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Train 18 - तेरी प्यारी प्यारी Livery को किसी की नज़र न लगे

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JRI/Jharia
     झरिया

Track: Construction - New Line

Type of Station: Regular
Number of Platforms: n/a
Number of Halting Trains: 0
Number of Originating Trains: 0
Number of Terminating Trains: 0
jharia
State: Jharkhand
add/change address
Elevation: 187 m above sea level
Zone: ECR/East Central
Division: Dhanbad
No Recent News for JRI/Jharia
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Rating: NaN/5 (0 votes)
cleanliness - n/a (0)
porters/escalators - n/a (0)
food - n/a (0)
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Station News

Page#    Showing 1 to 12 of 12 News Items  
Mar 27 (06:33) रेलवे आवास खाली कराने के विरोध में प्रदर्शन (m.jagran.com)
Commentary/Human Interest
ECR/East Central
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News Entry# 447120  Blog Entry# 4920908   
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Mar 27 2021 (06:33)
Station Tag: Pathardih Junction/PEH added by Adittyaa Sharma/1421836

Mar 27 2021 (06:33)
Station Tag: Jharia/JRI added by Adittyaa Sharma/1421836
Stations:  Jharia/JRI   Pathardih Junction/PEH  
जासं झरिया झरिया-पाथरडीह रेलवे लाइन में रेल का परिचालन वर्ष 2002 में बंद होने के बाद
जासं, झरिया : झरिया-पाथरडीह रेलवे लाइन में रेल का परिचालन वर्ष 2002 में बंद होने के बाद विभाग की ओर से यहां के कर्मियों के चले जाने के बाद इनके आवासों से दरवाजा, खिड़की आदि सामान ले गया था। दर्जनों लोग इसे दुरुस्त कर रहने लगे। विभाग की ओर से इन आवासों को अब खाली कराया जा रहा है। पूर्व पार्षद अनूप कुमार साव के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने विभाग के इस निर्णय का विरोध कर शुक्रवार को प्रदर्शन किया। पूर्व पार्षद लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं को सुना। कहा कि विभाग की ओर से लोगों को नोटिस देकर बेघर करना निदनीय है।
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ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। लोदना स्टेशन के पास भी रेलवे अधिकारियों के विरुद्ध लोगों ने जमकर नारेबाजी की। विभाग की कार्यशैली से लोग व महिलाएं काफी आक्रोशित थे। अनूप ने कहा कि वर्ष 2002 में आग व भू धंसान का खतरा बताकर यहां रेल का परिचालन बंद कर दिया गया। उस समय रेलवे व बीसीसीएल के साथ इकरारनामा हुआ था कि 15 वर्षों में उक्त भूभाग से कोयला निकालकर आग से सुरक्षित कर जमीन रेलवे को सुपुर्द कर देंगे। 19 वर्ष बीतने के बाद भी रेलवे ने रेल परिचालन की दिशा में कोई कदम नहीं बढ़ाया। अब यहां रहनेवाले लोगों को हटाने की साजिश की जा रही है। रेलवे के अधिकारी बीसीसीएल के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। पहले इन लोगों को विस्थापन का लाभ देना होगा।
विरोध प्रदर्शन में सूरज भुइयां, दिनेश कुमार, राजाराम भुइयां, मनीष कुमार, विक्की कुमार, गणेश पासवान, दीपक पासवान, भरत प्रसाद, पंकज पासवान, किशोरी राम, गंगा देवी, ललिता देवी, आरती देवी, बेबी देवी, राधा देवी, सविता देवी आदि थे।
झारखंड से यात्री सुविधाओं में बढोत्तरी लंबित रेल परियोजनाओं का कार्य पूर्ण करने सहित अन्य समस्याओं के लिए झारखंड चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज द्वारा रेल मंत्रालय को पत्र लिखा गया है। साथ ही एक शहर से दूसरे तक लोकल ट्रेनों की कनेक्टिविटी बढ़ाने की मांग की गई है।
रांची(जासं): झारखंड से यात्री सुविधाओं में बढोत्तरी, लंबित रेल परियोजनाओं का कार्य पूर्ण करने सहित अन्य समस्याओं के लिए फेडरेशन आफ झारखंड चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज द्वारा रेल मंत्रालय को पत्र लिखा गया है। पत्र में कहा गया है कि गिरिडीह में रैक प्वाईंट की स्थापना जरूरी है जिसमें आयरन-ओर, कोयला, सीमेंट इत्यादि मंगाया जा सके क्योंकि गिरिडीह के उद्योगों में प्रत्येक दिन दो रैक आयरन-ओर और दो रैक कोयले की खपत
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है। यदि यहां रैक सेवा बहाल होती है तो यहां उद्योंगों को काफी सुविधा होगी। 
चैंबर अध्यक्ष प्रवीण जैन छाबडा ने कहा कि पासरनाथ, धनबाद व झाझा से गिरिडीह रेल लाइन काफी समीप है ङ्क्षकतु इस परियोजना पर अब तक कार्य आरंभ नहीं हो सका है। इन सभी रेल लाइनों में फंड एलॉट कराकर कार्य को अविलंब चालू कराया जाना आवश्यक है। 
चैंबर महासचिव राहुल मारू ने कहा कि वर्तमान में निवेशकों के बीच झारखंड के प्रति आकर्षण बढा है, ऐसे में अन्य महानगरों की तर्ज पर झारखंड के सभी प्रमुख शहरों के बीच लोकल ट्रेनों को परिचालित करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी सुझाया कि बंद पड़ी  झरिया रेल लाइन पर जोडाफाटक तक सडक निर्माण किया जाय। सडक के दोनों किनारे ट्रैक बनाने से धनसार, जोडाफाटक, पाथडीह, केंदुआ, करकेंद व अन्य आसपास के लोगों को रेलवे स्टेशन पहुंचने में सहूलियत होगी। 
ओवरब्रिज का कराया जाए निर्माण 
चैंबर द्वारा यह भी कहा गया कि साहेबगंज पूर्वी एवं पश्चिमी रेलवे क्राङ्क्षसग पर ओवरब्रिज का निर्माण जो रेल मंत्रालय द्वारा अनुशंसित है, का निर्माण कार्य शीघ्र कराया जाय। यह फाटक प्राय: बंद रहता है जिस कारण शहर जाम व आवागमन में लोगों को कठिनाई होती है।
ये हैैं मांगें
छत्तीसगढ व ओडिसा में जोनल कार्यालय होने से वहां रेलवे परियोजनाओं का विकास हुआ है। ऐसे में आवश्यक है कि रांची, धनबाद व चक्रधरपुर को मिलाकर प्रदेश में एक नया जोनल कार्यालय खोला जाए। रांची से प्रमुख शहरों के लिए कुछ ट्रेनों को परिचालित करने का भी आग्रह किया गया। मुख्य रूप से तपस्विनी एक्सप्रेस, रांची-दिल्ली गरीब रथ, स्वर्णजयंती एक्सप्रेस, हटिया-पूणे एक्सप्रेस, रांची-भुवनेश्वर, रांची-सूरत, रांची-जयपुर तथा रांची से नई दिल्ली के लिए पूर्व में परिचालित अन्य ट्रेनों को आरंभ करने की मांग की गई। टोरी लाइन से राजधानी का परिचालन कराया जाय, इससे यात्रा के समय में बचत होती है।

Rail News
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Mar 08 (23:13)
Subrat Shrivastava~   28027 blog posts
Re# 4900602-1            Tags   Past Edits
Jharkhand utna bara state nhi hai ki Mumbai, Kolkata ki tarah local trains chalaaya jaaye.
MEMU/Passenger enough hai

20564 views
Mar 08 (23:24)
Bigg boss 13
PURVANCHALEXPRE~   2512 blog posts
Re# 4900602-2            Tags   Past Edits
Deoghar airport yani air contivity k liye
Jsme Dhanbad jsme asansol bdme kiul
Memu
Deoghar bhagalpur demu 2 2 hour m chale
Aacha se fayda hoga sabka

Rail News
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Mar 09 (17:38)
aniket
aniket~   218 blog posts
Re# 4900602-3            Tags   Past Edits
NGRH-PNME line ban jaye fir giridih se rnc,tata ka distance kaafi kam ho jayega, plus jsme se rnc,tata via ngrh-pnme-gomo alternative shortest route ban jayega
Sep 13 2020 (19:45) हद हो गई : उखाड़ दी रेल पटरी, बसा ली बस्ती (www.jagran.com)
Other News
ECR/East Central
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News Entry# 418290  Blog Entry# 4714867   
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Sep 13 2020 (19:45)
Station Tag: Dhansar/DQS added by 03307 The First ECR Train to Hit 130 in GC/1490219

Sep 13 2020 (19:45)
Station Tag: Jharia/JRI added by 03307 The First ECR Train to Hit 130 in GC/1490219

Sep 13 2020 (19:45)
Station Tag: Dhanbad Junction/DHN added by 03307 The First ECR Train to Hit 130 in GC/1490219
धनबाद : रांगाटांड़ की रेलवे लाइन की बात करें तो यहां दोनों किनारों पर झुग्गियां बसी हैं। बावजूद बंद हो चुकी झरिया रेल लाइन की कहानी इतर है। यहां पटरी के आसपास तो छोड़िए, उसके ऊपर भी मकान बन चुके हैं। और तो और करीब 50 करोड़ रुपये कीमत की रेल पटरी, सिग्नल पोल व अन्य सामग्री तक लोग रातोंरात उखाड़ ले गए। रेल पटरी की जगह घर बना लिया है तो अंदर डर भी है, सो घरों की छतें पक्की नहीं बनाई गई है। 2002 में बंद हुई झरिया रेल लाइन की जमीन पर पार्क बनाने की तैयारी दो साल पहले हुई थी। तत्कालीन डीआरएम मनोज कृष्ण अखौरी ने नगर निगम से बातचीत की थी। रेलवे की पहल पर नगर निगम पार्क बनाने को राजी हो गया था। वहां रहने वालों को जमीन खाली करने के लिए नोटिस दिया गया। इसके बाद भी जब वहां बसे लोग हटने को राजी...
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नहीं हुए तो रेलवे ने जिला प्रशासन की मदद से अतिक्रमण हटाने की तैयारी की। मामला हाई क ोर्ट पहुंच गया। वहां बताया गया 183 परिवार वर्ष 1944 से रह रहे हैं। बिजली बिल और नगर निगम को टैक्स भी चुकाया जाता है। इसलिए नहीं उजाड़ा जाए। रेलवे ने दावा किया कि झरिया रेल लाइन की जमीन का अधिग्रहण वर्ष 1914 में किया गया था। जब हाईकोर्ट ने रेलवे को दस्तावेज पेश करने के आदेश दिए तो रेलवे कागजात न्यायालय के समक्ष पेश नहीं कर सकी। नतीजा हाई कोर्ट ने स्टे दे दिया। हैरतअंगेज बात ये कि हाई कोर्ट ने सिर्फ 183 परिवार को नहीं उजाड़ने के लिए स्टे आर्डर दिया। बावजूद इसका फायदा भूमाफिया उठाने लगे। नतीजा आज दो हजार से ज्यादा झोपड़ी, दर्जनों माल गोदाम और खटाल बन गए हैं।
बैंक मोड़ शांति भवन के पीछे हर ओर दिखते खटाल शहर के पॉश इलाके में शुमार बैंक मोड़ के शांति भवन के पीछे झरिया रेल लाइन के इर्द-गिर्द जहां तक नजर जाएगी, सिर्फ खटाल ही दिखेंगे। रेलवे के ढुलमुल रवैये से करोड़ों की जमीन पर कब्जा होता गया। न इंजीनियरिग विभाग और न आरपीएफ ने कभी रोकने की कोशिश की। 2002 में भूमिगत आग के कारण बंद हुई थी रेलवे लाइन : धनबाद झरिया रेल लाइन को वर्ष 2002 में भूमिगत आग का खतरा बताकर बंद किया गया था। उसके बाद बीसीसीएल ने कोयला खनन के लिए रेलवे से जमीन लीज पर ली थी। दो दशक बाद भी कोयला नहीं निकाला जा सका। हां झरिया रेल लाइन का अस्तित्व समाप्त हो गया। जहां के लिए करोड़ों का फंड सिर्फ वहीं खाली होती है जमीन
धनबाद : जमीन पर कब्जा और उसे मुक्त कराने को लेकर भी रेलवे में दो सिस्टम दिखते हैं। दरअसल ऐसी जगह का अतिक्रमण जहां रेलवे का प्रोजेक्ट स्वीकृत है और करोड़ों के फंड मिल रहा है वहां से अवैध कब्जे हटाने को रेलवे ताकत झोंक देती है। जहां प्रोजेक्ट नहीं स्वीकृत है वहां की जमीन का अतिक्रमण देख कर भी रेल अधिकारी आंखें बंद कर लेते हैं। और स्कूल से ले ली जमीन वापस : पुराना बाजार डीएवी स्कूल से सड़क निर्माण के लिए लगभग तीन करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। डायमंड क्रासिंग के पास 12 करोड़ से सबवे भी प्रस्तावित है। मामला करोड़ों का था। सो रेलवे ने पूरी ताकत झोंक दी। दशकों पहले डीएवी स्कूल प्रबंधन को लीज पर दी गई जमीन को छीन लिया। यहां तोड़ दीं फुटपाथ की दुकानें : धनबाद रेलवे स्टेशन के सामने के हिस्से का सुंदरीकरण का प्रोजेक्ट पास हुआ। इसमें तकरीबन ढाई करोड़ रुपये खर्च होने हैं। यहां भी मामला करोड़ों का है। बस रेलवे यहां भी रेस हुई। अतिक्रमण कर बनाई गई सारी फुटपाथ की दुकानों को तोड़कर हटा दिया गया। मॉडल कॉलोनी के लिए तोड़ दिए अवैध कब्जे : रांगाटांड़ रेलवे कॉलोनी को तीन करोड़ खर्च कर मॉडल कॉलोनी बनाने की योजना थी। यहां भी तकरीबन 300 अवैध कब्जे तोड़ कर हटा दिए गए। हालांकि बाद में कोरोना काल के चलते फंड की कमी के कारण इस प्रोजेक्ट को फिलहाल रोक दिया गया। यहां मिली योजना तो हटा दिए 700 कब्जे : गोमो रेलवे स्टेशन को करोड़ों खर्च कर नए सिरे से विकसित किए जाने की योजना बनी है। यहां स्टेशन के आसपास तकरीबन 700 से ज्यादा दुकानें थीं। योजना बनी तो फंड भी तय हुआ। बस इन दुकानों को तोड़कर हटा दिया गया। यहां भी अपनी जमीन को कब्जा मुक्त करने में रेलवे ने पूरी ताकत झोंकी। नतीजा सार्थक आया। यानी रेलवे चाह ले तो अवैध कब्जा हटाना मुश्किल नहीं। अतिक्रमणकारियों को मिलता नेताओं का साथ : रेलवे की जमीन पर कब्जा करने वाले वोटर हैं। उन्हें अपना वोट बैंक बनाने के लिए राजनीतिक पार्टियां उनका साथ देती रहीं और अपना काम निकालती रहीं। रेलवे की जमीन पर कब्जे को उन्होंने अपने राजनीतिक हित के लिए इस्तेमाल कर दिया। नतीजा राजनीतिक हस्तक्षेप होने के कारण रेलवे को अवैध कब्जा हटाने से कई बार हाथ खींचने पड़े। रांगाटांड़ रेलवे कॉलोनी से कब्जा खाली कराए जाने को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि ने हस्तक्षेप किया। बाद में डीएवी स्कूल मैदान को खाली कराने के दौरान भी सांसद और विधायक दोनों रेलवे के विरोध में खड़े रहे। दूसरी राजनीतिक पार्टियों ने इसे मुद्दा बनाया तो सियासत होती रही। Posted By: Jagranडाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस
Nov 29 2018 (07:56) दिल्ली मेट्रो की चपेट में आने से झरिया के युवक की माैत (m.jagran.com)
Major Accidents/Disruptions
DMRC/Delhi Metro
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News Entry# 370227  Blog Entry# 4051399   
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Nov 29 2018 (07:56)
Station Tag: Jharia/JRI added by Adittyaa Sharma^~/1421836

Nov 29 2018 (07:56)
Station Tag: New Delhi/NDLS added by Adittyaa Sharma^~/1421836
Stations:  New Delhi/NDLS   Jharia/JRI  
राैैकन रविवार की रात दिल्ली में मेट्रो ट्रेन पर चढ़ रहा था। इस दाैरान वह ट्रेन की चपेट में आ गया। जख्मी हाल में स्थानीय लोगों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। रौनक की मौत की सूचना दिल्ली पुलिस ने उसके पिता अनिल को दी। मंगलवार को शव को दिल्ली से धनसाल लाया गया। बस्ताकोला मुक्तिधाम में रौनक का अंतिम संस्कार किया गया। काफी संख्या में उनके परिजन, रौनक के मित्र, मारवाड़ी समाज के लोग और झरिया के व्यवसायी शामिल हुए। अखिल भारतीय मारवाड़ी सम्मेलन राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य महेंद्र भगानिया, मारवाड़ी सम्मेलन झरिया के अध्यक्ष डॉ ओपी अग्रवाल, मारवाड़ी युवा मंच के अजय अग्रवाल, सीमा अग्रवाल, विनोद अग्रवाल आदि ने रौनक की मौत पर गहरा दुख जताया है।
Aug 09 2018 (18:22) पूरा रेलवे स्टेशन हुआ चोरी, कहीं रेलवे ट्रैक पर लोग कर रहे खेती, तो कहीं कमरे में बांध रहे मवेशी (newswing.com)
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ECR/East Central
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News Entry# 350285  Blog Entry# 3697754   
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Aug 09 2018 (18:23)
Station Tag: Dhanbad Junction/DHN added by 🔥13329🌟The Sleep Killer🌟13330🔥^~/1490219

Aug 09 2018 (18:23)
Station Tag: Jharia/JRI added by 🔥13329🌟The Sleep Killer🌟13330🔥^~/1490219
Stations:  Dhanbad Junction/DHN   Jharia/JRI  
Dhanbad : आपने चोरी की कई घटनाएं सुनी होगी, शायद देखा भी हो, लेकिन क्या आपने कभी सुना है की चोरों ने पूरा का पूरा रेलवे स्टेशन ही चुरा लिया हो ? चौंकिये मत, ये बात सोलह आने सच है. झारखंड के धनबाद में धनबाद-झरिया-सिंदरी रेल मार्ग पर आने वाले कई स्टेशनों का अस्तित्व ही चोरों ने समाप्त कर दिया है. इतना ही नहीं इन रेलवे स्टेशनों के कमरों में मवेशी बांधे जाते हैं.
अग्नि प्रभावित क्षेत्र घोषित कर बंद किए गए स्टेशन
धनबाद का झरिया, जो कभी राज-रजवाड़ों का शहर हुआ करता
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था. आज झरिया कोयलांचल के नाम से प्रसिद्ध है. दरअसल इस धरती के गर्भ में कोयले की मौजूदगी का पता सर्वप्रथम यहां राज कर रहे अंग्रेजों ने लगाया और उसका दोहन शुरू किया. जिसके बाद कोयले की ढुलाई के लिए अंग्रेजो ने ही 1905 में यहां रेलवे लाइन का निर्माण कराया. आजादी के बाद भारतीय रेल ने इस रेल लाइन को और विकसित करते हुए इसे धनबाद-झरिया-सिंदरी रेल लाइन में विकसित कर दिया. जिसके बाद इस रेल मार्ग पर रोजाना दर्जनों छोटी-बड़ी ट्रेनें दौड़ने लगी. लेकिन यहां कोयला उत्खनन कर रही कोयला कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने इस क्षेत्र को अग्नि प्रभावित क्षेत्र घोषित करते हुए रेल प्रशासन को एक पत्र लिखा और यह रूट बंद करने का अनुरोध किया. जिसके बाद 2004-2005 में इस रेल मार्ग को रेलवे ने बंद कर दिया.
क्या है स्टेशनों का हाल
इसके बाद इस रेल रूट पर आने वाले कई स्टेशनों पर लूट मच गई. लेकिन इसकी परवाह ना तो रेल अधिकारियों ने की और ना ही सुरक्षा के लिए जवाबदेह एजेंसियों ने. देखते ही देखते धनसार, झरिया सहित कई रेलवे स्टेशनों के नामोनिशान तक गायब कर दिए गए. धनबाद से धनसार जाने वाले रेल रूट पर खेती की जा रही है और धनसार स्टेशन पर लोगों ने दुकानें खोल दी है. यही नहीं, धनसार स्टेशन से होकर गुजरने वाली रेलवे ट्रैक भी चोरी हो गई. कई स्थानों पर तो ट्रैक के किनारे लगे खंभे, फाटक, सिग्नल लाइट्स समेत कई महंगे उपकरण और कीमती पार्ट्स भी लोगों ने बेच दिया. कह सकते हैं कि करोड़ों रुपये की संपत्ति सुनियोजित तरीके से गायब कर दी गई. वहीं एक स्थानीय अशोक कुमार ने बताया कि झरिया स्टेशन तो बंद होने के साथ ही उजड़ गया था. लेकिन स्टेशन पर फुटओवर ब्रिज, यात्री शेड, रेलवे ट्रैक जैसे कई पुराने अवशेष बचे हुए थे, लेकिन कुछ ही दिनों में लोगों ने स्टेशन परिसर में सुरक्षा की कमी का फायदा उठाते हुए वहां मौजूद रेलवे का सारा सामान गायब कर दिया. रेलवे के आॅफिस में मवेशी फाॅर्म खोल लिए गए. लोदना स्टेशन पर भी ऐसी चोरी जारी है. एक अनुमान के मुताबिक स्टेशन पर लोहे के सामान की अनुमानित कीमत 50 करोड़ से अधिक की थी. लेकिन आज वह स्टेशन परिसर खंडहर में तब्दील हो चुका है.
क्या कहना है जन संपर्क पदाधिकारी का
यहीं पास में रहने वाले बिहारी लाल चौहान ने बताया कि ऐसा नहीं है की बंद हो चुके इस झरिया स्टेशन से रेलवे का हर नाता टूट चूका है और वो यहां से अपना मुह मोड़ चुके हैं. झरिया के इसी खंडहर हो चुके रेलवे स्टेशन के दूसरी दिशा में रेलवे का आरक्षण काउंटर चल रहा है. जहां से रोजाना सैकड़ो यात्रियों को आरक्षित रेलवे सीट दी जा रही है. लेकिन चोरों और अतिक्रमणकारियों का कारनामा यहां आने वाले किसी भी रेल अधिकारियों को ना तो दिखलाई देती है और ना ही उनके कारनामों के किस्से सुनाई देती है. वहीं धनबाद रेल मंडल के जन संपर्क पदाधिकारी कि माने तो 2004-2005 में जब इन रेल स्टेशनों को बंद किया गया था, तभी यहां के सभी सामानों की नीलामी कर दी गयी थी, साथ ही उन्होंने कहा कि यदि इसके बावजूद वहां अपराधियों या अतिक्रमणकारियों ने उत्पात मचाया है, तो उनके खिलाफ विधि सम्मत कार्यवाई की जाएगी.
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