने के बाद भी उन्हें लोअर सीट नहीं मिलती है, इसके कई कारण हो सकते हैं.

रेलवे के नियमों के अनुसार, जब वो अकेले ट्रेन में सफर करते हैं तो उन्हें लोअर बर्थ दी जाती है. अगर मान लीजिए आपने दो लोगों की सीट बुक की है और एक सीनियर सिटीजन की है तो यह नियम लागू नहीं होगा. साथ ही अगर दो से ज्यादा सीनियर सिटीजन एक साथ यात्रा कर रहे हैं तो भी यह नियम लागू नहीं होता है. यानी एक बार में सिर्फ दो लोगों के लिए सीनियर सिटीजन की टिकट बुक की जा सकती है. अगर सिर्फ दो लोग या एक व्यक्ति यात्रा कर रहा है तो उन्हें पैसा मिल जाएगा.
जमशेदपुर : भारतीय रेल देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हर दिन 40 करोड़ लोग ट्रेन से यात्रा करते हैं। कोई दैनिक कामकाज के लिए ऑफिस जाते हैं तो कुछ छुट्टी बिताने के लिए निकलते हैं। कई ऐसे भी यात्री होते हैं जो सीनियर सिटीजन हैं और इनकी सबसे बड़ी परेशानी होती है कि एक टिकट पर दो से अधिक यात्री होने पर उन्हें लोअर सीट नहीं मिलती। जबकि सीनियर सिटीन की परेशानी होती है कि उन्हें ऊपर वाले बर्थ में बार-बार चढ़ने उतरने में परेशानी होती है। उन्हें बार-बार टॉयलेट जाना होता है। एक यात्री ने पिछले दिनों ट्वीट कर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से यह सवाल किया था।

हर
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सीनियर सिटीजन को दी जाए लोअर बर्थ



संबधित यात्री का तर्क था कि जब भी को सीनियर सिटीजन ट्रेन में यात्रा के लिए टिकट ले तो उन्हें प्राथमिकता के तहत लोअर सीट ही दी जाए। क्योंकि सीनियर सिटीजन को ऊपरी बर्थ पर चढ़ने और उतरने में परेशानी होती है जबकि युवा ऐसा आसानी से कर सकते हैं इसलिए रेलवे इसका न सिर्फ ख्याल करे बल्कि अपने सिस्टम में सुधार भी करे।



Sir, Lower berth/Sr. Citizen quota berths are lower berths earmarked only for male age of 60 years and above/female age of 45 years and above, when traveling alone or two passengers ( under mentioned criteria traveling on one ticket. 1/2



-IRCTC Official

आईआरसीटीसी ने दिया जवाब, वर्तमान में भी है सुविधा



उक्त यात्री की ट्वीट पर आईआरसीटीसी के एक अधिकारी ने जवाब दिया कि ऑनलाइन बुकिंग पर अब भी यह सुविधा है। जब भी 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले सीनियर सिटीजन या 45 वर्ष से अधिक उम्र वाली महिला यात्रा करते हैं तो उन्हें लोअर बर्थ ही दिया जाता है। लेकिन जब एक टिकट पर दो से अधिक सीनियर सिटीजन यात्रा करते हैं तो सिस्टम केवल दो सीनियर सिटीजन को ही लोअर बर्थ देता है जबकि सिस्टम के अनुसार तीसरे यात्री को मिडिल या अपर बर्थ मिलेगा। लेकिन जब वे अलग से टिकट बनाते हैं तो अकेले सीनियर सिटीजन को भी लोअर बर्थ दिया जाता है क्योंकि एक टिकट में एक ही कूपे में सभी यात्रियों को एक साथ हम यात्रा करने की सुविधा देते हैं। जिसमें दो ही लोअर बर्थ होता है। ऐसे में सिस्टम केवल दो सीनियर सिटीजन को ही लोअर बर्थ उपलब्ध कराता है।



टिकटों में रियायत का प्रस्ताव अभी नहीं

देश में शिक्षक, युद्ध विधवाएं, पुरस्कार विजेता, कलाकार, खिलाड़ी, किसान, चिकित्सा पेशेवर और युवाओं को ट्रेनों में यात्रा के दौरान टिकट पर 50 प्रतिशत की रियायत मिलती है। लेकिन कोविड 19 के बाद मिलने वाली सभी रियायतों को बंद कर दिया गया है। पिछले दिनों राज्यसभा में एक सवाल का लिखित जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की ओर से यह जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा है कि फिलहाल रियायतों को वापस बहाल करने को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं आया है।
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